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एंटीलिया विस्फोटक मामला: एनआईए ने सचिन वझे समेत 10 के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल की, यूएपीए भी लगाया

बीते 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक से लदी एसयूवी कार मिली थी. इसके दस दिन बाद कार के मालिक और कारोबारी मनसुख हिरेन का शव ठाणे में मिला था. हिरेन की पत्नी ने मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वझे पर पति की संदिग्ध मौत मामले में संलिप्त होने के आरोप लगाया था. बर्ख़ास्त वझे पर यूएपीए की धाराएं भी लगाई गई हैं.

मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी सचिन वझे. (फोटो: पीटीआई)

मुंबईः राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास एसयूवी कार में कथित तौर पर विस्फोटक रखने और व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में शुक्रवार को चार्जशीट दाखिल की है. ठाणे निवासी मनसुख हिरेन इस एसयूवी का उपयोग कर रहे थे और उन्होंने इसकी चोरी होने की सूचना दी थी.

बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वझे, सेवानिवृत्त एसीपी प्रदीप शर्मा समेत 10 लोगों के खिलाफ अदालत में यह चार्जशीट दायर की गई है. इसमें यूएपीए के तहत भी आरोप लगाए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 9,000 से अधिक पेजों की इस चार्जशीट में बर्खास्त मुंबई पुलिस अधिकारी सुनील माने, रियाजुद्दीन काजी, विनायक शिंदे और इस साजिश में कथित तौर पर शामिल अन्य लोगों संतोष शेलार, नरेश गोर, आनंद जाधव, मनीष सोनी और सतीश मोठकुरी के नाम भी शामिल हैं.

चार्जशीट में यूएपीए की धारा 20 को भी शामिल किया गया है, जो किसी आतंकी संगठन की सदस्यता से जुड़ा हुआ है. इसके साथ ही यूएपीए की अन्य धाराएं 16 (आतंकी कृत्य) और धारा 18 (षड्यंत्र) भी लगाई गई हैं.

एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कथित षड्यंत्र में हर आरोपी की भूमिका के आधार पर उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि कुछ आरोपियों के खिलाफ उनकी भूमिका के आधार पर यूएपीए नहीं लगाया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 120बी (आपराधिक साजिश) और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए हैं.

चार्जशीट में 200 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं, जिनमें कई पुलिसकर्मी, हिरेन के परिवार के सदस्य और 20 ऐसे गवाहों के बयान हैं, जिन्हें पुलिस ने सुरक्षा दी है. इसमें सीसीटीवी फुटेज, कॉल डेटा रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफों में पेश किया गया.

एनआईए ने इस हफ्ते अदालत के समक्ष अन्य आवेदन भी दायर किए, जिनमें गवाहों के लिए सुरक्षा की मांग, जांच जारी रखने की अनुमति और न्यायिक हिरासत में मौजूद आरोपियों को चार्जशीट सौंपना शामिल है.

यह मामला एक आतंकी संगठन से कथित तौर पर धमकी भरा पत्र मिलने और 25 फरवरी को मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास स्कॉर्पियो एसयूवी के भीतर जिलेटिन की 20 छड़े मिलने से जुड़ा हुआ है. इस घटना के दस दिन बाद व्यवसायी मनसुख हिरेन का शव कलवा खाड़ी के पास बरामद किया गया था.

इस मामले की सबसे पहले जांच वझे की अगुवाई में क्राइम ब्रांच यूनिट ने की थी और बाद में इस मामले को महाराष्ट्र आतंकरोधी दस्ते (एटीएस) और फिर एनआईए को सौंपा गया.

रिपोर्ट के अनुसार, एनआईए ने मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मार्च को वझे की है. वझे मामले के मुख्य साजिशकर्ता हैं, जो कथित तौर पर साजिश के हर पहलू में शामिल थे.

एनआईए द्वारा मामले में इकट्ठा किए गए सबूतों में एसयूवी में विस्फोटक रखने से कुछ दिन पहले दक्षिण मुंबई में हिरेन के साथ वझे की मीटिंग की फुटेज भी शामिल हैं.

एनआईए का दावा है कि वझे ही एसयूवी चला रहे थे और उन्होंने ही एंटीलिया के पास इसे पार्क किया था और वह हिरेन की हत्या में शामिल थे.

मामले में एनआईए ने कलवा स्टेशन (ठाणे) पर रूमाल बेचने वाले एक वेंडर का बयान भी दर्ज किया था और कलवा खाड़ी के पास बर्खास्त मुंबई पुलिस अधिकारी सुनील माने की मौजूदगी साबित करने के लिए उनके कॉल डेटा रिकॉर्ड हासिल किए.

एनआईए के मुताबिक, माने ने ‘अधिकारी तावड़े’ बनकर हिरेन से संपर्क किया. इसके बाद माने, हिरेन को अन्य कार में ले गया, जहां उन्होंने गला दबाकर हिरेन की हत्या कर दी.

एनआईए के मुताबिक, जिस समय हिरेन की हत्या की गई. वहां अन्य चार आरोपी सतीश मोठकुरी, मनीष सोनी, आनंद जाधव और संतोष शेलार मौजूद थे.

एनआईए के मुताबिक, आरोपी नरेश गोर की मदद सिम कार्ड लेने में की गई, जिन्हें विनायक शिंदे के जरिये सचिन वझे और अन्य तक पहुंचाया गया.

एनआईए का दावा है कि  इस साजिश में प्रदीप शर्मा भी वझे से मिला हुआ था. दोनों के कॉल डेटा रिकॉर्ड से साबित होता है कि सह-आरोपी दोनों के संपर्क में थे. रियाजुद्दीन काजी साक्ष्यों को नष्ट करने में वझे के साथ शामिल था.

हिरेन की पत्नी ने भी मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वझे पर पति की संदिग्ध मौत मामले में संलिप्त होने के आरोप लगाया था. इसके बाद इसी साल मार्च में वझे को मुंबई अपराध शाखा से हटा दिया गया था.

इस मामले के उजागर होने पर महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार को शर्मिंदा होना पड़ा था. विपक्षी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सबसे पहले मामले में वझे की संलिप्तता का आरोप लगाया था. इसके बाद मामले की जांच सरकार को मजबूरन एटीएस और फिर एनआईए को सौंपना पड़ा.

इस मामले में ही मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी. उन्होंने फिर एक पत्र लिखकर महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिसके बाद एफआईआर दर्ज करनी पड़ी थी. एनआईए ने भी अपनी जांच के दौरान मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह को पूछताछ के लिए तलब किया था.

परमबीर सिंह ने पुलिस आयुक्त पद से 17 मार्च को अपने तबादले के तीन दिन बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारी सचिन वझे को बार और रेस्तराओं से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने को कहा था.