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उमर अब्दुल्ला और महबूबा पर पीएसए लगाने के लिए जम्मू कश्मीर प्रशासन ने दिए अजीबो-गरीब तर्क

जम्‍मू कश्‍मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ जो पीएसए लगाने के लिए जो आरोप लगाए गए हैं उनमें उनकी बड़ी संख्या में वोट हासिल करने की क्षमता का जिक्र किया गया है. वहीं, खतरनाक साजिश रचने की क्षमता के कारण पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को ‘डैडी गर्ल’ और ‘कोटा रानी’ कहा गया.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर: पिछले साल अगस्‍त में जम्‍मू कश्‍मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद से नजरबंद जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के खिलाफ अजीबोगरीब तर्क देकर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

उमर अब्दुल्ला के खिलाफ जो पीएसए लगाने के लिए जो आरोप लगाए गए हैं उनमें उनकी बड़ी संख्या में वोट हासिल करने की क्षमता का जिक्र किया गया है. वहीं, खतरनाक साजिश रचने की क्षमता के कारण मुफ्ती को ‘डैडी गर्ल’ और ‘कोटा रानी’ कहा गया.

एनडीटीवी के अनुसार, अब्दुल्ला के खिलाफ पुलिस ने जो पीएसए डोजियर तैयार किया गया है उसमें कहा गया है कि लोगों को प्रभावित करने की उनकी क्षमता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि आतंकवादियों द्वारा चुनाव बहिष्कार किए जाने के बावजूद उमर अब्दुल्ला की अपील पर लोग बाहर आएं और वोट डाले.

उमर अब्दुल्ला पर इसके अलावा अनुच्छेद 370 को रद्द करने का विरोध करने, ट्विटर पर लोगों देश की एकता और अखंडता के ख़िलाफ़ भड़काने जैसे आरोप भी लगे हैं. हालांकि, इस डोजियर में इस दावे की पुष्टि के लिए किसी तरह के सबूतों का हवाला नहीं दिया गया है.

डोजियर में कहा गया है कि ‘पूर्व मुख्यमंत्री केंद्र सरकार के खिलाफ गतिविधियों की योजना बनाने के लिए राजनीति का इस्तेमाल आवरण के रूप में रहे हैं. इसमें कहा गया है कि वह राजनीति की आड़ में भारत की केंद्र सरकार के खिलाफ गतिविधियों की योजना बना रहे हैं और जनता के समर्थन के साथ, वह इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देने में सफल रहे हैं.’

डोजियर में कहा गया है कि उमर अब्दुल्ला ने 370 के निरस्त हो जाने के बाद ‘अपना आवरण हटा दिया और गंदी राजनीति और कट्टरपंथी कार्यप्रणाली का सहारा लिया है.’

इसमें आगे कहा गया है कि ‘अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A के निरस्त होने के बाद, आम जनता के समर्थन और मदद की बजाय उन्होंने अपनी गंदी राजनीति का सहारा लेते हुए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ उकसाने का काम किया और कट्टरपंथी कार्यप्रणाली को अपनाया.’

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पीएसए डोजियर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के लिए कहा गया, ‘व्यक्ति गर्म दिमाग और साजिश रचने वाला है, इन्हें खतरनाक साजिश रचने वाले के रूप में जाना जाता है. खुफिया एजेंसियों द्वारा दाखिल कई खुफिया रिपोर्ट बताते हैं कि वह अलगाववाद को बढ़ावा देती हैं.’

पीडीपी के गठन को फर्जी बताते हुए डोजियर में कहा गया है कि पार्टी के झंडे का हरा रंग इसके चरमपंथी होने का सबूत है. इसमें कहा गया है कि पीडीपी का चिन्ह (कलम और दवात) मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट से लिया गया है. मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट जमात-ए-इस्लामी सहित कई दलों का गठबंधन है जिसने नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन के खिलाफ 1987 में चुनाव लड़ा था.

पीएसए लगाने के कारणों में मुफ्ती द्वारा एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने का भी उल्लेख है, जिसमें उनसे अनुच्छेद 370 पर बात नहीं करने को कहा गया था. तीन तलाक, लिंचिंग्स और पिछले साल फरवरी में घाटी में सुरक्षा वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही की मंजूरी के लिए नागरिकों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदी पर किए गए उनके ट्वीट का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्होंने भड़काउ बयान दिए जिसने हिंसा भड़काने का काम किया और उन पर विभाजन पैदा करने के लिए धर्म का उल्लेख करने का भी आरोप लगाया.

बता दें कि उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पांच अगस्त, 2019 से सीआरपीसी की धारा 107 के तहत हिरासत में थे.

इस कानून के तहत उमर अब्दुल्ला की छह महीने की एहतियातन हिरासत अवधि पांच फरवरी 2020 को खत्म होने वाली थी लेकिन पांच जनवरी को सरकार ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के खिलाफ पीएसए लगा दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)