‘यह कृषि प्रधान देश है, जहां पर किसान मरने के लिए है और बाक़ी सब लूट कर खाने के लिए’

छह जुलाई को मध्य प्रदेश के मंदसौर से किसान मुक्ति यात्रा की शुरुआत होगी जो कई राज्यों से होते हुए 18 जुलाई को दिल्ली पहुंचेगी.

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छह जुलाई को मध्य प्रदेश के मंदसौर से किसान मुक्ति यात्रा की शुरुआत होगी जो कई राज्यों से होते हुए 18 जुलाई को दिल्ली पहुंचेगी.

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शनिवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए योगेंद्र यादव, किसान नेता वीएम सिंह, डॉ सुनीलम व अन्य किसान संगठनों के नेता. (फोटो: द वायर)

किसानों की क़र्ज़ माफ़ी और फ़सलों के उचित मूल्य की मांग को लेकर किसान संगठन छह जुलाई से मध्य प्रदेश के मंदसौर से ‘किसान मुक्ति यात्रा’ शुरू करेंगे. शनिवार को दिल्ली में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी गई.

इस दौरान द वायर से बातचीत में समिति के संयोजक वीएम सिंह ने कहा, ‘लाखों करोड़ रुपये कॉरपोरेट सेक्टर का माफ़ हो जाता है, लेकिन किसानों का माफ़ नहीं होता. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. यह कृषि प्रधान देश है, जहां पर किसान मरने के लिए है और बाक़ी सब लूट कर खाने के लिए हैं. सरकार के पास छठवां, सातवां वेतन आयोग लागू करने के लिए पैसे हैं, लेकिन किसानों के लिए पैसे नहीं हैं. ये शायद नीयत की कमी है. सरकार को नीयत ठीक करनी पड़ेगी.’

उन्होंने सरकार के प्रति किसानों के ग़ुस्से का ज़िक्र करते हुए कहा, ‘किसान विश्वास में मारा गया. उसने सोचा जिनको हम वोट देते हैं, वो हमारी रक्षा करेंगे. लेकिन आंकड़ा है कि पिछले 20 सालों में साढ़े तीन से चार लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं. अब सब्र टूट गया है. अब किसान को लग रहा है कि मुझे ख़ुद खड़ा होना पड़ेगा. इसीलिए हमारे साथ क़रीब 200 किसान संगठन आ गए हैं. हमारी जो बातचीत हो रही है, उससे ये लग रहा है कि दस पंद्रह संगठन बचेंगे, बाक़ी सब हमारे साथ आएंगे. अपने आपको ज़िंदा रखना है तो सामने आना पड़ेगा. क्योंकि सबका बेड़ा गर्क हो चुका है.’

समिति की ओर से आयोजित यह यात्रा छह जुलाई को मंदसौर से शुरू होकर, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा होते हुए 18 जुलाई को दिल्ली पहुंचेगी. इसके बाद सभी संगठन मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे.

समिति के संयोजक वीएम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि किसानों के लिए क़र्ज़ माफ़ी और फ़सलों का लागत से डेढ़ गुना दाम दिलाने की मांग पर एकजुट हुए देश के तमाम किसान संगठनों ने मिलकर इस यात्रा का आयोजन किया है.

वीएम सिंह ने कहा, ‘हमारी फ़िलहाल दो मुख्य मांगें हैं, एक तो नरेंद्र मोदी ने कहा था कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के तहत किसानों की लागत पर 50 प्रतिशत का मुनाफ़ा देंगे, सरकार उसे दे. दूसरा, सरकार की ग़लती है कि उसने आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की और किसानों का क़र्ज़ बढ़ता गया. सरकार किसानों का क़र्ज़ माफ़ करे.’

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों के आंदोलन और मंदसौर के किसानों की शहादत ने किसान संगठनों में एक नई राष्ट्रव्यापी एकता पैदा की है.

यह यात्रा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से होते हुए 18 जुलाई को दिल्ली पंहुचेगी. रास्ते में यह यात्रा बारदोली और खेड़ा जैसे किसान आंदोलन के ऐतिहासिक स्थलों पर भी जाएगी.

वीएम सिंह ने कहा, ‘सरकार के मंत्री मज़ाक उड़ाते हुए टिप्पणी कर रहे हैं कि क़र्ज़ माफ़ी फैशन हो गया है. वे किसका मज़ाक उड़ा रहे हैं? इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री ने की थी कि आपका लोन माफ़ किया जाएगा. इसका मतलब सरकार के मंत्री किसानों के साथ प्रधानमंत्री का भी मज़ाक उड़ा रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘अगर हमें कुछ करना है, खेती को ज़िंदा रखना है, अपने भविष्य के लिए दो रोटी का इंतज़ाम करना है, तो किसान को बचाना पड़ेगा. ये नेता जो चुनाव के पहले कुछ और बात करते हैं, चुनाव के बाद कुछ और बात करते हैं, इससे किसी का गुज़ारा नहीं है. चुनाव के पहले मोदी जी ने कहा था कि किसान का क़र्ज़ माफ़ करेंगे. कहा था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य इतना कर देंगे कि किसान पर क़र्ज़ ही न लदे. आज आप सिर्फ़ क़र्ज़ माफ़ी की बात करते हैं और समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाते तो अगले साल फिर क़र्ज़ हो जाएगा. सरकार को ये सोचना पड़ेगा कि अगर खेती को ज़िदा रखना है तो किसानों के लिए क्या करना है. हम सब सरकार की मदद के लिए तैयार हैं.’

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने कहा, ‘एक तारीख़ को महाराष्ट्र के किसानों ने हड़ताल शुुरू की थी. एक महीना हो गया है. इस बीच किसानों के बीच अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली है. अचानक पूरे देश का किसान जाग गया है. पूरे देश में किसान विद्रोह की स्थिति आ गई है. देश के अधिकांश किसान संगठन हमारे साथ हैं. मैं पिछले तीस साल से किसान आंदोलनों को देखता रहा हूं. पिछले तीस में मैंने इतना बड़ा किसान समन्वय नहीं देखा. भारत के किसान आंदोलन के इतिहास में यह अभूतपूर्व है.’

दिल्ली पहुंचकर यह मार्च जंतर मंतर पर एक मोर्चे का स्वरुप ले लेगा. इस पहल में ऑल इंडिया किसान सभा के नेता और पूर्व सांसद हन्नान मौला, स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के प्रतिनिधि और सांसद राजू शेट्टी, जन आंदोलनों के राष्ट्रीय संगठन के संयोजक पूर्व विधायक डॉ सुनीलम और जय किसान आंदोलन के नेता योगेंद्र यादव ने निर्णायक भूमिका निभाई.

योगेंद्र यादव ने किसानों की क़र्ज़ माफ़ी पर केंद्र के रुख़ की निंदा की और कहा कि किसानों के प्रति दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं. जब किसानों की बात आती है तो मैं दोहरे मानदंड पाता हूं.

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समित (एआईकेएससीसी) के संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश के किसान इसलिए क़र्ज़ के बोझ से दबे हैं क्योंकि पिछले 50 सालों से कृषि उत्पादों का मूल्य जानबूझकर कम रखा गया है.

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