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भारत में कोविड-19 टीके की औसतन 6.5 प्रतिशत ख़ुराक हो रही बर्बाद: केंद्र

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि पांच राज्यों- तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक व जम्मू कश्मीर में टीके की ख़ुराक की बर्बादी राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से अधिक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 टीके क्यों बर्बाद हो रहे हैं, इसकी राज्यों में समीक्षा होनी चाहिए.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारत में कोविड-19 टीके की औसतन 6.5 फीसदी खुराक बर्बाद हो रही है, जबकि तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में यह बर्बादी क्रमश: 17.6 प्रतिशत और 11.6 प्रतिशत है.

केंद्र ने उपरोक्त जानकारी देते हुए कोविड-19 टीके की खुराक का किफायती तरीके से इस्तेमाल का आह्वान किया है.

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि अब तक देश में टीके की 3.51 करोड़ खुराक दी गई है, जिनमें से 1.38 करोड़ खुराक 45 से 60 साल की उम्र के बीच गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को दी गई है.

उन्होंने बताया कि 15 मार्च को दुनिया में कोविड-19 की 83.4 लाख खुराक दी गई, जिनमें से 36 प्रतिशत खुराक अकेले भारत में दी गई.

भूषण ने बताया कि पांच राज्यों- तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक व जम्मू कश्मीर में टीके की खुराक की बर्बादी राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से अधिक है.

उन्होंने कहा, ‘राज्यों को संदेश दिया गया है कि कोविड-19 के टीके अमूल्य हैं. ये लोगों की सेहत की बेहतरी के लिए है और इसलिए किफायती तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए, टीके की बर्बादी को बड़े पैमाने पर कम करने की जरूरत है.’

भूषण ने कहा, ‘टीके की बर्बादी कम होने का अभिप्राय है कि आप और अधिक लोगों का टीकाकरण कर सकते हैं और इससे संक्रमण की कड़ी को तोड़ने की अधिक संभावना होगी जो बढ़ रही है.’

इसके इतर कोरोना के खिलाफ जारी टीकाकरण के सिलसिले में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से डिजिटल माध्यम से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने भी टीकों की बर्बादी का मुद्दा भी उठाया और अधिक से अधिक टीकाकरण केंद्र बनाए जाने को कहा.

उन्होंने कहा, ‘हमें टीके की बर्बादी की समस्या को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 10 प्रतिशत से ज्यादा टीके बर्बाद हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश में भी टीके की बर्बादी करीब-करीब वैसा ही है. टीके क्यों बर्बाद हो रहे हैं, इसकी भी राज्यों में समीक्षा होनी चाहिए.’

उन्होंने कहा कि टीके की बर्बादी से एक प्रकार से किसी के अधिकार को बर्बाद किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘हमें किसी के अधिकार को बर्बाद करने का हक नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘एक मुद्दा है, टीके के इस्तेमाल की अवधि समाप्त होने की. हमें ध्‍यान रखना चाहिए कि जो पहले आया है उसका पहले उपयोग हो और जो बाद में आया है उसका बाद में उपयोग हो. अगर जो बाद में आया हुआ हम पहले उपयोग कर लेंगे तो फिर एक्‍सपायरी डेट (उपयोग की अंतिम तिथि) और वेस्‍टेज (बर्बादी) की स्थिति बन जाएगी.’

इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि एक से 15 मार्च के बीच 16 राज्यों के 70 जिलों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि 17 राज्यों के 55 जिलों में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 100 से 150 प्रतिशत के बीच बढ़ोतरी देखने को मिली.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)