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आपकी सहमति के बगैर पुलिस आपके कंप्यूटर के डेटा को नहीं छू सकती: जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा

साक्षात्कार: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा का कहना है कि अगर पुलिस बिना सहमति के डेटा इकट्ठा करती है, तो इसे अनिवार्य तौर पर इसकी ज़रूरत का वाजिब कारण बताने में समर्थ होना चाहिए. सिर्फ यह कह देना काफी नहीं है कि ऐसा करने का मक़सद आपराधिक जांच करना है.

कर्नाटक: पुलवामा हमले का जश्न मनाने के आरोप में छात्र को यूएपीए के तहत 5 साल की क़ैद

आरोप है कि 21 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र फ़ैज़ रशीद ने आतंकवादी हमले का जश्न मनाते हुए सेना का मज़ाक उड़ाया था और विभिन्न मीडिया संस्थानों की पोस्ट पर 23 टिप्पणियां की थीं. अदालत ने रशीद को आईपीसी की धारा धारा 153ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत भी दोषी पाया. 

राजद्रोह क़ानून पर रोक का आदेश बरक़रार, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को समीक्षा के लिए और वक़्त दिया

बीते मई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक आदेश में राजद्रोह क़ानून पर उस तक के लिए रोक लगा दी थी, जब तक कि केंद्र औपनिवेशिक काल के इस क़ानून की समीक्षा के अपने वादे को पूरा नहीं करता. कोर्ट ने कहा था कि इसकी समीक्षा होने तक क़ानून के इस प्रावधान का उपयोग न किया जाए.

देश की महिला क़ैदियों के बच्चे: वो दोषी नहीं हैं, लेकिन निरपराध ही सज़ा भुगत रहे हैं

विशेष रिपोर्ट: जेल में सज़ा काट रही महिला क़ैदियों के साथ रहने वाले बच्चों को तो तमाम परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है, लेकिन वो जिन्हें मां से अलग कर बाहर अपने बलबूते जीने के लिए छोड़ दिया जाता है, उनके लिए भी परेशानियों का अंत नहीं होता.

राष्ट्र के ख़िलाफ़ अपराध के लिए पिछले साल 5,100 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए: एनसीआरबी

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2021 में राजद्रोह, शासकीय गोपनीयता अधिनियम और यूएपीए समेत राष्ट्र के ख़िलाफ़ विभिन्न अपराध के आरोप में 5,164 मामले, यानी हर दिन औसतन 14 मामले दर्ज किए गए. पिछले साल देश में राजद्रोह के कुल 76 मामले और यूएपीए के कुल 814 मामले दर्ज किए गए थे. 

ग़ैर-भाजपा शासित राज्यों में आईपीसी के मामलों में दोषसिद्धि दर अधिक: एनसीआरबी डेटा

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का हालिया डेटा दिखाता है कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत दर्ज मामलों में उच्च दोषसिद्धि दर वाले छह राज्यों में कहीं भी भाजपा सत्ता में नहीं है. हालांकि कम दोषसिद्धि दर रिकॉर्ड करने वाले राज्यों में कई भाजपा शासित प्रदेश शामिल हैं.

उत्तर प्रदेश: सामूहिक बलात्कार के बाद दलित किशोरी की मौत, तीन आरोपी गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट ज़िले के पहाड़ी थाना क्षेत्र का मामला. पुलिस ने बताया कि घटना के वक़्त दलित लड़की अपने घर के बाहर परिजनों के साथ सो रही थी. आधी रात में तीन में से दो आरोपी उसे उठाकर ले गए और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया था. रविवार को पुलिस ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला दबाने से लड़की की मौत की पुष्टि हुई है.

यूएपीए का प्रावधान राजद्रोह से भी ज्यादा ख़तरनाक: जस्टिस मदन बी. लोकुर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन बी. लोकुर ने राजद्रोह क़ानून को लेकर शीर्ष अदालत के हालिया आदेश को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इस क़ानून में कुछ अपवाद थे जहां राजद्रोह के आरोप लागू नहीं किए जा सकते पर यूएपीए की धारा 13 के तहत कोई अपवाद नहीं हैं. यदि यह प्रावधान बना रहता है, तो यह बद से बदतर स्थिति में जाने जैसा होगा.

