नॉर्थ ईस्ट

पूर्वोत्तर में इंडियन ऑयल के एलपीजी ट्रांसपोर्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के 10 बॉटलिंग संयंत्रों में सिलेंडर की ढुलाई और आपूर्ति प्रभावित हुई है और आने वाले दिनों में वितरकों की खुदरा बिक्री भी प्रभावित होने की आशंका है.

Kolkata: A worker waits to deliver LPG cylinders, during Unlock 2.0, in Kolkata, Saturday, July 18, 2020. (PTI Photo/Swapan Mahapatra)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: पूर्वोत्तर राज्यों में एलपीजी ट्रांसपोर्टरों का एक संघ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) द्वारा जारी नवीनतम निविदा (टेंडर) के खिलाफ बृहस्पतिवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चला गया.

बॉटलिंग संयंत्रों से व्यापारियों तक सिलेंडर पहुंचाने वाला नॉर्थ ईस्ट पैक्ड एलपीजी ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन (एनईपीएलटीए) गुवाहाटी के बजाय कोलकाता से टेंडर जारी किए जाने, मौजूदा दरों को कम करने आदि का विरोध कर रहा है.

सूत्रों ने कहा कि हड़ताल के कारण कंपनी के 10 बॉटलिंग संयंत्रों में भरे गए सिलेंडर की ढुलाई और आपूर्ति प्रभावित हुई है और आने वाले दिनों में वितरकों की खुदरा बिक्री भी प्रभावित होने की आशंका है.

टाइम्स नाउ के मुताबिक अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण पूर्वोत्तर के लगभग 4,000 लोगों के स्वामित्व वाले लगभग 8,000 ट्रकों का संचालन बंद हो गया है.

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के साथ आईओसीएल के गुवाहाटी के बाहरी इलाके स्थित मिर्जा प्लांट, उत्तर गुवाहाटी संयंत्र, पश्चिमी असम में बोंगईगांव, तिनसुकिया (असम) में गोपीनारी प्लांट, मणिपुर, नगालैंड में सेकमई प्लांट और अगरतला प्लांट में परिचालन बंद हो गया है.

टाइम्स नाउ से बातचीत में ऑल असम पेट्रोलियम ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन (एएपीटीए) के अध्यक्ष निरंजन महंता ने कहा कि उनका विरोध और मांग पिछले दो सालों से है क्योंकि टेंडर प्रक्रिया को गुवाहाटी से कोलकाता स्थानांतरित कर दिया गया है.

उनका कहना है कि उनके पास अपनी मांगों को मनवाने के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था, क्योंकि अब तक उनकी मांगों को नहीं सुना जा रहा था.

निरंजन महंता के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया को गुवाहाटी से कोलकाता स्थानांतरित कर दिए जाने के बाद उन्हें बहुत ही कम समय के नोटिस पर कोलकाता बुलाया जाता था, जिसमें खर्च ज्यादा होता है. इतना ही नहीं साल 2011 के बाद से कीमत तो वही है और अब मुनाफा 25 प्रतिशत तक घट गया है.

उन्होंने आरोप लगाया गया है कि आईओसीएल ट्रांसपोर्टरों को प्रति ट्रक 306 के मुकाबले 342 एलपीजी सिलेंडर लोड करने के लिए मजबूर कर रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि आईओसीएल ने मौजूदा कोविड-19 महामारी की स्थिति में ट्रांसपोर्टरों को छह पहिया ट्रक की जगह 10 पहिया ट्रक लेने को कहा है. एलपीजी सिलेंडरों के भारी भार वाले 10 पहिया ट्रकों का परिचालन पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों में एक बड़ा जोखिम है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आईओसीएल अभी पूरे पूर्वोत्तर में हर दिन लगभग 1.5 लाख गैस सिलेंडर आपूर्ति करता है. इस क्षेत्र में इसके 850 वितरक हैं.

आईओसीएल ने पीटीआई से कहा, ‘हमें हड़ताल की कोई सूचना नहीं मिली है और एलपीजी एक आवश्यक वस्तु है, बिना किसी नोटिस के हड़ताल पर जाना कानून के खिलाफ होगा.’

उसने यह भी कहा कि वर्तमान में बाजार में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है. साथ ही कहा कि वह सभी चुनौतियों के बावजूद निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है.

आईआईएसओ के बॉटलिंग प्लांट से एलपीजी सिलेंडर ट्रांसपोर्ट करने के लिए एनईपीएलटीए लगभग 1,400 ट्रकों का परिचालन करता है, जो असम के विभिन्न वितरकों के पास है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)