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टीआरपी छेड़छाड़: बार्क ने रिपब्लिक टीवी पर निजी संदेश को ग़लत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया

टीआरपी छेड़छाड़ मामले में फंसे समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी ने दावा किया था कि बार्क ने एक ईमेल में कहा है कि चैनल किसी भी कथित कदाचार में शामिल नहीं है. इस बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस से कहा है कि अगर वो मामले में अर्णब गोस्वामी की पेशी चाहती है तो उन्हें समन जारी करे.

(फोटो साभार: फेसबुक)

(फोटो साभार: फेसबुक)

मुंबई: टेलीविजन दर्शकों की रेटिंग एजेंसी बार्क इंडिया ने रिपब्लिक टीवी पर उसके निजी एवं गोपनीय संदेश गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है और कहा है कि टीआरपी रेटिंग की कथित हेरफेर की जांच को लेकर उसने कोई टिप्पणी नहीं की है.

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने एक बयान में कहा कि वह टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) में हेरफेर मामले में चल रही जांच को लेकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग कर रही है.

उल्लेखनीय है कि रिपब्लिक टीवी ने दावा किया था कि बार्क ने एक ईमेल में कहा है कि चैनल (रिपब्लिक टीवी) किसी भी कथित कदाचार में शामिल नहीं है.

इस पर बार्क ने कहा, ‘बार्क इंडिया, रिपब्लिक नेटवर्क द्वारा निजी एवं गोपनीय संचार का खुलासा किए जाने और उसको गलत तरीके से पेश किए जाने से बहुत निराश है.’

उसने कहा, ‘बार्क इंडिया बार-बार इस बात को दोहराती है कि उसने वर्तमान में चल रही जांच पर कोई टिप्पणी नहीं की है. वह रिपब्लिक नेटवर्क के बर्ताव पर अपना असंतोष व्यक्त करती हैं.’

बार्क की शिकायत पर मुंबई पुलिस, टीआरपी रेटिंग में हेरफेर के आरोपों की जांच कर रही है. रिपब्लिक टीवी उन चार चैनलों में से एक है जिनकी जांच की जा रही है.

बार्क का यह बयान तब आया है जब रिपब्लिक टीवी ने एजेंसी के सीईओ सुनील लुल्ला और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के सीईओ विकास खानचंदानी के बीच हुई एक ईमेल बातचीत का खुलासा किया.

टीवी नेटवर्क की वेबसाइट के अनुसार, खानचंदानी ने 16 अक्टूबर को बार्क को एक ईमेल लिखा था.

वेबसाइट के मुताबिक, ‘बार्क ने 17 अक्टूबर को खानचंदानी के ईमेल का जवाब दिया, जिसमें उसने बार्क के आंतरिक तंत्र में विश्वास के लिए नेटवर्क को धन्यवाद दिया और कहा कि ‘अगर एआरजी आउटलायर मीडिया (रिपब्लिक नेटवर्क का स्वामित्व रखने वाली कंपनी) के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई, तो बार्क इंडिया आपकी प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ आपको इसके बारे में सूचित करेगा.’

उसमें कहा गया, ‘इस प्रकार इस ई-मेल से साबित होता है कि बार्क ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ किसी भी तरह के अनाचार का आरोप नहीं लगाया है.’

बार्क के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, रिपब्लिक टीवी के मालिक अर्णब गोस्वामी ने कहा, बार्क का ईमेल पुष्टि करता है कि पुलिस आयुक्त ने झूठ बोला था. (मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह) को तुरंत पद छोड़ देना चाहिए.

पुलिस ने इस मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है.

मालूम हो कि बीते आठ अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने ‘टेलीविजन रेटिंग पॉइंट’ (टीआरपी) से छेड़छाड़ करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया था. मुंबई के पुलिस आयुक्त ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी सहित तीन चैनलों ने टीआरपी के साथ हेराफेरी की है.

हालांकि रिपब्लिक टीवी ने इन आरोपों से इनकार किया है.

पुलिस के अनुसार, यह गोरखधंधा उस समय सामने आया जब टीआरपी का आकलन करने वाले संगठन बार्क ने हंसा रिसर्च समूह के माध्यम से इस बारे में एक शिकायत दर्ज कराई.

इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार करने के एक दिन बाद नौ अक्टूबर को पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया के मुख्य वित्त अधिकारी शिव सुब्रमण्यम सुंदरम, वितरण विभाग के प्रमुख घनश्याम सिंह, दो विज्ञापन एजेंसियों और बॉक्स सिनेमा और फक्त मराठी के अकाउंटेंट को तलब किया था.

