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यूपी: बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ संगठनों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री से ख़ाली पदों पर नियुक्ति की मांग

उत्तर प्रदेश में बढ़ रही बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ बीते 24 सितंबर को विभिन्न छात्रों और युवा संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन किया. प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि वे अगले साल राज्य में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले ‘छात्र युवा रोज़गार अधिकार मोर्चा’ के तहत राज्य में बेरोज़गारी और निजीकरण के ख़िलाफ़ आंदोलन को और तेज़ करेंगे.

लखनऊ में रोजगार अधिकार सम्मेलन. (फोटोः असद रिज़वी)

लखनऊः देश में सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में बढ़ रही बेरोजगारी के खिलाफ बीते 24 सितंबर को विभिन्न छात्रों और युवा संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन किया.

इसके तहत योगी आदित्यनाथ सरकार से राज्य की 25 लाख पदों पर नियुक्तियां करने की मांग की गई.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि वे अगले साल राज्य में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले ‘छात्र युवा रोजगार अधिकार मोर्चा’ के तहत राज्य में बेरोजगारी और निजीकरण के खिलाफ आंदोलन को और तेज करेंगे.

युवा संगठन ने 24 सितंबर को लखनऊ में रोजगार अधिकार सम्मेलन के नाम से इस आंदोलन की शुरुआत की.

इस सम्मेलन में विपक्ष के कई नेताओं ने भाग लिया और मांग की कि भाजपा सरकार ‘गरिमा के साथ रोजगार’ को हर शिक्षित युवा के लिए ‘मौलिक अधिकार’ घोषित करे.

बिहार से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) विधायक मनोज मंजिल ने सामाजिक आंदोलनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की दमनकारी नीतियों की आलोचना की.

उन्होंने कहा, ‘राज्य में रोजगार संकट दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है. देश में कुल बेरोजगार युवाओं में से 10 फीसदी यूपी से है. कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां चली गई थीं.’

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक सदफ जफर ने आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा, ‘अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ युवाओं के मुद्दे सुलझाने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए.’

जफर ने कहा, ‘सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को बेचकर पैसों की व्यवस्था कर रही है और इस धनराशि को सेंट्रल विस्टा जैसे अनुपयोगी परियोजनाओं में खर्च कर रही है.’

उन्होंने आग्रह किया कि सभी विपक्षी दलों को छात्र-युवा आंदोलन के समर्थन में एक साथ एक मंच पर आना चाहिए.

वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता प्रो. डीएनएस यादव ने नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘यह देश के युवाओं का मौलिक अधिकार है कि वे रोजगार को लेकर लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार से सवाल करें.’

आप नेता ने कहा, ‘बेरोजगारी का आंकड़ा छिपाने के लिए श्रम मंत्रालय ने अपने रोजगार सर्वेक्षण को बंद कर दिया है और अब सरकार को देश में बेरोजगारी को लेकर कोई अंदाजा नहीं है.’

आजाद समाज पार्टी के कमलेश भारती ने कहा कि सरकार और कॉरपोरेट के बीच सांठगांठ से देश में बेरोजगारी का संकट गहरा गया है.

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारें सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं.

राष्ट्रीय लोकदल के नेता अंबुज पटेल ने आशंका जताई कि भाजपा बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन को कमजोर करने के लिए हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच दरार पैदा कर सकती है.

उन्होंने युवाओं से किसी तरह के सांप्रदायिक और जातिवादी मुद्दों में शामिल नहीं होने और रोजगार और शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाने को कहा.

छात्रों को संबोधित करते हुए प्रख्यात आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा, ‘रोजगार के लिए आंदोलन देश बचाने की जंग है.’

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य से लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक में गिरावट आई है. कॉरपोरेट्स ने हमारे मिश्रित अर्थव्यवस्था के सपने को बर्बाद कर दिया है.

कार्यक्रम में शामिल पूर्व आईएएस सूर्यप्रताप सिंह ने कहा, ‘यह आंदोलन सरकार बदलने के नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य के लिए है. अगर नई सरकारें भी छात्रों और युवाओं की समस्याओं से आंख मूंद लेगी, तब भी इस तरह के आंदोलन जारी रहेंगे.’

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के अध्यक्ष एन. साई बालाजी ने किसान आंदोलन को समर्थन देने का आह्वान करते हुए कहा, ‘हम भी किसान संघों द्वारा 27 सितंबर को आहूत भारत बंद का समर्थन करते हैं.’

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके बालाजी के अनुसार, आंदोलन के अगले चरण में राज्य में एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा.

बालाजी के मुताबिक, ‘बेरोजगारी की वजह से देश में आत्महत्याओं के मामले 2016 की तुलना में 2019 में 24 फीसदी बढ़े हैं.’

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के इस बयान को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी दर में नाटकीय रूप से गिरावट आई है. उन्होंने मांग की कि सरकार बेरोजगारी के आंकड़ों को रोकना बंद करे और राज्य में इस संकट को स्वीकार करे.

खाली पड़े पद

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक पद खाली पड़े हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस में 4,15,315 स्वीकृत पदों के मुकाबले 1,11,865 पद खाली पड़े हैं.

गणना के अनुसार, राज्य में अभी भी लगभग 25 लाख पदों पर भर्तियां की जानी बाकी हैं. बालाजी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार को इन खाली पदों के लिए तुरंत भर्तियां शुरू करना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके इन पदों पर भर्ती प्रक्रियाओं को पूरा करना चाहिए. 

उन्होंने कहा, ‘भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले 70 लाख नौकरियां देने का वादा किया था, जबकि अब तक सिर्फ 4,00,000 रोजगार ही उपलब्ध करा सकी है.’

उन्होंने कहा कि लेकिन सरकार वह सूची उपलब्ध नहीं करा पाई है, जिससे पता चले कि ये नौकरियां किन-किन को मुहैया कराई गई हैं.

बालाजी ने कहा कि भाजपा रोजगार में सामाजिक न्याय को भी कुचल रही है और इसका हालिया उदाहरण कथित शिक्षक भर्ती घोटाला है.

बता दें कि पूरे राज्य में इस आंदोलन को और तेज करने के लिए विभिन्न छात्रों और युवा संगठनों से 10,000 स्वयंसेवियों को ‘छात्र युवा रोजगार अधिकार मोर्चा’ में शामिल किया जाएगा और इसके तहत 20 से 30 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न शहरों में रैली का आयोजन किया जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)