Jawaharlal Nehru

महाराष्ट्र: सावरकर के ख़िलाफ़ टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी पर मानहानि का केस दर्ज

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के अकोला ज़िले में हुए एक संवाददाता सम्मेलन में सावरकर की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने ब्रिटिश शासकों की मदद की और दया याचिका लिखी थी. इस तरह उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अन्य नेताओं के साथ विश्वासघात किया था.

नेहरू: वो प्रधानमंत्री, जिन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित भारत का सपना देखा

जन्मदिन विशेष: नेहरू विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्थापित अनेक संस्थाओं को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा करते थे. वे मूलत: धार्मिक न होने के बावजूद अक्सर धार्मिक परिभाषाओं का उपयोग कर आधुनिकता का पथ प्रशस्त करते थे, इसीलिए नेहरू ने ‘मंदिर’ इन्हीं को बनाया था.

जब नेहरू ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर ज़ुल्म हो रहे हैं तो क्या हम भी यहां वही करें?

नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन से निकले ऐसे नायक हैं, जिनकी विचारधारा और पक्षधरता में कोई विरोधाभास नहीं है.

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

नेहरू के ख़िलाफ़ किए जा रहे दुष्प्रचार की वजह क्या है?

जवाहर लाल नेहरू की असफलताएं भी गिनाई जा सकती हैं, लेकिन उसके पहले आपको नेहरू का इस देश के निर्माण में महान योगदान भी स्वीकारना होगा.

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, पाकिस्तान नेहरू की ग़लतियों का परिणाम: भाजपा

जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर भाजपा नेताओं द्वारा देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को निशाना बनाने पर कांग्रेस ने कहा कि ‘वॉट्सऐप नर्सरी’ वाले भाजपा नेता फिर से इतिहास पढ़ें और पूर्व प्रधानमंत्रियों पर आरोप लगाने के बजाय अपने शासनकाल का हिसाब दें.

‘यह गांधी कौन था?’ ‘वही, जिसे गोडसे ने मारा था’

गांधी को लिखे पत्र में हरिशंकर परसाई कहते हैं, ‘गोडसे की जय-जयकार होगी, तब यह तो बताना ही पड़ेगा कि उसने कौन-सा महान कर्म किया था. बताया जाएगा कि उस वीर ने गांधी को मार डाला था. तो आप गोडसे के बहाने याद किए जाएंगे. अभी तक गोडसे को आपके बहाने याद किया जाता था. एक महान पुरुष के हाथों मरने का कितना फायदा मिलेगा आपको.’

भगत सिंह: वो चिंगारी जो ज्वाला बनकर देश के कोने-कोने में फैल गई थी…

अगस्त 1929 में जवाहरलाल नेहरू ने लाहौर में हुई एक जनसभा में उस समय जेल में भूख हड़ताल कर रहे भगत सिंह और उनके साथियों के साहस का ज़िक्र करते हुए कहा कि ‘इन युवाओं की क़ुर्बानियों ने हिंदुस्तान के राजनीतिक जीवन में एक नई चेतना पैदा की है… इन बहादुर युवाओं के संघर्ष की अहमियत को समझना होगा.’

जम्मू कश्मीर ने अपने झंडे की संवैधानिक गारंटी के साथ राष्ट्र ध्वज को अपनाया था: महबूबा मुफ़्ती

पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि जम्मू कश्मीर प्रशासन बेशर्मी से कश्मीरियों के भारतीय झंडा फहराने की झूठी तारीफ़ कर रहा है. सच तो यह है कि उन्हें ऐसा करने के लिए धमकाया गया और परिणाम भुगतने की धमकी दी गई. 

आत्ममुग्ध सरकार देश की गौरवशाली उपलब्धियों को तुच्छ साबित करने पर तुली है: सोनिया गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज़ादी के 75 साल पूरा होने के मौके पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए ऐतिहासिक तथ्यों पर कोई भी ग़लतबयानी तथा गांधी-नेहरू-पटेल-आज़ाद जी जैसे महान राष्ट्रीय नेताओं को असत्यता के आधार पर कठघरे में खड़ा करने के हर प्रयास का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पुरज़ोर विरोध करेगी.

आज़ादी के 75 सालों बाद भी देश की दलित-बहुजन आबादी की सभी उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं

भारत और यहां रहने वाले सभी जातियों, समुदायों के नागरिकों का भविष्य अब संविधान के इसके वर्तमान स्वरूप में बचे रहने पर निर्भर करता है.

कर्नाटक: कांग्रेस ने विज्ञापनों में नेहरू को शामिल न करने पर सीएम को ‘संघ का ग़ुलाम’ बताया

कर्नाटक सरकार द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापन में स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को शामिल नहीं किया गया है. कांग्रेस नेता सिद्धरमैया ने कहा कि जेल से रिहा करने के लिए अंग्रेज़ों से गुहार लगाने वाले सावरकर को विज्ञापन में अग्रिम स्थान मिलता है, लेकिन हाशिये की आवाज़ बन आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले आंबेडकर को आख़िरी पंक्ति में रखा जाता है. कर्नाटक भाजपा द्वारा अस्पृश्यता का प्रदर्शन, दुख की बात है.

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला, जिसने कांग्रेस की मुसीबत बढ़ा रखी है

वीडियो: नेशनल हेराल्ड अख़बार की शुरुआत 1938 में जवाहरलाल नेहरू की संस्था ‘एजेएल’ ने की थी और वो इसके पहले संपादक भी थे. नेहरू जब प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया. पहले प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए अख़बार के दफ़्तर में आज ताले क्यों पड़े हैं? याक़ूत अली की रिपोर्ट.

प्रधानमंत्री अपना कोई भी भाषण कांग्रेस की चर्चा किए बगैर पूरा क्यों नहीं कर पाते

प्रधानमंत्री के अनुसार कांग्रेस का अहंकार नहीं जाता, पर यह कांग्रेसियों की चिंता का विषय है या देश की? प्रधानमंत्री कांग्रेस के प्रति जवाबदेह हैं या देशवासियों के? उनके वजह-बेवजह कांग्रेस को कोसने से सिर्फ यह पता चलता है कि उनकी और उन जैसों की जमात की आज के प्रश्नों को अतीत की ओर ले जाकर वर्तमान व भविष्य की ओर पीठकर लेने की बीमारी लगातार लाइलाज होती जा रही है.

संविधान निर्माण के समय सोशलिस्ट पार्टी का सुर अलग क्यों था

दिसंबर 1946 में स्वतंत्र भारत के लिए जब एक नया संविधान बनाए जाने की कवायद शुरू हुई और संविधान सभा का गठन किया गया तो कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं ने यह कहते हुए इसका बहिष्कार किया कि यह ‘एडल्ट फ्रेंचाइज़’ यानी बालिग मताधिकार के आधार पर आधारित चुनी हुई सभा नहीं है.