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दाभोलकर और पानसरे की हत्या सुनियोजित, कुछ संगठनों ने की मदद: बॉम्बे हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा, दोनों हत्याओं के बीच स्पष्ट गठजोड़ है. कुछ संगठन निश्चित तौर पर अपराधियों का समर्थन कर रहे थे.

Narendra Dabholkar Govind Pansare PTI

नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई: अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ताओं नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्या सुनियोजित थी और अपराधियों को सांगठनिक मदद हासिल थी. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बुधवार को यह बात कहते हुए जांच अधिकारियों से कहा कि वे अपराधियों को पकड़ने के लिये अपनी जांच की मौजूदा दिशा से इतर भी देखें.

न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति विभा कंकणवादी ने यह भी कहा कि दोनों हत्याओं के बीच स्पष्ट गठजोड़ है.

न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने राज्य सीआईडी और सीबीआई द्वारा पानसरे और दाभोलकर हत्या मामले में सौंपी गई जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद गौर करते हुए कहा, रिपोर्ट से पता चलता है कि ये साफ तौर पर एक या दो छिटपुट घटनाएं नहीं थीं. कुछ संगठन निश्चित तौर पर उनका समर्थन कर रहे थे. वित्तीय रूप से उनकी मदद कर रहे थे. ये घटनाएं सुनियोजित थीं.

अदालत ने गौर किया कि सीबीआई द्वारा दाभोलकर के कथित हत्यारे के तौर पर चिन्हित किए गए सारंग अकोलकर और विनय पवार का अब भी पता लगाया जाना बाकी है. अदालत ने कहा कि एजेंसी को अपनी जांच की मौजूदा दिशा से इतर भी अवश्य देखना चाहिए.

न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने कहा, दोनों हत्याओं के बीच स्पष्ट गठजोड़ है. इन लोगों की समाज में अवश्य जड़ें होंगी. राज्य सीआईडी के साथ तालमेल करें, आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करें, बैंक लेनदेन और एटीएम से धन निकालने पर नजर रखें, रेल टिकट की बुकिंग की जांच करें. सिर्फ चार या पांच राज्य हैं जिनकी सुगम्य सीमा है जहां ये लोग भागे होंगे.

उन्होंने कहा, आज के समय में इतने लंबे समय तक छिपे रहना किसी के लिए असंभव है. पीठ ने दोनों जांच एजेंसियों को भी निर्देश दिया कि वे उपरोक्त सुझावों पर गौर करें और 13 सितंबर को सुनवाई की अगली तारीख तक ताजा रिपोर्ट सौंपें.

उसने याचिकाकर्ताओं, मृत अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ताओं के परिवार के सदस्यों से एक हलफनामा सौंपकर अपनी मांगों को सूचीबद्ध करने को कहा कि राज्य के गृह सचिव और सीबीआई निदेशक को जांच के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया जाए.

इस बीच, दोनों जांच एजेंसियों ने कहा कि वे हत्यारों का पता लगा रहे हैं. दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
पानसरे को 16 फरवरी, 2015 को कोल्हापुर में गोली मारी गई थी और उसी साल 20 फरवरी को उनकी मौत हो गई थी.