भारत

यशवंत सिन्हा के जवाब में राजनाथ बोले, भारत सबसे तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था: राजनाथ

चिदंबरम ने कहा, सरकार आर्थिक गिरावट को लेकर बेखबर, अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी रखने वाले और उद्योग जगत के लोग भयभीत हुए बिना बोलें.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह (फोटो: पीटीआई)

गृह मंत्री राजनाथ सिंह (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा की ओर से मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की तीखी आलोचना किए जाने को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय फलक पर भारत की विसनीयता स्थापित हुई है.

दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि उद्योगों सहित सभी लोगों, विशेषकर अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी रखने वालों से मेरी अपील है कि वे भयभीत हुए बिना बोले एवं लिखें, डर छोड़ दें. अर्थव्यवस्था की हालत पर सिन्हा के बयान से जुड़े एक सवाल के जवाब में वर्तमान गृह मंत्री राजनाथ ने कहा कि किसी को देश के बारे में इन तथ्यों को नहीं भूलना चाहिए.

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, पूरी दुनिया स्वीकार करती है कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. किसी को यह तथ्य नहीं भूलना चाहिए. अर्थव्यवस्था के मामले में अंतरराष्ट्रीय फलक पर भारत की विश्वसनीयता स्थापित हुई है.

एक अंग्रेजी अखबार में लिखे गए आलेख में सिन्हा ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क कर दिया है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली राजग सरकार में वित्त मंत्री रह चुके सिन्हा ने दावा किया कि अगले लोकसभा चुनाव तक अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने की संभावना नहीं के बराबर है.

सभी को खुलकर बोलना चाहिए : चिदंबरम

देश में अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति को लेकर तीखा प्रहार करते हुए कांग्रेस के नेता पी चिदंबरम ने कहा कि उद्योगों सहित मेरी आप सभी विशेषकर अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों से अपील है कि वे भयभीत हुए बिना बोले एवं लिखें. डर छोड़ दें.

चिदंबरम ने कहा, सरकार आर्थिक गिरावट को लेकर बेखबर है तथा यशवन्त सिन्हा ने इस बारे में जो कहा है, वह कांग्रेस पिछले काफी समय से कहती आई है. पार्टी ने कहा कि उद्योगों सहित सभी क्षेत्र के लोगों को अर्थव्यवस्था के इस हालात के बारे में खुलकर बोलना चाहिए.

चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, हम जब अर्थव्यवस्था के बारे में बोलते थे तो हमसे चुप हो जाने को कहा जाता था किंतु सरकार ने जो घातक रास्ता चुना है उसके बारे में कांग्रेस खुलकर बोलती रहेगी.

देश में भय का माहौल

चिदंबरम ने कहा, हम इस बात से प्रसन्न हैं कि यशवंत सिन्हा ने सत्य बोला और अर्थव्यवस्था के बारे में हमारे विचारों को दोहराया. उन्होंने यह भी दावा किया कि सिन्हा के विचार भाजपा एवं अन्य दलों के सांसदों से भिन्न नहीं हैं जो वे हमें पिछले कई महीनों से निजी तौर पर बता रहे हैं या कानाफूसी कर रहे हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह हमारे दौर की दुखद बात है कि सांसद जो अपने आसपास देख या सुन रहे हैं, विशेषकर अपने निर्वाचन क्षेत्रों में, उसे कहने से वे भयभीत हैं. इसके बावजूद हम अपने को मुक्त देश कहते हैं.

उन्होंने देश में भय के माहौल की चर्चा करते हुए कहा कि जीएसटी के कारण न केवल छोटे एवं मझोले उद्योग बंद हो रहे हैं बल्कि बड़े उद्योगों को भी इसका प्रतिकूल प्रभाव समझ आने लगा है.

