Jawaharlal Nehru

क्यों डराते हो ज़िंदां की दीवार से…

किसी भी आम नागरिक के लिए जेल एक ख़ौफ़नाक जगह है, पर देवांगना, नताशा और आसिफ़ ने बहुत मज़बूती और हौसले से जेल के अंदर एक साल काटा. उनके अनुभव आज़ादी के संघर्ष के सिपाहियों- नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जेल वृतांतों की याद दिलाते हैं.

आपातकाल के स्याह दिन बनाम अच्छे दिन

जनतंत्र को अपने ठेंगे पर रखे घूम रहे लठैतों के इस दौर में 46 साल पहले के आपातकाल के 633 दिनों पर खूब हायतौबा मचाइए, मगर पिछले 2,555 दिनों से भारतमाता की छाती पर चलाई जा रही अघोषित आपातकाल की चक्की के पाटों को नज़रअंदाज़ मत करिए.

नेहरू को भुला भी दो तो भी देश के प्रति उनका योगदान उन्हें मिटने नहीं देगा: पुरुषोत्तम अग्रवाल

वीडियो: हाल ही में एक किताब आई है, ‘कौन हैं भारत माता’. इसमें पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा लिखे गए लेखों और खुद उन पर लिखे गए लेखों संकलन किया गया है. इस किताब के संपादक साहित्यकार पुरुषोत्तम अग्रवाल हैं. उनसे ख़ास बातचीत.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आंसुओं को राजनीति की कलाबाज़ियों में क्यों बदल दिया है

नरेंद्र मोदी को देश की सत्ता संभाले साढ़े छह साल हो चुके हैं और इस दौरान वे लगभग इतनी ही बार रो भी चुके हैं. हालांकि यह उनकी राजनीति ही तय करती है कि उनके आंसुओं को कब बहना है और कब सूख जाना है.

भाजपा नेता संबित पात्रा के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में एफआईआर दर्ज

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाओं को आहत करने और समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

क्या सरदार पटेल का सपना वही था, जो भाजपा बता रही है?

‘गांधी के रामराज्य के बारे में तुम क्या जानते हो? गांधी के राम के बारे में ही तुम क्या जानते हो? वैसे तुलसी के राम के बारे में ही तुम क्या जानते हो? सावरकर हो या गोलवलकर, उनके हिंदू राष्ट्र का हमारे रामराज्य से क्या लेना-देना?’

बापू के नाम: आज आप जैसा कोई नहीं, जो भरोसा दिला सके कि सब ठीक हो जाएगा

जयंती विशेष: जिस दौर में गांधी को ‘चतुर बनिया’ की उपाधि से नवाज़ा जाए, उस दौर में ये लाज़िम हो जाता है कि उनकी कही बातों को फिर समझने की कोशिश की जाए और उससे जो हासिल हो, वो सबके साथ बांटा जाए.

अभी गांधी की बात करना क्यों ज़रूरी है?

आज हमारे सामने ऐसे नेता हैं जो केवल तीन काम करते हैं: वे भाषण देते हैं, उसके बाद भाषण देते हैं और फिर भाषण देते हैं. सार्वजनिक राजनीति से करनी और कथनी में केवल कथनी बची है. गांधी उस कथनी को करनी में तब्दील करने के लिए ज़रूरी हैं.

मैं मोहनदास करमचंद गांधी अब राष्ट्रपिता नहीं कहलाना चाहता…

आज राष्ट्र को वास्तविक पिता की ज़रूरत है, मेरे जैसे सिर्फ नाम के पिता से काम नहीं चलने वाला है. आज बड़े-बड़े फ़ैसले हो रहे हैं. छप्पन इंच की छाती दिखानी पड़ रही है. ऐसा पिता जो पब्लिक को कभी थप्पड़ दिखाए तो कभी लॉलीपॉप, पर अपने तय किए रास्ते पर ही राष्ट्र को ठेलता जाए. मैं ऐसे राष्ट्रपिता की ज़रूरत कैसे पूरी कर सकता हूं?

मोदी सरकार के सौ दिनों की सबसे बड़ी ‘उपलब्धि’ भारतीय संघीय ढांचे को कमज़ोर करना रहा है

भारतीय संविधान में स्पष्ट तौर पर भारत को राज्यों का संघ कहा गया है यानी एक संघ के रूप में सामने आने से पहले भी ये राज्य अस्तित्व में थे. इनमें से एक जम्मू कश्मीर का यह दर्जा ख़त्म करते हुए मोदी सरकार ने संघ की अवधारणा को ही चुनौती दी है.

New Delhi: Bharatiya Janata Party President Amit Shah addresses a press conference, in New Delhi, on Monday. (PTI Photo/Kamal Singh) (PTI5_21_2018_000094B)

अमित शाह ने ‘पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर’ के लिए नेहरू को ठहराया ज़िम्मेदार

अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में एक रैली को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर का भारत में ‘एकीकरण नहीं करने’ को लेकर नेहरू की आलोचना की.