राजनीति

कांग्रेस में व्यापक बदलाव, ग़ुलाम नबी आज़ाद और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पांच महासचिव हटाए गए

कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के लिए पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में से कई लोगों का क़द छोटा कर दिया गया. पत्र लिखने वाले नेताओं मनीष तिवारी और शशि थरूर को भी फ़िलहाल कोई नई ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है. प्रियंका गांधी को अब पूरे उत्तर प्रदेश के प्रभारी का ज़िम्मा आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया है.

प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कांग्रेस नेतृत्व ने शुक्रवार को पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए गुलाम नबी आजाद समेत पांच वरिष्ठ नेताओं को महासचिव की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया और पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) का भी पुनर्गठन किया.

इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के सहयोग के लिए छह सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया गया है.

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, गुलाम नबी आजाद, मोतीलाल वोरा, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे और लुईजिन्हो फलेरो को महासचिव पद से मुक्त किया गया है. आजाद हरियाणा, अंबिका जम्मू कश्मीर, वोरा (पार्टी प्रशासन) और खड़गे महाराष्ट्र के प्रभारी की भूमिका में थे.

इनके अलावा लुईजिन्हो फलेरा के पास मिजोरम, त्रिपुरा, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय का प्रभार था. 92 वर्षीय मोतीलाल वोरा प्रशासन के प्रभारी महासचिव थे. के पास पार्टी प्रशासन की जिम्मेदारी थी. अब यह जिम्मेदारी पवन कुमार बंसल को दे दी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्यों के प्रभारियों को हटा दिया गया है. इनमें अनुग्रह नारायण सिंह उत्तराखंड, आशा कुमारी पंजाब, गौरव गोगाई पश्चिम बंगाल, आरसी खूंटिया तेलगांना शामिल हैं. गौरव गोगोई को हाल ही में लोकसभा में कांग्रेस का उपनेता बनाया गया है.

इसके साथ ही रणदीप सुरजेवाला, तारिक अनवर और जितेंद्र सिंह के तौर पर तीन नए महासचिव नियुक्त किए. इन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है.

संगठन में व्यापक बदलाव करने के साथ कई ऐसे नेताओं का कद कम कर दिया गया है, जिन्होंने हाल ही में सोनिया गांधी को पत्र लिखा था. संगठनात्मक बदलाव के लिए पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में सबसे प्रमुख नाम गुलाम नबी आजाद का है जिन्हें महासचिव पद से मुक्त कर दिया गया है, हालांकि उन्हें सीडब्ल्यूसी में स्थान दिया गया है.

पत्र लिखने वाले वरिष्ठ नेताओं में शामिल मुकुल वासनिक के पास पहले कई राज्यों का प्रभार था, लेकिन अब उनके पास सिर्फ मध्य प्रदेश का प्रभार होगा, हालांकि उन्हें सोनिया गांधी के सहयोग के लिए बनी विशेष समिति में जगह दी गई है.

राजस्थान में पिछले दिनों बागी रुख अख्तियार करने वाले सचिन पायलट को इस फेरबदल में फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है.

पत्र लिखने वाले नेताओं मनीष तिवारी और शशि थरूर को भी फिलहाल कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है, हालांकि जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया गया है.

पार्टी ने पत्र विवाद की पृष्ठभूमि में 24 अगस्त को हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में बनी सहमति के मुताबिक छह सदस्यीय एक विशेष समिति का गठन किया है. यह समिति पार्टी के संगठन एवं कामकाज से जुड़े मामलों में सोनिया गांधी का सहयोग करेगी.

इस विशेष समिति में एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक और रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री की अध्यक्षता में केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का भी पुनर्गठन किया गया है. इसमें मिस्त्री के अलावा राजेश मिश्रा, कृष्णा गौड़ा, ज्योतिमणि और अरविंदर सिंह लवली को बतौर सदस्य शामिल किया गया है.

नई सीडब्ल्यूसी में 22 सदस्य, 26 स्थायी आमंत्रित सदस्य और नौ विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल किए गए हैं.

अब तक महासचिव प्रभारी (उत्तर प्रदेश-पूर्व) की जिम्मेदारी निभा रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा को अब पूरे उत्तर प्रदेश के प्रभारी का जिम्मा आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया है. पहले प्रदेश के पश्चिमी हिस्से का प्रभार ज्योतिरादित्य सिंधिया संभाल रहे थे, जो कुछ महीने पहले ही भाजपा में जा चुके हैं.

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सुरजेवाला के कद में इजाफा करते हुए उनको कर्नाटक के लिए प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. पिछले लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से कांग्रेस में वापसी करने वाले तारिक अनवर को महासचिव बनाकर केरल एवं लक्षद्वीप का प्रभार सौंपा गया है.

अब तक ओडिशा के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे जितेंद्र सिंह को महासचिव बनाकर असम की जिम्मेदारी दी गई है. असम के लिए महासचिव प्रभारी की भूमिका निभा रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को पंजाब का प्रभार सौंपा गया है.

अब प्रियंका गांधी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, तारिक अनवर, जितेंद्र सिंह, हरीश रावत, ओमन चांडी, मुकुल वासनिक, अजय माकन और केसी वेणुगोपाल के तौर पर पार्टी में कुल नौ महासचिव होंगे. केसी वेणुगोपाल अब भी संगठन का प्रभार देखेंगे.

कांग्रेस नेतृत्व ने कई नए प्रभारी भी नियुक्त किए हैं और कई प्रदेशों के प्रभार में फेरबदल भी किए हैं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल को पार्टी प्रशासन, रजनी पाटिल को जम्मू कश्मीर (अंबिका सोनी की जगह), राजीव शुक्ला को हिमाचल प्रदेश, जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह तथा दिनेश गुंडूराव को तमिलनाडु, पुदुचेरी और गोवा के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है.

इसके साथ ही मणिकम टैगोर को तेलंगाना का प्रभारी बनाया गया है, उन्हें टीम राहुल का प्रमुख सदस्य माना जाता है. इसके अलावा चेल्लाकुमार को ओडिशा, एचके पाटिल को महाराष्ट्र (मल्लिकार्जुन खड़गे की जगह), देवेंद्र यादव को उत्तराखंड, विवेक बंसल को हरियाणा (गुलाम नबी आजाद की जगह), मनीष चतरथ को अरुणाचल प्रदेश एवं मेघालय, भक्त चरण दास को मिजोरम एवं मणिपुर तथा कुलजीत सिंह नागरा को सिक्किम, नगालैंड और त्रिपुरा का प्रभारी बनाया गया है.

वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बतौर स्थायी आमंत्रित सदस्य सीडब्ल्यूसी में वापसी की है. जयराम रमेश, सलमान खुर्शीद, अविनाश पांडे और प्रमोद तिवारी को भी सीडब्ल्यूसी का स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है.

मालूम हो कि बीते अगस्त महीने में कांग्रेस पार्टी में उस वक्त सियासी तूफान आ गया था, जब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई थी.

गुलाम नबी आजाद के अलावा कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी और जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने बदलाव की मांग को लेकर ये पत्र लिखा था.

इसके बाद बीते 24 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में फैसला लिया गया कि सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी और अगले छह महीने में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)