सरकार नारों के पीछे कब तक छुपेगी

चिदंबरम ने कहा, मैं पूछना चाहता कि सरकार प्रधानमंत्री के बयानों एवं पार्टी के नारों के पीछे कब तक छिपी रहेगी. यह एक छोटी सी दया की बात है कि हम अब यह नारा नहीं सुनते, अच्छे दिन आने वाले हैं. मैं जब देश में दौरा करता हूं तो यह सुनने को मिलता है, अच्छे दिन तो आए नहीं, ये बुरे दिन कब जाएंगे.

उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी पिछले करीब 18 माह से अर्थव्यवस्था की भीषण कमजोरियों को उजागर करती रही है. इसके बदले हमसे चुप रहने को कहा जाता है. सबसे पहले आवाज उठाने वाले हम थे. हम चुप नहीं हुए और हम चुप नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को सरकार जिस घातक रास्ते पर ले जा रही है, उसके बारे में कांग्रेस पार्टी साहसपूर्ण स्वरों में बोलती रहेगी.

आम आदमी बदहाल, उद्योगपति मालामाल: सिसोदिया

दिल्ली के वित्त मंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया ने वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा द्वारा अर्थव्यवस्था की जर्जर हालत पर जताई गई चिंता को जायज ठहराते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति से आम आदमी बदहाल और चुनिंदा उद्योगपति मालामाल हो रहे हैं.

सिसोदिया ने आज बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अर्थव्यवस्था की बदहाली को जीडीपी, निवेश और रोजगार सृजन के तीन मानकों से समझा जा सकता है. उन्होंने आंकड़ों के हवाले से कहा कि साल 2014 के बाद अर्थव्यवस्था में जीडीपी 9.1 से गिरकर अपने न्यूनतम स्तर 5.1 प्रतिशत पर आ गई है.

अर्थव्यवस्था जर्जर हो चुकी है

सिसोदिया ने कहा, अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र का निवेश पिछले 25 सालों में 5.7 लाख करोड़ रुपये से घटकर अपने न्यूनतम स्तर 2.07 लाख करोड़ रुपये पर रह गया. इसके अलावा सालाना रोजगार सृजन भी हर साल 1.2 करोड़ रोजगार के अवसरों की मांग की तुलना में न्यूनतम स्तर पर है.

सिसोदिया ने कहा कि नोटबंदी में 15 लाख लोगों की नौकरियां जाने और दुनिया के सबसे जटिल जीएसटी तंत्र में कर की 28 प्रतिशत तक ऊंची दर से आयकर वसूली में गिरावट ने अर्थव्यवस्था को जर्जर बना दिया.

उन्होंने दलील दी कि इसका सीधा असर आम आदमी की गुजर बसर पर पड़ा है. इसके अलावा केंद्र सरकार ने आयकर कानून में संशोधन कर संदेह या अफवाह मात्र के आधार पर आयकर अधिकारियों को कारोबारी प्रतिष्ठानों पर छापेमारी का अधिकार दे दिया और इस तरह रेड राज को बढ़ावा देते हुए छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है.

सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था सबसे तेज गिर रही है

सिसोदिया ने मोदी सरकार द्वारा आर्थिक नीतियां बनाने में देश के शीर्ष आर्थिक विशेषज्ञों को दरकिनार कर उद्योगपतियों को शामिल करने को अर्थतंत्र की बदहाली का मुख्य कारण बताया. उन्होंने कहा कि जाने माने अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले साल अर्थव्यवस्था को लेकर जो चिंता जताई थी वह आज हकीकत के रूप में सामने आ गई है. इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अब भाजपा सरकार के पूर्व वित्त मंत्री सिन्हा को भी बदहाल आर्थिक भविष्य की चेतावनी देनी पड़ी है.

सिसोदिया ने कहा कि साल 2014 तक सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था का अब सबसे तेजी से नीचे को गिरती अर्थव्यवस्था में तब्दील होना कहीं किसी बड़ी गड़बड़ी का स्पष्ट संकेत है. उन्होंने मोदी सरकार को देश हित में उद्योगपतियों के बजाय आम जनता के हित में सबकी बात सुनने की सलाह दी.