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नफ़्ताली बेनेट इज़रायल के नए प्रधानमंत्री बने, बेंजामिन नेतान्याहू के 12 साल का कार्यकाल ख़त्म

संसद में बहुमत हासिल करने के बाद दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के 49 वर्षीय नेता नफ्ताली बेनेट ने बीते रविवार को शपथ ली. नई सरकार में 27 मंत्री हैं जिनमें से नौ महिलाएं हैं. बेनेट ने वतर्मान विदेश मंत्री याइर लापिद के साथ एक साझा सरकार के लिए सहमत हुए थे, जिसके तहत बेनेट 2023 तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में काम करेंगे, जिसके बाद लापिद 2025 तक यह भूमिका संभालेंगे.

नफ्ताली बेनेट. (फोटो: रॉयटर्स)

नफ्ताली बेनेट. (फोटो: रॉयटर्स)

यरुशलम: नफ्ताली बेनेट ने रविवार को इजरायल के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. इसके साथ ही 12 साल से प्रधानमंत्री पद पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू का कार्यकाल खत्म हो गया. नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले व्यक्ति हैं.

नेतान्याहू 1996 से 1999 और 2009 से 2021 तक इजरायल के प्रधानमंत्री रहे हैं. नेतन्याहू के बाद बेनेट देश के दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्म इजरायल की स्थापना के बाद हुआ है.

इसी के साथ पिछले दो वर्षों में चार बार चुनाव होने के बाद उत्पन्न हुए राजनीतिक संकट का भी समाधान हो गया. अब बेंजामिन नेतन्याहू विपक्ष में बैठेंगे.

संसद में बहुमत हासिल करने के बाद दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के 49 वर्षीय नेता बेनेट ने रविवार को शपथ ली. नई सरकार में 27 मंत्री हैं, जिनमें से नौ महिलाएं हैं. बेनेट 120 सदस्यीय सदन में 61 सांसदों के साथ मामूली बहुमत वाली सरकार का नेतृत्व करेंगे.

नेतान्याहू के प्रधानमंत्री रहते हुए बेनेट 2013 से 2015 तक अर्थव्यवस्था और धार्मिक सेवा मंत्री, 2013 से 2019 तक प्रवासी मामलों के मंत्री, 2015 से 2019 तक शिक्षा मंत्री और 2019 से 2020 तक रक्षा मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं.

नई सरकार, एक अरब गुट के साथ दक्षिणपंथी, वाम और केंद्रवाद जैसे  वैचारिक रूप से भिन्न राजनीतिक दलों का एक अभूतपूर्व गठबंधन है. इसे 120 सदस्यीय सदन में बहुत ही मामूली बहुमत मिला है.

इससे पहले बेनेट ने संसद में संबोधन के दौरान अपनी सरकार के मंत्रियों के नामों की घोषणा की और इस दौरान 71 वर्षीय नेतन्याहू के समर्थकों ने बाधा भी डाली.

प्रतिद्वंद्वी पार्टी के सांसदों के शोर-शराबे के बीच बेनेट ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह अलग-अलग विचार वाले लोगों के साथ काम करेंगे.

अति राष्ट्रवादी पार्टी के अध्यक्ष नफ्ताली बेनेट अगर इस पद पर बने रहना चाहते हैं तो उन्हें दक्षिणपंथी, वामपंथी और उदारवादी पार्टियों के भारी-भरकम गठबंधन को बरकरार रखना होगा.

सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होकर इतिहास रच रहे एक छोटे अरब गुट समेत आठ दल नेतन्याहू का विरोध करने और नए सिरे से चुनाव कराने के खिलाफ एकजुट हुए हैं लेकिन बहुत कम मुद्दों पर सहमत हैं. उनके एक मामूली एजेंडा पर आगे बढ़ने की संभावना है, जिसका मकसद फलस्तीनियों के साथ तनाव कम करने और बिना कोई बड़ी पहल शुरू किए अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बरकरार रखने का है.

भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे नेतन्याहू संसद में सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष बने हुए हैं और समझा जाता है कि नई सरकार का पुरजोर विरोध करेंगे. अगर एक भी गुट पीछे हटता है तो नई सरकार अपना बहुमत गंवा देगी और सरकार गिरने का जोखिम पैदा हो जाएगा, जिससे नेतन्याहू को सत्ता में लौटने का मौका मिल सकता है.

सत्तारूढ़ गठबंधन के पीछे की सबसे बड़ी ताकत याइर लापिद हैं. वह एक उदारवादी नेता हैं जो सरकार का कार्यकाल लंबा चलने की स्थिति में दो वर्षों में प्रधानमंत्री बन सकते हैं. लापिद को जिन्हें देश का विदेश मंत्री बनाया गया है.

2 जून 2021 को बेनेट ने याइर लापिद के साथ एक साझा सरकार के लिए सहमत हुए थे, जिसके तहत बेनेट 2023 तक इजरायल के प्रधानमंत्री के रूप में काम करेंगे, जिसके बाद लापिद 2025 तक यह भूमिका संभालेंगे.

