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पांच अन्य दलों को मिले कुल चंदे की तीन गुना से अधिक राशि भाजपा को मिलीः एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019-2020 में भाजपा द्वारा घोषित चंदे की राशि कांग्रेस, राकांपा, भाकपा, माकपा और टीएमसी द्वारा इसी अवधि में प्राप्त चंदे की कुल राशि से तीन गुना से भी अधिक है. भाजपा को 785.77 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि शेष दलों को कुल 228.035 करोड़ रुपये का चंदा मिला. 

2019-20 में चुनावी ट्रस्ट के ज़रिये भाजपा को मिला सर्वाधिक 276.5 करोड़ का चंदा: एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चुनावी ट्रस्ट के माध्यम से राजनीतिक दलों को मिले कुल चंदे की 76.17 फीसदी राशि भाजपा को मिली है. इसके बाद दूसरे स्थान पर कांग्रेस को 58 करोड़ रुपये का चंदा मिला है.

गृह मंत्रालय का एफसीआरए संशोधन के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से इनकार, कहा- राष्ट्रहित में नहीं

आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने दो आवेदन दायर कर इस विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2020 से जुड़े कैबिनेट नोट, पत्राचार और फाइल नोटिंग्स की प्रति मांगी थी. आरोप है कि इस संशोधन क़ानून के चलते कई एनजीओ के काम में बाधा आ रही है.

‘एनजीओ को निशाना बनाने के लिए एफसीआरए लाया गया, तो पीएम केयर्स को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं’

कई ग़ैर सरकारी संगठनों और कार्यकर्ताओं का मानना है कि नए एफसीआरए संशोधनों के कारण उनके काम में बाधा आएगी और कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है. इस विधेयक के प्रावधानों से छोटे एनजीओ के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा.

एफसीआरए में संशोधन कैसे नौकरियों और एनजीओ को प्रभावित करेगा

वीडियो: बीते 20 सितंबर को विपक्ष ने लोकसभा में पेश किए गए एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक का विरोध यह कहते हुए किया कि सरकार इसके जरिये ‘आलोचकों पर निशाना’ साधना चाह रही है. इस क़ानून और इसके प्रभावों के बारे में बता रहे हैं द वायर के डिप्टी एडिटर गौरव विवेक भटनागर.