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मुलायम, मायावती या कांग्रेस ने यूपी में किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया: पासवान

अपना दल (सोनेलाल) के नेता सोनेलाल पटेल की 69वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा, ‘एक बार बिहार में मुझे मौका मिला. मैंने मुसलमान मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की लेकिन लालू यादव, राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे.’

सोनेलाल पटेल की 69वीं जयंती में शामिल होने पहुंचे रामविलास पासवान (फोटो: फेसबुक)

सोनेलाल पटेल की 69वीं जयंती में शामिल होने पहुंचे रामविलास पासवान (फोटो: फेसबुक)

लखनऊ: केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने विरोधी राजनीतिक दलों को आड़े हाथ लेते हुए उनसे सवाल किया कि उन्होंने किसी मुसलमान को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया.

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पासवान ने कहा कि विरोधी दल मुसलमानों की बात करते हैं. ‘क्या मुसलमान बंधुआ मजदूर हैं कि वे केवल मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, मायावती या कांग्रेस को ही वोट देंगे. उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की बहुत बड़ी आबादी है इसलिए ऐसे राजनीतिक दल केवल मुसलमानों का वोट चाहते हैं. ऐसा क्यों है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री नहीं बनाया. ऐसा बिहार में क्यों नहीं हुआ.’

पासवान अपना दल (सोनेलाल) के नेता सोनेलाल पटेल की 69वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा, ‘एक बार बिहार में मुझे मौका मिला. मैंने मुसलमान मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की लेकिन लालू यादव, राबडी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे.’

पासवान ने कहा, ‘मैं मुसलमानों को बताना चाहता हूं कि आपको भाजपा का भय दिखाया जा रहा है, आपको स्पष्ट समझना चाहिए कि आप बंधुआ मजदूर हैं. आप सरकार के समक्ष अपना नजरिया रखें और उसके बाद किसी दल के बारे में तय करें. क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कभी कहा कि राम मंदिर कहां बनेगा. मामला अभी भी अदालत में लंबित है.’

उन्होंने कहा कि हर पार्टी का अपना नजरिया होता है लेकिन सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम के अनुसार चलती है. जब भाजपा 2014 में सत्ता में आई तो रामविलास पासवान या अनुप्रिया पटेल को केंद्रीय मंत्री बनाने की क्या जरूरत थी. यह एक संकेत था कि हम सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

उन्होंने जनता का आह्वान किया कि वे एकजुट होकर 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कमर कस लें.

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