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परीक्षाओं को लेकर यूजीसी के दिशानिर्देश राज्यों के लिए बाध्यकारीः एचआरडी अधिकारी

यूजीसी ने छह जुलाई को सभी संस्थानों को सितंबर के अंत तक टर्मिनल सेमेस्टर या अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित कराने की सलाह दी थी. पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र और पंजाब ने यूजीसी के इसका विरोध करते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्लीः बीते छह जुलाई को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी संस्थानों को सितंबर के अंत तक टर्मिनल सेमेस्टर या अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित कराने की सलाह दी थी, जिसका कुछ राज्यों ने विरोध किया था.

मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर यूजीसी के दिशानिर्देश राज्यों के लिए बाध्यकारी हैं. हालांकि चार राज्यों ने इसके विरोध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र और पंजाब इन चार राज्यों ने यूजीसी के इन दिशानिर्देशों का विरोध करते हुए इनका पालन नहीं करने में असमर्थता जताई है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को इसका विरोध जताते हुए कहा था कि परीक्षाएं रद्द की जानी चाहिए और छात्रों को उनके पहले के प्रदर्शन के आधार पर प्रमोट किया जाना चाहिए.

एचआरडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘बिना परीक्षा के डिग्री का कोई मूल्य नहीं रह जाएगा और इससे इस बैच की रोजगार क्षमता प्रभावित होगी. क्या हम एक लोकलुभावन दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और सभी को प्रमोट कर देना चाहिए या इन छात्रों का भविष्य ध्यान में रखना चाहिए.’

अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकारें परीक्षाओं पर फैसला नहीं ले सकती हैं, क्योंकि परीक्षाएं आयोजित कराने को लेकर दिशानिर्देश जारी करने का अधिकार यूजीसी का है.

यूजीसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘यूजीसी एक्ट 1956 की धारा 12 में साफतौर पर लिखा है कि यूजीसी इस तरह के सभी कदम उठा सकती है, जो विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रसार और समन्वय के लिए जरूरी हो और यूनिवर्सिटी में शिक्षण, परीक्षा और शोध के मानकों को बनाए रखने के लिहाज से सही हो.’

अधिकारी ने कहा, 2003 के यूजीसी रेगुलेशन के तहत विश्वविद्यालयों को आयोग द्वारा जारी किए गए परीक्षा संबंधित दिशानिर्देश समय-समय पर अपनाने पड़ेंगे.

यूजीसी और एचआरडी मंत्रालय ने अभी तक राज्यों द्वारा लिखे गए पत्रों का जवाब नहीं दिया है.

यह पूछने पर कि विश्वविद्यालयों की इमारतों को क्वारंटीन के तौर पर इस्तेमाल में लाए जाने पर विश्वविद्यालय किस तरह परीक्षाएं कराएंगे?

इस पर यूजीसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘विश्वविद्यालयों के पास परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए सितंबर तक का समय है और उनके पास निर्णय लेने की पूरी स्वायत्तता है कि वे कैसे परीक्षाएं कराएंगे. सभी शैक्षणिक संस्थानों की इमारतों को क्वारंटीन के तौर पर इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा.’

मालूम हो कि कांग्रेस ने शुक्रवार को कई शीर्ष नेताओं के साथ मिलकर एक सोशल मीडिया अभियान शुरू किया, जिसके तहत वीडियो संदेशों के जरिये यूजीसी की आलोचना कर परीक्षाएं आयोजित कराने के उनके फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा गया.