Rajnath Singh

‘जब मोदी जी अपनी मां का जन्मदिन मना रहे थे तब हम सबकी मां घर में रो रही थीं’

वीडियो: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना के ऐलान के बाद से देश के कई राज्यों में इसके ख़िलाफ़ युवाओं ने व्यापक प्रदर्शन किए. आख़िर क्यों सरकार की इस योजना का विरोध किया जा रहा है, क्या चाहते हैं युवा? द वायर के याक़ूत अली की रिपोर्ट.

क्या 2024 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को अग्निपथ योजना का कोई प्रभाव देखने को मिलेगा

आठ सालों से नरेंद्र मोदी उसी राजनीति को पोषित करते आए हैं, जिसका अधिकांश ‘होने वाले’ अग्निवीर प्रतिनिधित्व करते हैं. और किसी को हैरानी नहीं होगी अगर वे व्यक्तिगत तौर पर इस योजना की निगरानी करें और 2024 के चुनावों से पहले ही इसमें उचित बदलाव भी कर दें.

केंद्र की सैन्य भर्ती से जुड़ी अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने सशस्त्र बलों के लिए वर्षों पुरानी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया है, जो संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है और इसके लिए संसद की मंज़ूरी भी नहीं ली गई है. याचिका में 14 जून की अधिसूचना को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है.

अग्निपथ योजना: सेना में भर्ती के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, जुलाई से शुरू होगी प्रक्रिया

सेना ने कहा कि ‘अग्निवीर’ नाम से भारतीय सेना में एक अलग रैंक बनाया जाएगा, जो कि किसी भी अन्य मौजूदा रैंक से अलग होगा. अग्निवीर के लिए शासकीय गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या स्रोत को चार साल की सेवा अवधि के दौरान प्राप्त विशिष्ट जानकारी का खुलासा करने पर रोक रहेगी. अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए जाने वाले कर्मचारियों को ‘अग्निवीर’ के रूप में जाना जाएगा.

अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ ‘भारत बंद’, 500 से अधिक ट्रेनें रद्द; सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

केंद्र की मोदी सरकार ने दशकों पुरानी प्रक्रिया में बदलाव करते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती संबंधी अग्निपथ नामक योजना की बीते 14 जून को घोषणा की थी, जिसके तहत सैनिकों की भर्ती सिर्फ़ चार साल की कम अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी. इस योजना के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं.

अग्निपथ आवेदकों को शपथ-पत्र देना होगा कि उन्होंने आगज़नी-प्रदर्शन में भाग नहीं लिया: सेना

थलसेना, नौसेना और वायुसेना में संविदा आधारित भर्ती योजना ‘अग्निपथ’ के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स में अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि सरकार योजना लागू करने के अपने रुख़ पर कायम है. भारतीय सेना की नींव अनुशासन है. जो युवा आगज़नी और तोड़फोड़ में लिप्त हैं, वे सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं में नहीं शामिल हो पाएंगे.

केंद्र सरकार का दस लाख नौकरियों का वादा: झांसा या 2024 के लिए चुनावी पासा

अगर मोदी सरकार हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के 2014 के लोकसभा चुनाव के अपने वादे पर ईमानदारी से अमल करती, तो इन आठ सालों में सोलह करोड़ युवाओं को नौकरियां मिल चुकी होतीं! अब एक ओर बेरोज़गारी बेलगाम होकर एक के बाद एक नए कीर्तिमान बना रही है, दूसरी ओर उसके प्रति सरकार की ‘गंभीरता’ का आलम यह है कि समझ में नहीं आता कि उसे लेकर सिर पीटा जाए या छाती.

अग्निपथ: चौथे दिन भी प्रदर्शन जारी, तेलंगाना में पुलिस की गोली लगने से एक प्रदर्शनकारी की मौत

बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में शनिवार को भी अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन जारी हैं. इस बीच रेलवे ट्रैक अवरुद्ध करने, कई इमारतों और वाहनों में आगजनी की ख़बर है. इससे पहले शुक्रवार को सिकंदराबाद स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आरपीएफ द्वारा की गई फायरिंग में एक 24 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई.

