नॉर्थ ईस्ट

अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर त्रिपुरा में शुरू होगा आंदोलन

तिप्रालैंड नाम के अलग राज्य के लिए स्वदेशी पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने 10 जुलाई से असम-अगरतला हाईवे और रेल नेटवर्क जाम कर देने का ऐलान किया.

तिप्रालैंड की मांग करते आईपीएफटी के कार्यकर्ता (फोटो:thenortheasttoday.com)

तिप्रालैंड की मांग करते आईपीएफटी के कार्यकर्ता (फोटो: thenortheasttoday.com)

स्वदेशी पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है. आईपीएफटी ने कहा है कि वो 10 जुलाई से असम-अगरतला हाईवे और रेल नेटवर्क को जाम कर देंगे. राज्य में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाला है. राज्य की सत्ताधारी दल माकपा ने आईपीएफटी के इस कदम की निंदा करते हुए कहा है कि चुनाव के चलते साजिश के तहत इस प्रदर्शन का ऐलान किया गया है.

द हिन्दू की ख़बर के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की संभावना के खत्म होने के बाद आईपीएफटी के अध्यक्ष नरेंद्र चंद्र देवबर्मा ने अब आंदोलन की घोषणा करते हुए अलग राज्य की मांग की है.

पार्टी द्वारा अलग राज्य की मांग के कारण विधानसभा चुनाव में भाजपा, टीएमसी और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना अब समाप्त हो चुकी है. सभी दलों ने यह साफ़ कर दिया है कि वो किसी भी सांप्रदायिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगे.

भाजपा के प्रदेश प्रभारी सुनील देवधर ने भी साफ़ कर दिया है कि राज्य को बांटने वाली किसी भी शक्ति का साथ भाजपा नहीं देगी.

आईपीएफटी के नेताओं और विशेष रूप से पार्टी प्रमुख देबबर्मा ने सभी लोगों को एक झटका दे दिया है. यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि वह भाजपा-प्रायोजित पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) का हिस्सा बनना चाहते हैं.

देबबर्मा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अलग राज्य के मुद्दे पर विचार किए बिना एनईडीए के बारे में सोचने के लिए तैयार नहीं हैं.

ग़ौरतलब है कि पार्टी से बड़ी संख्या में पलायन और भीतरघात के चलते अलग राज्य को लेकर आंदोलन का ऐलान किया गया है.

स्वदेशी पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) (फोटो: thenortheasttoday.com)

स्वदेशी पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) (फोटो: thenortheasttoday.com)

आईपीएफटी का इतहास

आईपीएफटी ने सन 2000 में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के चुनावों में राजनीतिक सफलता हासिल की थी. उग्रवादी अलगाववादी संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) ने घोषणा की थी कि वह केवल आईपीएफटी को चुनाव लड़ने की अनुमति देगा.

हिंसा और अपहरण के बीच केवल वाम मोर्चा और आईपीएफटी ने चुनाव में भाग लिया. टीटीएएडीसी की 28 सीटों में से 17 पर जीत हासिल कर आईपीएफटी ने बहुमत हासिल किया था.

आईपीएफटी फिलहाल अपने अध्यक्ष देबबर्मा की नेतृत्व में टीटीएएडीसी के भीतर तिप्रालैंड नाम के अलग राज्य की मांग कर रहा है. विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में करारी हार के चलते बड़ी संख्या में लोग पार्टी छोड़ अन्य दलों से जुड़ चुके हैं.

2015 के टीटीएएडीसी में आईपीएफटी 28 में से 27 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी. चुनावों में हार के चलते कई नेताओं ने पार्टी छोड़कर ‘तिप्रालैंड स्टेट पार्टी’ नामक दल बनाने का निर्णय लिया है. पार्टी के कई नेता भाजपा से भी जुड़ चुके हैं.