अगर उप्र निकाय चुनाव परिणाम देश का मूड दिखा रहे हैं, तो ये विपक्ष के लिए ख़ुशख़बरी है

शहरी प्रशासनिक इकाई के शीर्ष पर भाजपा का काबिज़ होना कोई नयी बात नहीं है. भाजपा के वोट शेयर के नुकसान की असली कहानी बाकी दोनों स्तरों पर दिखाई देती है.

निकाय चुनाव परिणाम को मोदी की नीतियों और विकास की जीत बताना महज़ सियासी ज़रूरत है

मेयरों के चुनाव में भाजपा की सफलता को मोदी-योगी के चमत्कारों से जोड़ने वालों को यह भी बताना चाहिए कि किसके चमत्कार से पार्टी निर्दलीयों से भी पीछे रही?

अयोध्या में भले ही भाजपा जीती है, लेकिन बैलेट वोटिंग में उसे ख़ासा नुकसान हुआ है

फैज़ाबाद, आम्बेडकर नगर, बस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और सुल्तानपुर ज़िले की 33 नगर पालिका सीटों में से भाजपा को महज़ छह सीटों पर सफलता मिली.