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शादी के झूठे वादे के आधार पर यौन संबंध बनाने संबंधी क़ानून में संशोधन की ज़रूरत: अदालत

एक सुनवाई के दौरान ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस एसके पाणिग्रही ने कहा कि आईपीसी की धारा 375 के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि कौन-सी परिस्थिति में ‘सहमति’ को ‘असहमति’ के तौर पर दर्ज किया जाता है, लेकिन इस धारा में उल्लिखित परिस्थितियों में विवाह के वादे पर बने यौन संबंध शामिल नहीं हैं. इसे लेकर दोबारा सोचने की ज़रूरत है.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

अगर लिव-इन पार्टनर शादी न कर सके, तब भी सहमति से बना शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि बलात्कार और सहमति से बनाए गए यौन संबंध के बीच स्पष्ट अंतर होता है. अगर व्यक्ति अपने नियंत्रण के बाहर की किन्हीं परिस्थितियों के चलते महिला से शादी नहीं कर पाता, तो उसे बलात्कार नहीं मान सकते.