राजद्रोह पर रोक सही है पर अदालतों को सरकारी दमन के ख़िलाफ़ खड़े होना चाहिए

ऐसी संभावना है कि राजद्रोह का आसन्न अंत देश भर में पुलिस (और उनके आकाओं) को आलोचकों को डराने और पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व विपक्षी नेताओं को चुप कराने के तरीके के रूप में अन्य क़ानूनों के उपयोग को बढ़ा देगा.

राजद्रोह क़ानून के तहत 2014-19 के बीच 326 केस दर्ज, सिर्फ़ छह में दोषी क़रार: गृ​ह मंत्रालय के आंकड़े

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, छह सालों में राजद्रोह क़ानून के तहत कुल 326 मामले दर्ज किए गए. इनमें सबसे ज़्यादा असम में 54 मामले दर्ज किए गए, लेकिन एक भी दोष सिद्ध नहीं हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने क़ानून की समीक्षा होने तक राजद्रोह के मामलों में सभी कार्यवाहियों पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया है कि इसके तहत कोई नई एफ़आईआर दर्ज न की जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने क़ानून की समीक्षा तक राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें किसी भी एफ़आईआर को दर्ज करने, जांच जारी रखने या आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह) के तहत जबरदस्ती क़दम उठाने से तब तक परहेज़ करेंगी, जब तक कि यह पुनर्विचार के अधीन है. यह उचित होगा कि इसकी समीक्षा होने तक क़ानून के इस प्रावधान का उपयोग न किया जाए.

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में राजद्रोह क़ानून का बचाव करते हुए कहा- पुनर्विचार की ज़रूरत नहीं

राजद्रोह संबंधी दंडात्मक क़ानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पूछा था कि क्या इसे 1962 के फैसले के आलोक में पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा जाना चाहिए. इस क़ानून के भारी दुरुपयोग से चिंतित शीर्ष अदालत ने पिछले साल जुलाई में केंद्र से पूछा था कि वह स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेज़ों द्वारा इस्तेमाल किए गए इस प्रावधान को निरस्त क्यों नहीं कर रही है.

यूएपीए के तहत मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी के लिए समयसीमा अनिवार्य: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट का यह आदेश संबंधित आरोपी द्वारा दायर एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर आया है, जिसमें विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें यूएपीए के तहत मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी में देरी होने के आधार पर आरोपमुक्त करने की उसकी याचिका को ख़ारिज कर दिया गया था.

Guwahati: Union Minister of State for Home Affairs Kiren Rijiju addressing a press conference in Guwahati on Saturday. Assam state BJP president Ranjit Das is also seen. PTI Photo (PTI4_7_2018_000050B)

राजद्रोह क़ानून को हटाने का कोई प्रस्ताव गृह मंत्रालय के पास विचाराधीन नहीं: केंद्र

लोकसभा में केंद्र सरकार से सवाल किया गया था कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह क़ानून को औपनिवेशिक क़रार दिया है और इसकी वैधता पर सरकार से जवाब मांगा है. इसके जवाब में केंद्रीय विधि मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले या आदेश में ऐसी टिप्पणी नहीं है. हालांकि बीते जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह क़ानून पर चिंता जताते हुए सरकार से पूछा था कि आज़ादी के 75 साल बाद इसे बनाए रखना ज़रूरी क्यों है.

छत्तीसगढ़: बस्तर में कथित नक्सलियों के ‘आत्मसमर्पण’ के बाद क्या होता है?

दंतेवाड़ा में ‘लोन वर्राटू’ के तहत पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले कथित पूर्व नक्सलियों के लिए बनाए गए डिटेंशन कैंप ‘शांति कुंज’ का अस्तित्व क़ानूनी दायरों से परे है.