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बढ़ते एनपीए पर जानकारी के लिए संसदीय समिति ने रघुराम राजन को बुलाया

भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कई मौकों पर नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की है. राजन ने कहा था कि नोटबंदी पर सोच-समझकर फैसला नहीं लिया गया.

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (फोटो: पीटीआई)

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बढ़ती हुई गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के मुद्दे पर अध्ययन कर रही संसद की एक समिति ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को उसके सामने उपस्थित होने और इस विषय पर जानकारी देने के लिए कहा है.

इससे पहले पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यम ने एनपीए संकट को पहचानने और इसका हल निकालने का प्रयास करने के लिए बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली संसद की प्राक्कलन समिति के सामने राजन की प्रशंसा की थी.

एक सूत्र ने कहा कि इसके बाद जोशी ने राजन को पत्र लिखकर समिति के सामने उपस्थित होने और उसके सदस्यों को देश में बढ़ते एनपीए के मुद्दे पर जानकारी देने को कहा है.

बता दें कि सितंबर 2016 तक तीन साल आरबीआई के गवर्नर रहे राजन फिलहाल शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में वित्त मामलों के प्रोफेसर हैं. एक सूत्र ने कहा कि सुब्रमण्यम ने एनपीए की समस्या की पहचान के लिए राजन की तारीफ की थी जिसके बाद उन्हें पत्र लिखकर आमंत्रित किया गया है.

सुब्रमण्यम ने पिछले महीने सीईए के नाते समिति के सामने बड़े कर्जों की भरपाई नहीं होने के मुद्दे पर जानकारी रखी थी.

बता दें कि रघुराम राजन ने कई मौकों पर नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की है. राजन ने कहा था कि नोटबंदी पर सोच-समझकर फैसला नहीं लिया गया. वहीं जीएसटी पर उन्होंने कहा था कि इसका क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जा सकता था.

रघुराम राजन ने 31 अक्टूबर, 2015 को आईआईटी दिल्ली में एक व्याख्यान में देश में बढ़ती असहिष्णुता संबंधी बात कही थी. इसे लेकर काफी विवाद हुआ था. इस व्याख्यान से पहले गोमांस खाने के संदेह में एक मुस्लिम को पीट-पीटकर हत्या करने की घटना हुई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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