कैंपस

जामिया: लाइब्रेरी में हिंसा की और फुटेज जारी, सीसीटीवी कैमरा तोड़ते दिखे पुलिसकर्मी

जामिया मिलिया इस्लामिया में 15 दिसंबर को हुई हिंसा के समय का एक और सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जहां पुलिस छात्रों द्वारा फर्नीचर से ब्लॉक किए लाइब्रेरी के गेट को तोड़कर अंदर घुसती है और छात्रों पर लाठियां चलाती दिखती है. कई छात्राओं समेत ढेरों छात्र पुलिस के सामने हाथ जोड़ते नज़र आते हैं.

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सीसीटीवी कैमरा तोड़ने का प्रयास करता दिख रहा पुलिसकर्मी. (वीडियोग्रैब साभार: मकतूब मीडिया)

नई दिल्ली: जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी द्वारा 15 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया की लाइब्रेरी में पुलिस के घुसने और हिंसा की फुटेज जारी करने के एक दिन बाद एक अन्य फुटेज सामने आयी है, जहां पुलिस छात्रों के लाइब्रेरी का दरवाजा ब्लॉक करने के बाद उसे तोड़कर अंदर घुसकर निहत्थे छात्रों पर लाठियां बरसाती नजर आ रही है.

मकतूब मीडिया द्वारा जारी 5 मिनट लंबी यह वीडियो फुटेज ओल्ड रीडिंग हॉल के दरवाजे के पास लगे सीसीटीवी की है. ज्ञात हो कि 13 दिसंबर को सीएए के खिलाफ जामिया के छात्रों के प्रदर्शन के बाद 15 दिसंबर को जामिया परिसर में हिंसा हुई थी, जहां पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था, साथ ही लाइब्रेरी में आंसू गैस फेंकी गयी थी.

पुलिस द्वारा लाइब्रेरी में घुसने और लाठीचार्ज करने की बात से इनकार किया गया था. हालांकि 16 फरवरी को सामने आए एक वीडियो में पुलिस लाइब्रेरी के अंदर नजर आयी थी. इसी शाम एक दिल्ली पुलिस द्वारा एक अन्य वीडियो जारी किया गया था, जिसमें उनके अनुसार ‘दंगाई’ लाइब्रेरी में घुसे थे.

इस वीडियो में कई छात्र लाइब्रेरी में घुसकर दरवाजे के आगे फर्नीचर लगाकर उसे ब्लॉक कर रहे थे. इनमें से केवल एक व्यक्ति मास्क पहने दिखता है, वहीं एक अन्य शख्स के हाथ में कोई चीज है, जिसे पुलिस द्वारा ‘पत्थर’ बताया जा रहा है.

मकतूब मीडिया द्वारा सोमवार को जारी वीडियो पुलिस द्वारा जारी की गयी फुटेज के आगे का हिस्सा लगता है. मकतूब मीडिया का दावा है कि उनके पास एक घंटे से ज्यादा की वीडियो फुटेज है, जो लाइब्रेरी में हुई हिंसा को दिखाती है.

17 फरवरी को जारी वीडियो क्लिप में छात्र लाइब्रेरी के दरवाजे के आगे फर्नीचर आदि लगाकर इसे ब्लॉक करते नजर आते हैं और पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर घुसती है. पुलिस के अंदर आने पर एक महिला सिक्योरिटी गार्ड को जाने दिया जाता है. इसके बाद कई छात्राओं समेत ढेरों छात्र पुलिस के सामने हाथ जोड़कर उन्हें जाने देने की गुज़ारिश करते नजर आते हैं.

पुलिस कई छात्रों पर लाठियां चलाती दिखती है, जिससे बचने के लिए छात्र अपने बैग के पीछे छिपने, सिर बचाने की कोशिश करते हैं. इस बीच कुछ छात्र-छात्राएं धीरे-धीरे लाइब्रेरी के दरवाजे से बाहर निकलते हैं लेकिन बाहर की ओर से भी पुलिसकर्मी लाठियां चलाते दिख रहे हैं.

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पुलिस के सामने हाथ जोड़ते दिख रही छात्रा. (वीडियोग्रैब साभार: मकतूब मीडिया)

इस वीडियो क्लिप के आखिर में गेट पर खड़े छात्र मार से बचने के लिए अंदर की ओर भागते हैं, जब अंदर खड़े पुलिसकर्मी उन पर लाठियां बरसाते हैं. इन सभी छात्रों में किसी के चेहरे ढके हुए नहीं हैं, केवल एक छात्र प्रदूषण से बचने वाला मास्क लगाए नजर आ रहा है.

वीडियो के आखिर में एक पुलिसकर्मी अपने चेहरे को छिपाते हुए इस सीसीटीवी कैमरा की तरफ आता है और इसके ऊपर लाठी मारकर तोड़ने का प्रयास करता है.

द वायर स्वतंत्र रूप से इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.

16 फरवरी को जारी हुए वीडियो फुटेज के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस पर कई सवाल उठे थे, जिसके बाद उन्होंने एक वीडियो क्लिप जारी किया. उनका ‘दंगाइयों’ के लाइब्रेरी में घुसने का दावा अस्पष्ट है क्योंकि यह किसी भी तरह मालूम नहीं चल रहा कि भागकर लाइब्रेरी में घुस रहे लोग ‘दंगाई’  हैं या पुलिस की कार्रवाई से बचकर भाग रहे छात्र.

मालूम हो कि इस हिंसा के बाद पुलिस द्वारा लगातार यह कहा गया था कि वे लाइब्रेरी में नहीं गए थे. पुलिस पर इस कार्रवाई के दौरान फायरिंग करने का भी आरोप लगा था. इसके बाद दिल्ली पुलिस की आंतरिक जांच में कहा गया था कि दो पुलिसकर्मियों ने एसीपी रैंक के एक ऑफिसर के सामने छात्रों पर गोलियां चलाई थीं.

वहीं, पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) की एक टीम ने भी ‘ ब्लडी संडे’ नाम की एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था है कि पुलिस ने जामिया के छात्रों को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने के इरादे से हमला किया था.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पुलिस ने जानबूझकर लोगों को हिरासत में रखा और घायलों तक चिकित्सकीय मदद नहीं पहुंचने दी. पुलिस बिना मंजूरी के कैंपस पहुंची और लाठी से छात्रों को पीटना शुरू किया.

रिपोर्ट में कहा गया था कि पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए और छात्रों पर लाठीचार्ज करना शुरू किया. साथ ही पुलिस ने छात्रों पर सांप्रदायिक टिप्पणियां भी कीं.

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने छात्रों पर बर्बर कार्रवाई के दौरान उनके लिए जिहादी, देशद्रोही और कटवा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, साथ ही कथित तौर पर महिलाओं को यौन हिंसा की भी धमकियां दीं.