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राजस्थान के थानों में दर्ज मामलों की संख्या बढ़ी, महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध भी बढ़े: पुलिस

राजस्थान में अपराधों का सालाना आंकड़ा पेश करते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा कि बीते साल दर्ज मामलों की संख्या इसलिए बढ़ी क्योंकि पुलिस ने हर मामला दर्ज किया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

जयपुर: राजस्थान के पुलिस थानों में दर्ज होने वाले मामलों की संख्या बीते साल 31.08 प्रतिशत बढ़ी. इस दौरान महिलाओं के खिलाफ होने वाले विभिन्न अपराधों के दर्ज मामलों की संख्या 13,561 यानी 49.14 प्रतिशत बढ़कर 41,155 हो गई.

राजस्थान पुलिस ने यह भी बताया कि राज्य में एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामले बढ़े तो इस कानून के तहत दर्ज होने वाले मामलों में फर्जी मामलों का प्रतिशत भी बढ़ गया.

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार बीते साल जांच के दौरान लगभग आधे मामले फर्जी पाए गए. पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने सोमवार को सालाना आंकड़ा पेश करते हुए संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी.

राज्य में अपराधों का सालाना आंकड़ा पेश करते हुए उन्होंने कहा कि बीते साल दर्ज मामलों की संख्या इसलिए बढ़ी क्योंकि पुलिस ने हर मामला दर्ज किया. इसके साथ ही उन्होंने युवाओं विशेषकर बेरोजगार युवाओं के अपराध की ओर बढ़ते रूझान पर चिंता जताई.

साल 2019 में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में कुल 2,25,306 मामले दर्ज किए जबकि 2018 में यह संख्या 53,417 रही थी.

उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2019 में हमारा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर था कि हर मामला दर्ज हो और कोई भी शिकायत ऐसी न हो जिस पर ध्यान नहीं दिया गया हो. हमने पिछले साल संगठित अपराधों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की.’

उन्होंने कहा कि इस साल यानी 2020 में पुलिस की प्राथमिकता संगठित अपराधों, महिलाओं, बच्चों व कमजोर वर्गों के विरूद्ध अपराधों तथा सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के संबंध में प्रभावी तरीके से काम करने की रहेगी.

इस साल थानों में जनकेंद्रित सुविधाओं का विकास तथा स्वागत कक्ष बनाने के साथ ही पुलिसकर्मियों की तकनीकी कार्य दक्षता बढ़ाने तथा कल्याणकारी गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

सिंह ने कहा, ‘पुलिसकर्मियों को अच्छे आचरण के साथ बेहतर कार्य कर युवाओं का रोल मॉडल बनने हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे अपराधियों को रोल मॉडल बनाने की प्रवृत्ति रुके.’

अतिरिक्त महानिदेशक अपराध बीएल सोनी ने कहा कि सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ तस्वीरें पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गयी और यह आगे भी जारी रहेगी.

महानिदेशक कानून व्यवस्था एमएल लाठर ने कहा कि राज्य में 2019 में सांप्रदायिक तनाव की केवल सात घटनाएं दर्ज हुईं जबकि 2018 में इस तरह के 313 मामले सामने आए थे.

उन्होंने कहा, ‘राज्य में कुछ घटनाओं को छोड़कर, कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में और संतोषजनक रही.’

संवाददाता सम्मेलन में दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2019 में दर्ज कुल मामलों में से 5997 मामले बलात्कार के थे जो पिछले वर्ष की तुलना में 38.34 प्रतिशत या 1662 अधिक हैं. महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े हुए कुल 41,155 मामले इस दौरान दर्ज किए जिनमें छेड़छाड़ के 8802 मामले भी शामिल हैं.

इसी तरह एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामले भी बढ़े तो इस कानून के तहत दर्ज होने वाले मामलों में फर्जी मामलों का प्रतिशत भी बढ़ गया. पुलिस के आंकड़ों के अनुसार बीते साल जांच के दौरान लगभग आधे मामले फर्जी पाए गए.