सीएपीएफ, असम राइफल्स में 10 प्रतिशत रिक्तियां ‘अग्निवीरों’ के लिए आरक्षित होंगी: गृह मंत्रालय

विभिन्न राज्यों में अग्निपथ योजना को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि लघु संविदा पर सेना में काम करने के बाद ‘अग्निवीरों’ को सीएपीएफ और असम राइफल्स में भर्ती के लिए दस फीसदी आरक्षण के साथ ऊपरी आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी.

प्रधानमंत्री को ‘माफ़ीवीर’ बनना होगा, ‘अग्निपथ’ योजना वापस लेनी पड़ेगी: राहुल गांधी

केंद्र सरकार की नई अग्निपथ योजना को लेकर जारी देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विवादित कृषि क़ानूनों को वापस लेना पड़ा था, उसी तरह उन्हें  ‘अग्निपथ’ योजना को वापस लेना पड़ेगा. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस योजना को ‘दिशाहीन’ बताया है.

‘अग्निवीरों! आप लड़ने लायक़ नहीं बचे हैं, सांप्रदायिकता आपके अंदर की नागरिक भाषा ख़त्म कर चुकी है’

नौकरी को लेकर युवाओं का कोई भी प्रदर्शन केवल उनकी अपनी नौकरी को लेकर है. इसलिए नौकरी और युवाओं का कथित आक्रोश राजनीतिक मुद्दा होते हुए भी वोट का मुद्दा नहीं है. जिस लड़ाई को आप लड़ने चले हैं, उसे आप बहुत पहले रौंद चुके हैं. आपने दूसरों की ऐसी अनेक लड़ाइयां ख़त्म की, मैदान तक ख़त्म दिए. अब जब मैदान दलदल में बदल गया है, तब उसमें लड़ाई के लिए उतरे हैं. आप फंसते चले जाएंगे.

अग्निपथ: देशव्यापी प्रदर्शनों के बीच केंद्र पर हमलावर विपक्ष, योजना को देश हित के ख़िलाफ़ बताया

केंद्र सरकार द्वारा रक्षाकर्मियों की भर्ती संबंधी ‘अग्निपथ’ योजना के विभिन्न राज्यों में व्यापक विरोध के बीच विपक्ष ने इस योजना को देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बताया है. बिहार में भाजपा की सहयोगी जदयू और पंजाब में भाजपा के साथ जुड़े अमरिंदर सिंह ने भी योजना पर पुनर्विचार की मांग की है.

अग्निपथ योजना: व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच सरकार ने साल 2022 के लिए आयु सीमा बढ़ाई

अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के बीच रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि पिछले दो वर्षों के दौरान भर्ती करना संभव नहीं हुआ, सरकार ने साल 2022 के लिए प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया के लिए आयु सीमा पूर्व में घोषित 21 साल से बढ़ाकर 23 साल कर दी है.

सेना भर्ती: अग्निपथ योजना के विरोध में कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन, आगज़नी-चक्काजाम

केंद्र सरकार की 4 साल के अनुबंध वाली सेना भर्ती योजना ‘अग्निपथ’ का विरोध गुरुवार को और अधिक व्यापक व हिंसक हो गया. हरियाणा के पलवल में हिंसा के बाद इंटरनेट बंद. बिहार और मध्य प्रदेश में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन व रेलवे ट्रैक फूंक दिए. उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी योजना के ख़िलाफ़ युवाओं का आक्रोश चरम पर रहा.

अग्निपथ योजना: रक्षा ख़र्च घटाने के लिए सेना में चार साल के अनुबंध पर होगी भर्ती, विरोध में युवा

केंद्र सरकार दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करके ‘अग्निपथ’ योजना लेकर आई है, जिसके तहत युवाओं को चार साल के अनुबंध पर सेना में नौकरी पर रखा जाएगा. इसके विरोध में सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने बिहार, यूपी और राजस्थान में विरोध प्रदर्शन किए हैं. पूर्व सैन्य अधिकारियों और विपक्ष ने भी योजना पर सवाल उठाए हैं.