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(फोटो: रॉयटर्स)

कोवैक्सीन में बछड़े के सीरम के बारे में सोशल मीडिया पर तथ्य तोड़-मरोड़ कर पेश किए गए: केंद्र

कांग्रेस नेता गौरव पांधी ने एक आरटीआई के जवाब में मिले दस्तावेज़ को साझा करते हुए कोवैक्सीन में गाय के बछड़े के सीरम का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया था. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि नवजात बछड़े के सीरम का इस्तेमाल केवल वेरो कोशिकाएं तैयार करने और उनके विकास के लिए ही किया जाता है. वैक्सीन के अंतिम रूप में बछड़े का सीरम बिल्कुल नहीं होता.

कोविशील्ड. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविशील्ड अंतराल बढ़ाने पर विशेषज्ञों की असहमतियों की ख़बरों को केंद्र ने खारिज़ किया

भारत सरकार ने जिस वैज्ञानिक समूह की मंज़ूरी के आधार पर कोविशील्ड की दो खुराक के बीच के अंतर को दोगुना किया था, उस वैज्ञानिक सलाहकार समूह के तीन सदस्यों ने इससे इनकार किया था. इस पर स्पष्टीकरण देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि तीनों में से किसी सदस्य ने असहमति व्यक्त नहीं की थी.

कोविशील्ड. (फोटो: रॉयटर्स)

वैज्ञानिक समिति के सदस्यों ने कहा- नहीं की थी कोविशील्ड खुराक में अंतर दोगुना करने की सिफ़ारिश

केंद्र सरकार ने जिस वैज्ञानिक समूह की मंज़ूरी के आधार पर कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक के बीच के अंतर को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह करने का दावा किया था, उसके तीन प्रमुख सदस्यों ने कहा है कि इस टीके की दो खुराक के अंतर को दोगुना करने की सिफ़ारिश के लिए निकाय के पास पर्याप्त डेटा नहीं है.

कोविशील्ड. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविशील्ड की खुराकों में अंतराल में बदलाव को लेकर उचित वैज्ञानिक अध्ययन की ज़रूरत: सरकार

कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतर को थोड़ा कम करने की बात कहने वाले कुछ अध्ययनों की ख़बरों के संदर्भ में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि इस तरह की चिंताओं पर बिना हड़बड़ी के संतुलित रुख़ की ज़रूरत है. बीते महीनों में कोविशील्ड की खुराकों के बीच का समयांतर दो बार बढ़ाया गया है.

वाराणसी के एक टीकाकरण केंद्र पर कतार में लगे लोग. (फोटो: पीटीआई)

वैक्सीन वितरण में असमानता: निजी क्षेत्र के लिए निर्धारित कोटे का 50 फीसदी नौ अस्पतालों ने खरीदा

मई महीने में केंद्र द्वारा वैक्सीन पॉलिसी में संशोधन किए जाने और इसे बाज़ार के लिए खोलने के बाद वैक्सीन की कुल 1.20 करोड़ खुराक में से 60.57 लाख नौ निजी अस्पतालों ने खरीदी हैं. बाकी पचास फीसदी टीके भी अधिकतर शहरों में बने 300 अस्पतालों द्वारा खरीदे गए हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार को जितने टीके मिले, उससे 6.95 करोड़ अधिक वितरित किए: आरटीआई कार्यकर्ता

आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश बत्रा ने अपने आवेदनों पर आए केंद्र के जवाबों और सरकार द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारी की तुलना करते हुए सवाल किया है कि यह कैसे संभव है कि 2 मई तक केंद्र ने केवल 16.23 करोड़ टीके प्राप्त किए थे, पर तब उसके द्वारा 23.18 करोड़ टीकों की खुराक वितरित या आपूर्ति की बात कही गई थी.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल के लिए सूचीबद्ध करने को लेकर और जानकारी की ज़रूरत: डब्ल्यूएचओ

भारत बायोटेक की ओर से कहा गया है कि वह डब्ल्यूएचओ की आपात इस्तेमाल सूची में कोवैक्सीन के सूचीबद्ध होने को लेकर आश्वस्त है. हाल में कुछ ख़बरें आई थीं कि जिन भारतीयों ने कोवैक्सीन की खुराक ली हैं, उन्हें विदेश यात्रा करने में परेशानी आ रही है, क्योंकि इस टीके को मान्यता नहीं मिली है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

सीरम इंस्टिट्यूट के कार्यकारी निदेशक ने कहा- सरकार ने बिना विचार किए बढ़ाया टीकाकरण का दायरा

देश में कोविड-19 टीकों की भारी कमी के बीच पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक सुरेश जाधव ने आरोप लगाया है कि सरकार ने टीकों के उपलब्ध स्टॉक और डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश को ध्यान में रखे बिना कई आयु वर्ग के लोगों को टीका लगाना शुरू कर दिया है.

