तमिलनाडु विधानसभा में यह प्रस्ताव ऐसे समय पारित हुआ है, जब संसद में नए सिरे से परिसीमन विधेयक लाने की केंद्र सरकार की योजना को लेकर द्रमुक के रुख़ पर सवाल उठ रहे थे. हालांकि, द्रमुक ने अप्रैल में लाए गए इस संविधान संशोधन विधेयक को विफल कराने में अहम भूमिका निभाई थी. लेकिन तब वह विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक का हिस्सा थी.
परिसीमन विधेयक पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा बुलाई गई बैठक में तय किया गया कि तमिलनाडु विधानसभा को एक सरकारी प्रस्ताव पारित करना चाहिए, जिसका मक़सद राज्य के प्रतिनिधित्व और दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा करना हो. साथ ही मांग की गई कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या और राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा बंटवारे को बरक़रार रखा जाए.
तमिलनाडु की नई सरकार ने मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर सिकंदर बादुशा दरगाह के पास ‘कार्तिगै दीपम’ जलाने की अनुमति देने वाली मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि यह पहाड़ी 'प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम' के तहत केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक है. पहाड़ी पर मौजूद नाजुक चट्टानी गुफाओं को दीपक जलाने से नुकसान हो सकता है.
विपक्षी एकता के प्रयासों के बीच माकपा नेता और केरल के पूर्व सीएम पिनाराई विजयन ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लेकर कहा कि वह 'इंडिया' गठबंधन को मज़बूत करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, बल्कि भाजपा की मदद कर रहे हैं. विजयन ने यह भी जोड़ा कि 'इंडिया' गठबंधन आज जिस संकट का सामना कर रहा है, उसके पीछे राहुल गांधी का यही रवैया ज़िम्मेदार है.
विपक्ष ने केरल में विधानसभा चुनाव ख़त्म होने के करीब महीने भर बाद बुधवार (27 मई) को ईडी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे केंद्र सरकार द्वारा 'केंद्रीय एजेंसियों के ग़लत इस्तेमाल' की एक और कड़ी बताया है.
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय का राजनीतिक उभार रातों-रात नहीं हुआ. यह पटकथा वर्षों से बेहद सावधानी से तैयार की गई थी.. फिल्मों, प्रतीकों, सार्वजनिक हस्तक्षेपों और कई बार सोची-समझी चुप्पियों के ज़रिये. बरसों से बुनी जा रही इस कहानी का एक चरण 10 मई को विजय के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ पूरा हुआ.
तमिलनाडु की 234 सदस्यों वाली विधानसभा में 120 निर्वाचित विधायकों का समर्थन मिलने के बाद विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था. इससे पहले विजय तीन बार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके थे. शनिवार को विजय के शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे.
तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) प्रमुख विजय द्वारा तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से तीसरी बार मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद भी राज्य में सरकार गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, क्योंकि राजभवन की ओर से इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इस बीच विजय को कांग्रेस के साथ ही वाम दलों का समर्थन भी मिल गया है.
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने टीवीके सुप्रीमो विजय को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह से पहले कम से कम 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है. इस बीच विजय को वामपंथी दलों के समर्थन का संकेत मिला है, जिसके बाद उनके तीसरी बार राज्यपाल से मिलने जाने की ख़बरें सामने आ रही हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता जोसेफ़ विजय की पार्टी टीवीके ने सबसे अधिक सीटें हासिल की हैं. हालांकि वह बहुमत से 10 सीट कम हैं. इस बीच कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए टीवीके को समर्थन देने पर सहमति जताई है.
तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले के तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट से टीवीके के आर. श्रीनिवासन सेतुपति ने डीएमके के चार बार के विधायक और पूर्व मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन को केवल एक वोट से हराया. यह राज्य के चुनाव इतिहास में अब तक का सबसे कम अंतर है. इस चुनाव में टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतीं, जबकि डीएमके को केवल 59 सीटें ही मिलीं.
तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के वीएस बाबू ने कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को 8,795 वोटों के अंतर से हराया है. दिलचस्प बात यह है कि बाबू पहले डीएमके से जुड़े हुए थे और 2011 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर वे स्टालिन के चुनाव अभियान प्रबंधक थे.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की 234 सीटों के लिए बहुमत का आंकड़ा 118 है. अभिनेता से नेता बने विजय की टीवीके 68 सीटों पर चुनाव जीत चुकी है और 38 पर आगे चल रही है. वहीं, डीएमके 35 सीटें अपने नाम कर चुकी है और 24 पर आगे चल रही है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी करिकुलम फ्रेमवर्क की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के नाम पर भाजपा-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार एक केंद्रीकरण एजेंडा को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रही है, जो हिंदी को प्राथमिकता देता है और भारत की समृद्ध एवं विविध भाषाई विरासत को व्यवस्थित रूप से हाशिये पर डालता है.
पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के क़रीबी सहयोगी और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके में शामिल हो गए. इसके बाद उन्होंने एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पडी के. पलानीस्वामी को ‘तानाशाह’ और ‘अहंकारी’ कहा.