Women Right

हिजाब मुद्दे पर मिस यूनिवर्स हरनाज़ संधू ने कहा- लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है

मिस यूनिवर्स हरनाज़ संधू ने एक कार्यक्रम में हिजाब सहित विभिन्न मुद्दों पर लड़कियों को निशाना बनाए जाने पर रोक लगाने की अपील करते हुए कहा कि लड़कियों को उनकी मर्ज़ी से जीने दीजिए, उन्हें उनकी मंज़िल तक पहुंचने दीजिए, उन्हें उड़ने दीजिए. उनके पंख मत काटिए.

Sabarimala: Devotees arrive to pay obeisance at Lord Ayyappa Temple in Sabarimala, Thursday, October 18, 2018. (PTI Photo) (PTI10_18_2018_000031B)

केरल: सबरीमाला मंदिर के कपाट खोले गए, 10 महिलाओं को वापस भेजा गया

पुलिस ने बताया कि आंध्रप्रदेश से आए समूह में शामिल लोगों के पहचानपत्र की जांच की गई और प्रतिबंधित उम्र सीमा में होने की वजह से सबरीमाला में मौजूदा स्थिति की जानकारी देकर 10 युवा महिलाओं को वापस भेज दिया गया.

Sabarimala: Devotees enter the Sabarimala temple as it opens amid tight security, in Sabarimala, Friday, Nov. 16, 2018. (PTI Photo) (Story no. MDS18) (PTI11_16_2018_000138B)

केरल: आज खुलेगा सबरीमाला मंदिर, सरकार ने महिलाओं को सुरक्षा उपलब्ध कराने से किया इनकार

केरल में स्थित सबरीमाला मंदिर के कपाट आज शाम 5 बजे के आसपास खोले जाएंगे. सुरक्षा की दृष्टि से भगवान अयप्पा के मंदिर में और उसके आस-पास 10 हजार से अधिक सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है.

अपनी सरकार से कहें कि हमारे फैसले खेलने के लिए नहीं हैं: जस्टिस आरएफ नरीमन

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरएफ नरीमन ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि कृपया अपनी सरकार को सबरीमाला मामले में सुनाए गए असहमति के फैसले को पढ़ने के लिए कहें, जो बहुत ही महत्वपूर्ण है…..हमारा फैसला खेलने के लिए नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में पुनर्विचार याचिकाओं को सात जजों की पीठ के पास भेजा

सबरीमाला मंदिर मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध केवल सबरीमाला तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य धर्मों में भी ऐसा है. सबरीमाला, मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश और दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं में खतना जैसे धार्मिक मुद्दों पर फैसला बड़ी पीठ लेगी.

आज से दो महीने के लिए खुलेगा सबरीमाला मंदिर, केरल सरकार अदालती आदेश लागू करने पर अडिग

बीते 15 नवंबर को सबरीमाला पर सर्वदलीय बैठक विफल रही. महिला अधिकार कार्यकर्ता तृप्ति देसाई सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन करने के लिए कोच्चि पहुंच गईं. लेकिन दक्षिणपंथी गुटों द्वारा विरोध प्रदर्शन के चलते वे एयरपोर्ट से बाहर नहीं आ सकी हैं.

सबरीमाला फैसले पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, 22 जनवरी को पुनर्विचार याचिका पर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए दायर की गईं 49 याचिकाओं पर 22 जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई होगी.

सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पुनर्विचार याचिका पर फैसले के बाद होगी नई याचिकाओं पर सुनवाई

मंगलवार दोपहर तीन बजे सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ बंद कमरे में 48 पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगी जिसमें सबरीमाला फैसले की समीक्षा की मांग की गई है.

सबरीमाला: केरल सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने को संघ ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण 

आरएसएस ने कहा कि सबरीमला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विचार करते समय श्रद्धालुओं की भावना की अनदेखी नहीं की जा सकती.

धर्म के मामलों में तार्किकता की कोई जगह नहीं: जस्टिस इंदु मल्होत्रा

सबरीमाला मंदिर मामले में अन्य 4 जजों से सहमत न होते हुए पीठ की एकमात्र महिला जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं को केवल समानता के अधिकार के आधार पर नहीं परखा जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से फैसला दिया. कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को मंदिर में घुसने की इजाजत न देना अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है.

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला संविधान पीठ को भेजा

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने संविधान पीठ से पूछा, मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना क्या संविधान के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन है.

देवदासी जैसी परंपरा को लेकर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश सरकार को नोटिस

मानवाधिकार आयोग ने कहा, उन्हें उनके परिवारों के साथ नहीं बल्कि मातम्मा मंदिर में रहने के लिए मजबूर किया जाता है जहां उन्हें यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है.

‘औरतों की ज़िंदगी कोख के अंधेरे से क़ब्र के अंधेरे तक का सफ़र है’

‘किसी समाज व शासन की सफलता इस तथ्य से समझी जानी चाहिए कि वहां नारी व प्रकृति कितनी संरक्षित व पोषित है, उन्हें वहां कितना सम्मान मिलता है.’