Nandini Sundar

छत्तीसगढ़: आदिवासियों के लिए न्याय पाने की राह इतनी मुश्किल क्यों है

मार्च 2011 में सुकमा ज़िले के तीन गांवों में आदिवासियों के घरों में आग लगाई गई थी. पांच महिलाओं से बलात्कार हुआ और तीन ग्रामीणों की हत्या हुई थी. इसका आरोप पुलिस पर लगा था. सीबीआई की एक रिपोर्ट में भी विवादित पुलिस अधिकारी एसआरपी कल्लूरी और पुलिस को ज़िम्मेदार बताया गया था, लेकिन हाल ही में विधानसभा में पेश एक रिपोर्ट बताती है कि मामले में पुलिस को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया.

झूठे आरोपों की मानसिक प्रताड़ना के लिए कार्यकर्ताओं को मुआवज़ा दे छत्तीसगढ़ सरकार: एनएचआरसी

छत्तीसगढ़ पुलिस ने सुकमा ज़िले के एक शख़्स की हत्या के आरोप में नवंबर 2016 में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को नामजद किया था. फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने मामले की जांच की और हत्या में कार्यकर्ताओं की भूमिका न पाए जाने पर आरोप वापस लेते हुए एफआईआर से नाम हटा लिए.

छत्तीसगढ़: अवैध गिरफ़्तारी, मीडिया मामलों की जांच के लिए बनेगी समिति

राज्य की कांग्रेस सरकार इन मामलों को लेकर एक आयोग का गठन करने जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके पटनायक और आफताब आलम की अगुवाई में जांच होगी.

छत्तीसगढ़: आदिवासी की हत्या मामले में नंदिनी सुंदर सहित अन्य आरोपियों को क्लीन चिट

नवंबर 2016 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और जेएनयू की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद समेत 6 लोगों पर सुकमा के एक आदिवासी की हत्या का मामला दर्ज किया था. अब चार्जशीट में पुलिस ने कहा कि जांच में आरोपियों के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिला.

जागरण समूह के अख़बार ने सामाजिक कार्यकर्ता को बताया ‘माओवादी’

जागरण समूह के अख़बार नई दुनिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार को भेजे गए नोटिस की ख़बर में सुंदर को माओवादी कार्यकर्ता बताया है.