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दिल्ली: विरोध के बीच नगर निगमों द्वारा विभिन्न इलाकों में अतिक्रमण-रोधी अभियान जारी

शुक्रवार को उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के प्राधिकारियों ने मंगोलपुरी में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया. इससे पहले बृहस्पतिवार को मदनपुर खादर इलाके में हिंसक प्रदर्शन हुआ एवं पत्थरबाज़ी हुई. स्थानीय लोगों ने दावा किया कि वैध ढांचे भी ध्वस्त किए जा रहे हैं. उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अभियान रोकने का आग्रह किया है.

सांप्रदायिक राजनीति और बुलडोज़र अभियान पर होने जा रही बैठक पर दिल्ली पुलिस ने रोक लगाई

वीडियो: राष्ट्रीय राजधानी स्थित गांधी पीस फाउंडेशन में बीते 9 मई को होने वाली एक बैठक को दिल्ली पुलिस ने यह कहकर रद्द कर दिया कि वे इसकी अनुमति नहीं देंगे. यह बैठक सांप्रदायिक राजनीति और अतिक्रमण रोधी अभियान से संबंधित थी.

बुलडोज़र की राजनीति पर क्यों ख़ामोश हैं दिल्ली के उपराज्यपाल?

वीडियो: वाम दल, छात्र समूह और महिला संगठन राजधानी दिल्ली के नगर निगमों द्वारा द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के ख़िलाफ़ नज़र आ रहे हैं. वाम दलों ने इस मुद्दे पर ​उपराज्यपाल अनिल बैजल की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं.

अतिक्रमण हटाने के बहाने मुसलमानों के ख़िलाफ़ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ा जा रहा है

यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात और अब दिल्ली में बुलडोज़र का इस्तेमाल रोज़ाना की उत्तेजना बनाए रखने के लिए किया जा रहा है. हिंदुओं में मुसलमानों को उजड़ते देख, रोते, बदहवास देखने की हिंसक कामना जगाई जा रही है. अब भाजपा, मीडिया, पुलिस और प्रशासन में कोई फ़र्क़ नहीं रह गया है. एक रास्ता दिखा रहा है, एक बुलडोज़र का क़ानून बता रहा है, एक हथियार के साथ उसे घेरा देकर चल रहा है, तो एक ललकार रहा है.

दिल्ली: प्रदर्शन के बाद शाहीन बाग से कार्रवाई किए बिना लौटा अतिक्रमण-रोधी दस्ता

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता आदेश गुप्ता ने भाजपा शासित एसडीएमसी के महापौर को 20 अप्रैल को पत्र लिख कर ‘रोहिंग्या, बांग्लादेशियों और असामाजिक तत्वों’ द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने का अनुरोध किया था, जिसके बाद एसडीएमसी के इलाकों में अतिक्रमण-रोधी अभियान चलाने का फैसला किया गया था. अभियान के ख़िलाफ़ माकपा द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका पर विचार नहीं कर सकते, हाईकोर्ट जाएं.

कोरोना संकट से निपटने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका बेहद ज़रूरी है

आज जब समाज एक वैश्विक महामारी से गुज़र रहा है, तो नगर प्रतिनिधियों की इसमें कोई तय भूमिका नहीं दिखाई दे रही है. औपचारिक रणनीति में भी उनकी ज़िम्मेदारियां स्पष्ट नहीं हैं, नतीजतन शहरी प्रशासन के ढांचे का एक हिस्सा निष्क्रिय जान पड़ता है.