CJI

इंदिरा गांधी को अयोग्य क़रार देने का निर्णय बहुत साहस भरा था: सीजेआई एनवी रमना

इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में एक कार्यक्रम में शामिल हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि साल 1975 में वह जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा थे, जिन्होंने ऐसा आदेश पारित किया, जिसमें इंदिरा गांधी को अयोग्य क़रार दिया गया. इस निर्णय ने देश को हिलाकर रख दिया था.

क्या अमित शाह से टकराने की सज़ा मिली जस्टिस अकील क़ुरैशी को?

वीडियो: मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमनe ने सुप्रीम कोर्ट की तीन महिला न्यायाधीशों सहित नौ नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई, जिससे सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 33 हो गई. इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने एक साथ ली. नियुक्तियां विवाद के बिना नहीं रही हैं क्योंकि त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अजिल कुरैशी शीर्ष अदालत में पदोन्नति के लिए चुने गए सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम में से नहीं थे. यह आश्चर्यजनक था, क्योंकि जस्टिस ए.एस. ओका, जिन्हें ऊपर उठाया गया था. इस मुद्दे पर पूर्व जस्टिस अंजना प्रकाश से आरफा खानम शेरवानी की बातचीत.

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार तीन महिलाओं समेत कुल नौ न्यायाधीशों ने एक साथ शपथ ली

भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन महिला न्यायाधीशों सहित नौ नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 33 हो गई है.

संसदीय बहसों का न होना खेदजनक स्थिति है: मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना

स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि संसद में बहस की कमी के कारण क़ानून बनाने की प्रक्रिया में बहुत सारी अस्पष्टताएं होती हैं. हमें नहीं पता कि विधायिका का इरादा क्या है, क़ानून किस उद्देश्य से बनाए गए. इससे लोगों को असुविधा होती है. ऐसा तब होता है, जब क़ानूनी समुदाय के सदस्य संसद और राज्य विधानमंडलों में नहीं होते.

थानों में मानवाधिकारों के हनन का सबसे ज़्यादा ख़तरा: सीजेआई रमना

सीजेआई एनवी रमना ने एक कार्यक्रम में कहा कि हमारे संविधान में इस बात की गारंटी दी गई है कि लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा होगी, फिर भी थानों में क़ानूनी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता जिसके अभाव में गिरफ़्तार या हिरासत में लिए गए लोगों को वहां सबसे अधिक ख़तरा रहता है.

500 से अधिक कार्यकर्ताओं, वकीलों ने सीजेआई को पत्र लिखा- केंद्र से पूछें पेगासस खरीदा या नहीं

द वायर सहित एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम ने सिलसिलेवार रिपोर्ट्स में बताया है कि देश के केंद्रीय मंत्रियों, 40 से ज़्यादा पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, एक मौजूदा जज, कई कारोबारियों व कार्यकर्ताओं समेत 300 से अधिक भारतीय फोन नंबर उस लीक डेटाबेस में थे, जिनकी पेगासस से हैकिंग हुई या वे संभावित निशाने पर थे.

नंदीग्राम मामला: सुनवाई से अलग हुए जस्टिस चंदा, ममता बनर्जी पर पांच लाख का जुर्माना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी की जीत को लेकर चुनाव आयोग के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी है. उन्होंने मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस कौशिक चंदा द्वारा राजनीतिक पक्षपात की आशंका जताते हुए उन्हें इस केस से हटाने की मांग उठाई थी.

जजों की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए कोर्ट ने केंद्र को दी समयसीमा, कहा- अदालतों की स्थिति ख़राब

सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समयसीमा पर ज़ोर देते हुए ऐसे उच्च न्यायालयों को लेकर चिंता व्यक्त की, जहां न्यायाधीशों के 40-50 प्रतिशत पद रिक्त हैं. कोर्ट ने कहा कि अगर कॉलेजियम अपनी सिफ़ारिशों को सर्वसम्मति से दोहराता है तो केंद्र को तीन-चार सप्ताह के भीतर न्यायाधीशों की नियुक्ति कर देनी चाहिए.

कई महिला वकील घरेलू ज़िम्मेदारियों के चलते जज बनने से इनकार कर देती हैं: सीजेआई बोबडे

उच्च न्यायालयों में महिला जजों की नियुक्ति संबंधी याचिका की सुनवाई के दौरान सीजेआई एसए बोबडे ने कहा कि केवल हाईकोर्ट में ही क्यों, समय आ गया है जब भारत की प्रधान न्यायाधीश महिला होनी चाहिए. तीन जजों की पीठ ने यह भी कहा कि कॉलेजियम ने हर बैठक उच्च न्यायपालिका में महिलाओं की नियुक्ति पर विचार किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कॉलेजियम के भेजे नामों को मंज़ूरी देने की समयसीमा बताने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वे एक तर्कसंगत समयसीमा बताए जिसके अंदर वे शीर्ष अदालत के कॉलेजियम द्वारा जजों की नियुक्ति के लिए की गई सिफ़ारिशों पर कार्रवाई कर सकता है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि उसके कॉलेजियम द्वारा भेजे गए दस नाम, जो सरकार के पास डेढ़ साल से लंबित हैं, को कब तक मंज़ूरी मिलने की उम्मीद की जा सकती है.

लोकतंत्र बचा सकने वाली अकेली संस्था ही इसका गला घोंटने में मदद कर रही है

भारत में अक्सर न्यायिक आज़ादी के रास्ते में कार्यपालिका और कभी-कभी विधायिका द्वारा बाधा डालने की संभावनाएं देखी जाती हैं, लेकिन जब न्यायपालिका के भीतर के लोग ही अन्य शाखाओं के सामने झुक जाते हैं, तो स्थिति बिल्कुल अलग हो जाती है.

मुकदमे से पहले अनिवार्य मध्यस्थता वाले कानून के लिए यह उपयुक्त समय है: सीजेआई

सीजेआई एसए बोबडे ने कहा कि वैश्विक समुदाय के एक अभिन्न सदस्य तथा व्यापार और निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण होने के नाते भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में किस तरह से शामिल होता है इसका सीमा पार अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वाणिज्य और निवेश के प्रवाह पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है.

विश्वविद्यालयों को किसी उत्पादन इकाई की तरह काम नहीं करना चाहिए: सीजेआई बोबडे

सीजेआई शरद अरविंद बोबडे ने राष्ट्रसंत तुकादोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के 107वें दीक्षांत समारोह में कहा कि नागरिकता सिर्फ लोगों के अधिकारों के बारे में ही नहीं बल्कि समाज के प्रति उनके कर्तव्यों के बारे में भी है.

सीजेआई बोबडे अयोध्या, निजता के अधिकार सहित ऐतिहासिक फैसलों में रहे शामिल

जस्टिस बोबडे रविवार को सेवानिवृत्त हुए जस्टिस रंजन गोगोई का स्थान लेंगे. मुख्य न्यायाधीश के रूप में बोबडे का कार्यकाल करीब 17 महीने का होगा और वह 23 अप्रैल 2021 को सेवानिवृत्त होंगे.

जस्टिस एसए बोबडे ने भारत के 47वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली

एसए बोबडे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रह चुके हैं. वह कई महत्वपूर्ण पीठों का हिस्सा रहे हैं. इसके अलावा मुंबई में महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और नागपुर में महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वह चांसलर भी हैं.