येश एटिड पार्टी के प्रमुख लापिद सितंबर 2023 में बेनेट के साथ सत्ता-साझाकरण समझौते के तहत प्रधानमंत्री का पदभार संभालेंगे, जो कार्यकाल के अंत तक दो साल तक चलेगा.

नई सरकार उतार-चढ़ाव भरे दो वर्षों में चार बार चुनाव होने, पिछले महीने गाजा के साथ 11 दिन तक युद्ध चलने और देश की अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले कोरोना वायरस प्रकोप के बाद सामान्य हालातों का वादा कर रही है.

बता दें कि बीते महीने 11 दिन के खूनी संघर्ष में गाजापट्टी में बड़े पैमाने पर बर्बादी हुई थी, इजरायल के अधिकांश हिस्सों में जीवन थम गया था और दोनों तरफ के 200 से अधिक लोगों की जानें गई थीं. 19 मई तक इस संघर्ष में 208 फलस्तीनियों की मौत हो चुकी थी, जिनमें करीब 60 बच्चे शामिल हैं. वहीं इजरायल में भी दो बच्चों सहित 12 लोगों की जान गई थी.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने पर दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के नेता नफ्ताली बेनेट को सोमवार को बधाई दी तथा कहा कि वह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने के लिए उत्सुक हैं.

मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘इजरायल का प्रधानमंत्री बनने पर नफ्ताली बेनेट को बधाइयां. हम अगले साल अपने कूटनीतिक संबंधों के उन्नयन के 30 साल पूरे कर रहे हैं और इस अवसर पर मैं आपसे मुलाकात करने तथा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के लिए उत्सुक हूं.’

साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने सफल कार्यकाल की समाप्ति पर पूर्व प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सराहना की और भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी पर निजी तौर पर ध्यान देने के लिए उनके नेतृत्व के प्रति आभार जताया.

इजरायल के प्रधानमंत्री के बेनेट के आधिकारिक ट्विटर हैंडल की ओर से कहा गया, ‘धन्यवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. मैं दो लोकतंत्रों के बीच अद्वितीय और मधुर संबंधों को और विकसित करने के लिए आपके साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं.’

प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री लापिद ने भी कहा कि इजरायल की नई सरकार भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगी.

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बधाई संदेश के जवाब में लापिद ने सोमवार को ट्वीट किया, ‘मैं अपने देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं और जल्द ही इजरायल में आपका स्वागत करने की उम्मीद करता हूं.’

इजरायल के नए नेता नफ्ताली बेनेट

पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कभी बेहद करीबी रहे बेनेट ने उनकी गलत नीतियों का विरोध कर आज यह मकाम हासिल किया है.

बेनेट एक धर्मपरायण यहूदी हैं. पुनर्वास आंदोलन के अगुआ रहे बेनेट तेल अवीव उपनगर में रहते हैं.

वह बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी रहे हैं. नेतन्याहू के 12 साल के शासन को खत्म करने के लिए बेनेट ने मध्य और वाम धड़े के दलों से हाथ मिलाया है.

उनकी घोर राष्ट्रवादी यामिना पार्टी ने मार्च में हुए चुनाव में 120 सदस्यीय नेसेट (इजरायल की संसद) में महज सात सीटें जीती थीं, लेकिन उन्होंने नेतन्याहू या अपने विरोधियों के आगे घुटने नहीं टेके और ‘किंगमेकर’ बन कर उभरे. अपनी धार्मिक राष्ट्रवादी पार्टी से एक सदस्य के पार्टी छोड़ने के बावजूद आज सत्ता का ताज उनके सिर पर है.

बेनेट लंबे समय तक नेतन्याहू का दाहिना हाथ रहे. लेकिन वह उनके गठबंधन के तौर तरीकों से नाखुश थे. संसद में कम बहुमत के बावजूद वह दक्षिणपंथी, वामपंथी और मध्यमार्गी दलों के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने में सफल रहे और इस वजह से आगे उनके लिए रास्ता आसान नहीं होगा.

बेनेट फलस्तीनी स्वतंत्रता के विरोधी हैं और वह कब्जे वाले वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में यहूदी बस्तियों के घोर समर्थक हैं, जिसे फलस्तीनी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई देश शांति की प्रक्रिया में बड़ा अवरोधक मानते हैं.

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के दबाव में आकर बस्तियों के निर्माण कार्य को धीमा करने के नेतन्याहू के कदम का बेनेट ने जबरदस्त विरोध किया था. हालांकि अपने पहले कार्यकाल में ओबामा शांति प्रक्रिया बहाल करने में नाकाम रहे थे.

इजरायल इंस्टिट्यूट इंस्टीट्यूट के प्रमुख योहानन प्लेज्नर ने कहा, ‘वह एक दक्षिणपंथी नेता हैं, सुरक्षा को लेकर सख्त हैं, लेकिन वह एक व्यवहारिक सोच रखने वाले नेता हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)