जीडी अग्रवाल के जीवित रहते मोदी ने उनके पत्र का नहीं दिया जवाब, अब दे रहे हैं श्रद्धांजलि

पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने छोटे भाई के रूप में संबोधित करते हुए गंगा सफाई के लिए तीन बार पत्र लिखा था. लेकिन उन्हें एक भी पत्र का कोई जवाब नहीं मिला.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल. (फोटो: पीटीआई)

पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने छोटे भाई के रूप में संबोधित करते हुए गंगा सफाई के लिए तीन बार पत्र लिखा था. लेकिन उन्हें एक भी पत्र का कोई जवाब नहीं मिला.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल. (फोटो: पीटीआई)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना छोटा भाई संबोधित करते हुए गंगा की सफाई और उसे ‘अविरल’ बनाने के लिए तीन बार पत्र लिखा था. लेकिन उन्हें एक भी पत्र का कोई जवाब नहीं मिला था. अब जीडी अग्रवाल के निधन के बाद के नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजली दी है.

उन्होंने लिखा, ‘श्री जीडी अग्रवाल जी के निधन से दुखी हूं. शिक्षा, पर्यावरण की रक्षा, विशेष रूप से गंगा सफाई की दिशा में उनकी कोशिशों को हमेशा याद किया जाएगा. मेरी संवेदनाएं.’

सोशल मीडिया पर कई लोग इस बात को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि उनके जीते हुए नरेंद्र मोदी ने उनकी बातों को नहीं सुना और न ही किसी पत्र का जवाब दिया और अब उनके निधन पर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं.

पिछले 22 जून 2018 से अग्रवाल गंगा सफाई की मांग को लेकर ‘आमरण अनशन’ पर बैठे हुए थे. इस बीच उन्होंने प्रधानमंत्री को कई पत्र लिखें लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

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अग्रवाल 112 दिनों तक अनशन पर बैठे थे. बीते 9 अक्टूबर से उन्होंने पानी पीना भी बंद कर दिया था. अग्रवाल ने मोदी को लिखे पत्र में इस बात का भी जिक्र किया था कि वे आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं और जब तक गंगा को अविरल बनाने के लिए हल नहीं निकाला जाता है, तब तक वे अपना अनशन जारी रखेंगे.

अनशन के दौरान जीडी अग्रवाल ने कहा था, ‘हमने प्रधानमंत्री कार्यालय और जल संसाधन मंत्रालय को कई सारे पत्र लिखा था, लेकिन किसी ने भी जवाब देने की जहमत नहीं उठाई. मैं पिछले 109 दिनों से अनशन पर हूं और अब मैंने निर्णय लिया है कि इस तपस्या को और आगे ले जाऊंगा और अपने जीवन को गंगा नदी के लिए बलिदान कर दूंगा. मेरी मौत के साथ मेरे अनशन का अंत होगा.’

जीडी अग्रवाल गंगा को अविरल बनाने के लिए लगातार कोशिश करते रहे. उनकी मांग थी कि गंगा और इसकी सह-नदियों के आस-पास बन रहे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण को बंद किया जाए और गंगा संरक्षण प्रबंधन अधिनियम को लागू किया जाए.

मुख्य रूप से उनकी ये चार मांगे थीं…

1. गंगा जी के लिये गंगा-महासभा द्वारा प्रस्तावित अधिनियम ड्राफ्ट 2012 पर तुरन्त संसद द्वारा चर्चा कराकर पास कराना (इस ड्राफ्ट के प्रस्तावकों में मैं, एडवोकेट एम. सी. मेहता और डा. परितोष त्यागी शामिल थे ), ऐसा न हो सकने पर उस ड्राफ्ट के अध्याय–1 (धारा 1 से धारा 9) को राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा तुरन्त लागू और प्रभावी करना.

2. उपरोक्त के अन्तर्गत अलकनन्दा, धौलीगंगा, नन्दाकिनी, पिण्डर तथा मन्दाकिनी पर सभी निर्माणाधीन/प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना तुरन्त निरस्त करना और गंगाजी एवं गंगाजी की सहायक नदियों पर सभी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं को भी निरस्त किया जाए.

3. उपरोक्त ड्राफ्ट अधिनियम की धारा 4 (डी) वन कटान तथा 4(एफ) खनन, 4 (जी) किसी भी प्रकार की खुदान पर पूर्ण रोक तुरंत लागू कराना, विशेष रुप से हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में.

4. एक गंगा-भक्त परिषद का प्रोविजिनल (Provisional) गठन, (जून 2019 तक के लिए). इसमें आपके द्वारा नामांकित 20 सदस्य, जो गंगा जी और केवल गंगा जी के हित में काम करने की शपथ गंगा जी में खड़े होकर लें और गंगा से जुड़े सभी विषयों पर इसका मत निर्णायक माना जाए.

पहला पत्र उन्होंने उत्तरकाशी से 24 फरवरी 2018 को लिखा था, जिसमें वे गंगा की बिगड़ती स्थिति के साथ प्रधानमंत्री को साल 2014 में किए गए उनके उस वादे की याद दिलाते हैं जब बनारस में उन्होंने कहा था कि ‘मुझे मां गंगा ने बुलाया है.’

इसके बाद दूसरा पत्र उन्होंने हरिद्वार के कनखाल से 13 जून 2018 को लिखा. इसमें जीडी अग्रवाल ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि उनके पिछले खत का कोई जवाब नहीं मिला है. अग्रवाल ने इस पत्र में भी गंगा सफाई की मांगों को दोहराया और जल्द प्रतिक्रिया देने की गुजारिश की.

हालांकि इस पत्र का भी उनके पास कोई जवाब नहीं आया. इस बीच उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्री उमा भारती से हुई और उन्होंने फोन पर नितिन गडकरी से बात की थी. कोई भी समाधान नहीं निकलता देख उन्होंने एक बार फिर पांच अगस्त 2018 को नरेंद्र मोदी को तीसरा पत्र लिखा.