हालांकि, सिर्फ विज्ञापन एजेंसियों के अधिकारी- मैडिसन के प्रमुख सैम बलसारा और आईपीजी मीडिया ब्रांड्स के सीईओ शशि सिन्हा ही पूछताछ के लिए पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे. उनसे आठ से अधिक घंटों तक पूछताछ की गई थी.

वहीं, रिपब्लिक के सीएफओ शिव सुब्रमण्यम सुंदरम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जल्द सुनवाई की मांग की और मुंबई पुलिस के समन को भी चुनौती दी. तब सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट जाने को कहा था.

मुंबई पुलिस ने इस मामले में विशाल भंडारी, बोम्पल्ली राव, बॉक्स सिनेमा के मालिक नारायण शर्मा और फक्त मराठी चैनल के मालिक शिरीष शेट्टी को गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

गौरतलब है कि टीआरपी से यह पता चलता है कि कौन-सा टीवी कार्यक्रम सबसे ज्यादा देखा गया. इससे दर्शकों की पसंद और किसी चैनल की लोकप्रियता का भी पता चलता है.

गोपनीय तरीके से कुछ घरों में टीवी चैनल के दर्शकों के आधार पर टीआरपी की गणना की जाती थी. देश में ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च कॉउंसिल (बार्क) टीवी चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग जारी करता है.

अर्णब गोस्वामी की पेशी चाहती है तो उन्हें समन जारी करे पुलिस: अदालत

इस बीच मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यदि मुंबई पुलिस की अपराध शाखा रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी की टेलीविजन रेटिंग पॉइंट (टीआरपी) हेरफेर मामले में पेशी चाहती है तो उसे पहले गोस्वामी को समन जारी करना चाहिए, जैसा कि मामले में आठ अन्य लोगों के संबंध में किया गया था.

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएस कर्णिक की खंडपीठ ने कहा कि यदि ऐसा कोई समन जारी किया जाता है तो फिर गोस्वामी को पुलिस के समक्ष पेश होना होगा और जांच में सहयोग करना होगा.

अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि मामले की जांच से संबंधित दस्तावेज अदालत के अवलोकन के लिए पांच नवंबर तक सीलबंद लिफाफे में दिए जाएं. अदालत में इसी दिन मामले पर सुनवाई भी होनी है.

अदालत ने कहा, ‘प्राथमिकी में संपूर्ण विवरण नहीं होता. हम जांच के दस्तावेज देखना चाहते हैं और जानना चाहेंगे कि आज से लेकर सुनवाई की अगली तारीख तक क्या जांच होती है.’

अदालत रिपब्लिक टीवी के स्वामित्व वाली एआरजी आउटलायर मीडिया प्राइवेट लि. की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें गोस्वामी ने छह अक्टूबर को दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग की है.

याचिका में यह मामला निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की खातिर सीबीआई को हस्तांतरित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई.

याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय जांच पर रोक लगाए और पुलिस को याचिका के लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम उठाने से रोके.

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अदालत से गोस्वामी को गिरफ्तारी से संरक्षण देने की मांग की.

साल्वे ने कहा, ‘पुलिस उन्हें (गोस्वामी) निशाना बना रही है और ऐसी आशंका है कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है.’

महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि चूंकि मामले के आरोपियों में अब तक गोस्वामी का नाम नहीं है, इसलिए उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण देने का कोई आदेश नहीं दिया जा सकता.

सिब्बल ने कहा कि पुलिस ने टीआरपी मामले के सिलसिले में अब तक आठ लोगों को समन जारी कर उनसे पूछताछ की है. उन्होंने कहा, ‘इनमें से किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है.’

पीठ ने कहा कि गोस्वामी का नाम आरोपियों में नहीं है, इसलिए वह उन्हें संरक्षण देने या पुलिस को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से रोकने जैसा कोई आदेश नहीं दे सकती है.

अदालत ने यह सवाल भी उठाए कि मुंबई पुलिस या उसके आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा ऐसे मामलों में संवाददाता सम्मेलन करना कहां तक उचित था.

सिब्ब्ल ने अदालत की इस बात से सहमति जताते हुए भरोसा दिलाया कि आगे से पुलिस टीआरपी घोटाला मामले में मीडिया से बात नहीं करेगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)