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कोरोना वायरस से निपटने के लिए लॉकडाउन पर्याप्त नहींः डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोना की वैक्सीन को बाजार में आने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है. लॉकडाउन हटने के बाद वायरस तेजी से न फैले इसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और दुरुस्त करने की जरूरत है.

Hyderabad: Medics outside an isolation ward of the novel coronavirus (COVID-19) at a hospital in Hyderabad, Friday, March 13, 2020. India has more than 70 positive coronavirus cases so far and recorded its first COVID-19 death in Karnataka. (PTI Photo)(PTI13-03-2020_000060B)

(फोटोः पीटीआई)

लंदन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए सिर्फ लॉकडाउन ही पर्याप्त नहीं है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ ने कहा कि लॉकडाउन हटने के बाद वायरस तेजी से न फैले इसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य के उपाय किए जाने जरूरी हैं. देशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और दुरुस्त करने की जरूरत है.

दरअसल डब्ल्यूएचओ की इस चेतावनी को उन देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिन देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद खराब स्थिति में है.

डब्ल्यूएचओ के के वरिष्ठ आपात व्यवस्था के विशेषज्ञ माइक रेयान ने कहा, ‘हमें ऐसे लोगों को ढूंढने पर जोर देने की जरूरत है, जो वायरस से संक्रमित हैं. हमें उन्हें अलग-थलग (आइसोलेट) करने की जरूरत है. उन्हें ढूंढकर अलग करने पर ध्यान देने की जरूरत है.’

उन्होंने कहा, ‘अगर हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं होंगी तो लॉकडाउन हटने के बाद खतरा बढ़ेगा और वायरस तेजी से फैलेगा.’

चीन और अन्य एशियाई देशों की तरह यूरोप और अमेरिका ने भी कोरोना वायरस से निपटने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं. ज्यादातार लोगों को घरों से काम करने को कहा जा रहा है. स्कूल, बार, पब और रेस्तरां बंद कर दिए गए हैं.

रेयान ने कहा कि चीन, ‘सिंगापुर और दक्षिण कोरिया का उदाहरण यूरोप के लिए एक मॉडल साबित हुआ है जबकि पहले डब्ल्यूएचओ ने ही एशिया को कोरोना वायरस का केंद्र बताया था.’

रेयान ने कहा, ‘एक बार वायरस के फैलाव को नियंत्रित करने के बाद हमें वायरस के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़नी होगी.’

विश्व में कोरोना से सर्वाधिक इटली प्रभावित हुआ है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन का हेल्थ सिस्टम तब तक दुरुस्त नहीं हो सकता जब तक लोग सोशल डिस्टेंशिंग पर अमल नहीं करते.

रेयान ने कहा कि कोरोना वायरस की कई वैक्सीन का उत्पादन हो रहा है लेकिन अभी तक सिर्फ एक वैक्सीन का ही अमेरिका में ट्रायल शुरू हुआ है.

यह पूछने पर कि ब्रिटेन में वैक्सीन उपलब्ध होने में कितना समय लग सकता है?

इस पर वह कहते हैं, ‘लोगों को यथार्थवादी होने की जरूरत है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बिल्कुल सुरक्षित हो. इसमें कम से कम एक साल भी लग सकता है. वैक्सीन बाजार में आएंगी लेकिन हमें घरों से बाहर निकलने की भी जरूरत है और जो कुछ करना है, अभी करना होगा.’

बता दें कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए भारत सहित दुनियाभर में लॉकडाउन यानी देशों को पूरी तरह बंद करने का रास्ता अपनाया जा रहा है.

भारत में दिल्ली समेत कई राज्यों में 31 मार्च तक लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है. सिर्फ जरूरी वस्तुओं और सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है.