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धनबाद न्यायाधीश उत्तम आनंद को ऑटो चालक ने जान-बूझकर टक्कर मारी थी: सीबीआई

धनबाद के अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी न्यायिक अधिकारी की हत्या की गई है. इस घटना से न्यायिक अधिकारियों का मनोबल कम हुआ है और अगर इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा नहीं किया गया तो यह न्यायिक व्यवस्था के लिए सही नहीं होगा.

जज उत्तम आनंद.

रांची: धनबाद के न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बीते बृहस्पतिवार को झारखंड हाईकोर्ट को बताया कि ऑटो चालक ने जान-बूझकर उन्हें (न्यायाधीश) टक्कर मारी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी.

हाईकोर्ट में उपस्थित हुए के सीबीआई के संयुक्त निदेशक शरद अग्रवाल ने अदालत को यह जानकारी दी और कहा कि इस घटना के पीछे षड्यंत्र की जांच जारी है.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.

अदालत के आदेश पर सीबीआई के संयुक्त निदेशक बृहस्पतिवार को पीठ के समक्ष उपस्थित हुए. उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि अब तक की जांच से पता चला है कि ऑटो चालक ने न्यायाधीश को जान-बूझकर टक्कर मारी थी और यह कोई हादसा नहीं था.

उन्होंने कहा कि घटना के पीछे के षड्यंत्र की जांच की जा रही है.

धनबाद के 49 वर्षीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद बीते 28 जुलाई की सुबह टहलने निकले थे, जब रणधीर वर्मा चौक टहलने निकले थे, जब रणधीर चौक के पास एक ऑटो रिक्शा उनकी ओर मुड़ा, उन्हें पीछे से टक्कर मारी और भाग गया.

पहले इस घटना को हिट एंड रन केस माना जा रहा था, लेकिन घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पता चला कि ऑटो रिक्शा चालक ने कथित तौर पर जान-बूझकर जज को टक्कर मारी थी.

सीबीआई के जोनल संयुक्त निदेशक शरद अग्रवाल ने हाईकोर्ट में बताया कि उनकी मौत दुर्घटनावश नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि घटना के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के लिए एजेंसी के अधिकारी चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं.

अदालत ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी न्यायिक अधिकारी की हत्या की गई है. इसने कहा कि इस घटना से न्यायिक अधिकारियों का मनोबल कम हुआ है और अगर इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा नहीं किया गया तो यह न्यायिक व्यवस्था के लिए सही नहीं होगा.

सीबीआई के संयुक्त निदेशक ने अदालत को बताया कि सीसीटीवी फुटेज में दिखने वाले कई लोगों से पूछताछ की गई है और गिरफ्तार लखन शर्मा मोबाइल चोर है.

उन्होंने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति (लखन शर्मा) बार-बार अपना बयान बदल रहा है, लेकिन सीबीआई के अधिकारी उससे कड़ाई से पूछताछ कर रहे हैं और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है.

30 जुलाई को शीर्ष अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया था और जांच पर झारखंड के मुख्य सचिव और डीजीपी से एक सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट मांगी थी और कहा था कि खबरें और वीडियो क्लिप से संकेत मिलता है कि ‘यह साधारण सड़क दुर्घटना का मामला नहीं था.’

जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत मामले में गिरफ्तार ऑटो चालक लखन कुमार वर्मा धनबाद के सुनार पट्टी का रहने वाला है, जबकि दूसरा आरोपित राहुल वर्मा भी स्थानीय निवासी है.

लखन कुमार वर्मा ने स्वीकार किया है कि घटना के वक्त ऑटो वही चला रहा था. उसकी गिरफ्तारी गिरिडीह से हुई, जबकि दूसरे आरोपित राहुल वर्मा की गिरफ्तारी धनबाद स्टेशन से हुई.

दोनों को घटना के अगले दिन बीते 29 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था.

पुलिस ने शुरू में न्यायाधीश की मौत के मामले की जांच शुरू की थी. धनबाद के एसएसपी और डीजीपी ने अदालत को त्वरित जांच का आश्वासन दिया था, हालांकि बीते 31 जुलाई को झारखंड सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी.

इसके बाद सीबीआई ने बीते चार अगस्त को इस मामले की जांच कर रही है और हाईकोर्ट जांच में प्रगति की निगरानी कर रहा है. केंद्रीय एजेंसी मामले की जांच की स्थिति पर अदालत को सीलबंद रिपोर्ट सौंपती रही है.

इस महीने की शुरुआत में मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि घटना के पांच सप्ताह बाद भी तीन संदिग्धों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है, जबकि सीसीटीवी फुटेज में वे स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, यह निराशाजनक है.

बीते अगस्त माह में सीबीआई द्वारा जांच अपने हाथ में लेने के बाद पहली बार इस मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने जांच का उचित अपडेट नहीं दे पाने के लिए एजेंसी के जांच अधिकारी की खिंचाई करते हुए कहा था कि उन्हें विवरण के साथ मामले की पूरी जानकारी होनी चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)