Farmers Protest

ट्विटर ने मोदी सरकार के कंटेंट हटाने संबंधी आदेशों के ख़िलाफ़ अदालत का रुख़ किया

सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर ने नए आईटी क़ानूनों के तहत सामग्री हटाने के सरकारी आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कंटेंट ‘ब्लॉक’ करने के आदेशों की न्यायिक समीक्षा का आग्रह किया है. ट्विटर का कहना है कि यह अधिकारियों द्वारा अपने अधिकारों के दुरुपयोग का मामला है.

सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद आया उनका गीत केंद्र की आपत्ति के बाद यूट्यूब से हटाया गया

सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद उनका गाना ‘एसवाईएल’ 23 जून को रिलीज़ हुआ था, लेकिन 26 जून से वह भारत में यूट्यूब पर नहीं दिख रहा है. लिंक खोलने पर यूट्यूब बताता है कि सरकार की ओर से क़ानूनी शिकायत के चलते यह देश में उपलब्ध नहीं हैं. गाने के केंद्र में सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद है, साथ ही 1984 के दंगे, सिख क़ैदियों, किसान आंदोलन जैसे पंजाब के विभिन्न मुद्दों का ज़िक्र है.

एमएसपी क़ानून नहीं बना तो किसानों की सरकार से बहुत भयानक लड़ाई होगी: सत्यपाल मलिक

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जयपुर में जाट समाज के एक कार्यक्रम को में एमएसपी क़ानून लाने का समर्थन करते हुए कहा कि धरना ख़त्म हुआ है, आंदोलन नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल के बतौर उनके कार्यकाल के चार महीने बाकी हैं, जिसके बाद वे किसानों के लिए काम करेंगे.

काली स्याही और जानलेवा हमले किसानों की आवाज़ को नहीं दबा सकते: राकेश टिकैत

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पर स्याही फेंक दी थी. पुलिस ने इस सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है. टिकैत ने इस घटना के लिए पुलिस को ज़िम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि उन पर हमला भाजपा नीत राज्य सरकार की मिलीभगत से किया गया था.

कोर्ट ने कहा, केंद्रीय मंत्री किसानों को चेतावनी वाला बयान न देते तो शायद लखीमपुर हिंसा न होती

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा के चार आरोपियों की ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि राजनीतिक व्यक्तियों को ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए, क्योंकि उन्हें अपनी स्थिति और उच्च पद की गरिमा के अनुरूप आचरण करने की आवश्यकता होती है. हिंसा से पहले कृषि क़ानूनों को ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे किसानों को केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने दो मिनट में ठीक कर देने की चेतावनी दी थी.

किसानों से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए, एमएसपी पर क़ानून बनाए सरकार: सत्यपाल मलिक

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि किसानों ने केवल दिल्ली में अपना धरना समाप्त किया है, लेकिन तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ उनका आंदोलन अभी भी जीवित है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में जिस रफ़्तार से बेरोज़गारी और महंगाई बढ़ रही है उससे देश में संकट खड़ा होने वाला है.

मुंबईः कोर्ट ने कहा- लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन मौलिक अधिकार, पांच को बरी किया

साल 2015 में पानी की नियमित सप्लाई की मांग को लेकर कुछ महिलाएं मुंबई में प्रदर्शन कर रही थीं. इन्हें ट्रैफिक रोकने के आरोप में हिरासत में ले लिया गया था. इनमें से दो वरिष्ठ नागरिक हैं. अदालत ने कहा कि पुलिस के पास इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का कोई कारण नहीं था.

लखीमपुर हिंसा: ज़मानत रद्द होने के बाद केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा ने आत्मसमर्पण किया

पिछले साल तीन अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले के तिकुनिया गांव में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई ज़मानत 18 अप्रैल को को रद्द कर दी थी और उन्हें एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा था.

लखीमपुर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री के बेटे को ज़मानत देने के फ़ैसले को रद्द किया

पिछले साल तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी ज़िले के तिकुनिया गांव में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष मिश्रा को नौ अक्टूबर 2021 को गिरफ़्तार किया गया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते 10 फरवरी को उन्हें ज़मानत दे दी थी. 

किसान मोर्चा की विचारधारा पूरे देश में तेज़ी से फैल रही है, हमारा आंदोलन जारी रहेगा: राकेश टिकैत

वीडियो: न्यूनतम समर्थन मूल्य और किसान आंदोलन के भविष्य को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैट से द वायर के इंद्र शेखर सिंह की बातचीत.

लखीमपुर हिंसा: आशीष मिश्रा की ज़मानत को चुनौती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा

किसानों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और प्रशांत भूषण ने आशीष मिश्रा की ज़मानत रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखीमपुर ​खीरी हिंसा की जांच रिपोर्ट की अनदेखी की और आरोपी को राहत देने के लिए केवल एफ़आईआर पर ग़ौर किया.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति तीनों कृषि क़ानूनों को निरस्त करने के ख़िलाफ़ थी: रिपोर्ट

केंद्र द्वारा निरस्त किए गए तीन कृषि क़ानूनों पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. बीते साल सौंपी गई उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई थी. अब समिति के एक सदस्य अनिल घानवत ने इसे जारी करते हुए कहा कि 85.7 प्रतिशत किसान संगठन क़ानूनों के समर्थन में थे.

पांच साल तक सोए हुए विपक्ष ने नहीं, किसान आंदोलन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जगाया है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जहां किसान आंदोलन का असर दिखा था, वहां के 19 विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा सिर्फ़ छह सीटें हासिल कर पाई है. अगर इस चुनावी नतीजे से किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचा जाए तो वह यह है कि जनता के मुद्दों पर चला सच्चा जन आंदोलन ही ध्रुवीकरण के रुझानों को पलट सकता है और आगे चलकर यही भाजपा को पराजित कर सकता है.

लखीमपुर हिंसा: आशीष मिश्रा की ज़मानत को चुनौती वाली याचिका पर अदालत ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट हिंसा के कुछ पीड़ितों के रिश्तेदार की याचिका पर सुनवाई कर कर रहा था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि आशीष मिश्रा को ज़मानत दिए जाने के बाद मामले में एक गवाह पर हमला हुआ था. अदालत ने प्रमुख गवाहों में से एक पर हुए हमले पर गौर करते हुए यूपी सरकार से गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है.

चुनावी राज्यों में किसान आंदोलन का फीका असर, पंजाब में खाता नहीं खोल पाया ‘संयुक्त समाज मोर्चा’

तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली की सीमाओं पर एक साल तक चले प्रदर्शनों की सफलता को देखते हुए कुछ किसान संगठन राजनीति में उतरे थे, लेकिन किसान नेता बलबीर सिह राजेवाल की अगुवाई वाला ‘संयुक्त समाज मोर्चा’ पंजाब में एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सका. वहीं पिछले साल किसान आंदोलन के दौरान लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा बाद भी ज़िले की आठों सीटें भाजपा के खाते में गई हैं.