भारत

कोरोना वायरस: पीएम केयर्स फंड में विदेशों से भी चंदा लेने को सरकार ने दी मंजूरी

इस सप्ताह भारतीय राजदूतों के साथ वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनयिकों को अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के व्यक्तियों से पीएम केयर्स फंड के लिए धन जुटाने के लिए कहा था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

नई दिल्ली: भारत सरकार ने कोरोना वायरस ‘महामारी की अभूतपूर्व प्रकृति’ के कारण विदेशी व्यक्तियों और समूहों को नव-गठित पीएम केयर्स फंड में दान करने की अनुमति दी है.

रिपोर्ट के अनुसार, बीते 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई के हिस्से के रूप में एक नए चैरिटेबल ट्रस्ट- ‘प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकाल’ में राहत (पीएम-केयर) फंड के गठन की घोषणा की थी.

इस सप्ताह भारतीय राजदूतों के साथ अपने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मोदी ने राजनयिकों को अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के व्यक्तियों से पीएम केयर्स फंड के लिए धन जुटाने के लिए कहा था.

चूंकि, पिछली आपदाओं के दौरान भारत सरकार की आम तौर पर विदेशी सहायता स्वीकार नहीं करने की नीति रही है, इसलिए इस बात पर थोड़ा भ्रम था कि विदेशी मूल के लोग राष्ट्रनिधि में योगदान कर सकते हैं या नहीं.

बुधवार को सरकारी सूत्रों ने यह साफ कर दिया कि पीएम केयर्स फंड के संबंध में यह फैसला लिया जा चुका है कि विदेशी व्यक्तियों और समूहों को दान देने के लिए आमंत्रित किया जाएगा.

उन्होंने कहा, कोरोना वायरस के खिलाफ सरकार की लड़ाई में सहयोग के लिए भारत और विदेश से कई अनुरोध मिलने के बाद पीएम केयर्स फंड नाम का एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट गठित किया गया था. सरकार के प्रयासों में योगदान के साथ-साथ महामारी की अभूतपूर्व प्रकृति को ध्यान में रखते हुए व्यक्त की गई रुचि के मद्देनजर, ट्रस्ट में भारत और विदेश दोनों जगह रह रहे व्यक्तियों और संगठनों द्वारा योगदान किया जा सकता है.

हालांकि, यह साफ नहीं हो सका कि भारत विदेशी सरकारों से भी सहायता स्वीकार करेगा या नहीं.

सूत्रों का कहना है कि कोरोना वायरस पर भारत को वित्तीय सहायता देने के लिए किसी भी सरकार ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया है.

बता दें कि, अमेरिका ने 64 देशों के लिए 274 मिलियन डॉलर की विदेशी सहायता की घोषणा की थी, जिसमें भारत भी शामिल था. लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह भारत के लिए प्रत्यक्ष सहायता नहीं थी, बल्कि देश में रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के काम को मजबूत करने के लिए थी.

साल 2004 में आई सुनामी से ही भारत ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत के रूप में विदेशी सरकारों के सहायता प्रस्तावों को लगातार खारिज किया है.

हालांकि, अब भारत ने प्रधानमंत्री राहत कोष और मुख्यमंत्री राहत कोष में एनआरआई, पीआईओ और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सहयोग राशि स्वीकार करने को मंजूरी दे दी.