8 अप्रैल को मुंबई के एक टीकाकरण केंद्र पर वैक्सीन ख़त्म होने के बाद खड़े लोग. (फोटो: पीटीआई)

सरकारी अधिकारी कोविड-19 के हालात से बेख़बर, भगवान इस देश को बचाए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने देश में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी के उत्पादन संबंधी याचिका को सुनते हुए कहा कि जब केंद्र के पास लाखों टीकों की खुराक प्राप्त करने का अवसर है तब भी कोई दिमाग नहीं लगा रहा है, जबकि सरकार को इसे एक अवसर के तौर पर अपनाना चाहिए.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

वैक्सीन के अभाव में दिल्ली सरकार को बंद करना पड़ेगा 18 साल से ऊपर का टीकाकरण: सिसोदिया

दिल्ली के अलावा तेलंगाना सरकार ने राज्य में कोविड-19 टीके की कमी के कारण 45 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को दूसरी खुराक देना स्थगित कर दिया है और अभी तक 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू नहीं कर पाया है.

स्पुतनिक वी टीका. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविड-19: डॉ. रेड्डीज ने स्पुतनिक वी टीका भारत में पेश किया, दाम 995 रुपये प्रति खुराक

कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद देश में शुक्रवार को एक तीसरे टीके को भारतीय बाज़ारों के लिए जारी कर दिया गया और पिछले दो टीकों की केंद्र, राज्यों और बाज़ार के लिए अलग-अलग कीमत के बजाय इसकी एक ही कीमत 995.40 रुपये प्रति खुराक रखी गई है.

कोविशील्ड. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविशील्ड टीके की दो डोज़ के बीच का समय 6-8 सप्ताह बढ़ाकर 12-16 हफ़्ता किया गया: सरकार

पिछले कुछ महीनों में दूसरी बार ऐसा हुआ है, जब कोविशील्ड टीके की दो डोज के बीच का समयांतर बढ़ाया गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मार्च में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वह दो डोज के बीच समयांतर को 28 दिनों से बढ़ाकर 6 से 8 सप्ताह तक कर दें. कोवैक्सीन के दो डोज के बीच के समय में बदलाव नहीं किया गया है.

कोविड महामारी के दौर में लोगों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है. दिल्ली के शवदाह गृह का हाल. (फोटो: रॉयटर्स)

संपादकीय: कोविड संकट में सरकार के नाकाम प्रबंधन की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग की ज़रूरत है

कोविड-19 की दूसरी लहर ने जिस राष्ट्रीय आपदा को जन्म दिया है, वैसी आपदा भारत ने आजादी के बाद से अब तक नहीं देखी थी. इस बात के तमात सबूत सामने हैं कि इसे टाला जा सकता था और इसके प्राणघातक प्रभाव को कम करने के लिए उचित क़दम उठाए जा सकते थे.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

कोरोना वायरस के स्वरूपों का पता लगाया जाए, नए म्यूटेशन पर टीकों के असर का हो आकलन: राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में कहा है कि पता चला है कि भारत में हमारे आकार, आनुवांशिक विविधता और जटिलता से वायरस को अनुकूल माहौल मिलता है जिससे वह स्वरूप बदलकर अधिक ख़तरनाक रूप में सामने आता है. मुझे डर है कि जिस ‘डबल’ और ‘ट्रिपल म्यूटेंट’ को हम देख रहे हैं, वह शुरुआत भर हो सकती है.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी. (साभार: वीडियोग्रैब/कांग्रेस यूट्यूब चैनल)

कोविड संकट ‘सरकार बनाम हम’ की लड़ाई नहीं, बल्कि ‘हम बनाम कोरोना’ है: सोनिया गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर अपनी ज़िम्मेदारियों और कर्तव्यों से पल्ला झाड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में कोविड संक्रमण के हालात पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए, जिससे महामारी से बेहतर ढंग से निपटने के लिए क़दम उठाना और जवाबदेही तय करना सुनिश्चित हो सके.