राजनीति

नोटबंदी उचित, इससे दबा रुपया वापस बैंकिंग प्रणाली में लाया गया: नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के शहडोल में हुई चुनावी सभा में कहा कि दबे पैसे का उपयोग सरकार जनहित के कार्यों में कर रही है. वहीं राहुल गांधी ने सागर ज़िले में हुई सभा में कहा कि नोटबंदी देश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है.

Shahdol: Prime Minister Narendra Modi addresses a public meeting ahead of Madhya Pradesh Assembly election, in Shahdol, Friday, Nov. 16, 2018. (PTI Photo) (PTI11_16_2018_000104)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के शहडोल में एक चुनावी सभा को संबोधित किया. (फोटो: पीटीआई)

भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी को उचित ठहराते हुए शुक्रवार को कहा कि इसके ज़रिये दबा हुआ रुपया वापस बैंकिंग प्रणाली में लाया गया और इसका उपयोग सरकार जनहित के कार्यों में कर रही है. वहीं इससे कुछ घंटे पहले ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबंदी को देश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया था.

मोदी ने शहडोल में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नोटबंदी के ज़रिये अलमारियों और बिस्तरों में दबा रुपया वापस बैंकिंग प्रणाली में लाया गया और इसका उपयोग सरकार अब जनहित के कार्यों में कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी के समय मैंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि शुरुआत में इससे लोगों को कुछ परेशानी होगी.’

मोदी के भाषण से कुछ घंटे पहले राहुल गांधी ने सागर ज़िले में एक जनसभा में नोटबंदी को देश के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला बताया.

मोदी ने कहा, ‘आज़ादी के बाद एक परिवार की चार पीढ़ी की सरकारों ने इतने शौचालय नहीं बनाए जितने हमने चार साल में बना दिए. लोगों के मन में सवाल है कि चायवाला प्रधानमंत्री बन गया. इतने पैसे लाता कहां से है, जहां देखों गांव की सड़क बन रही है, शौचालय बन रहा है, रेल का चौड़ीकरण हो रहा है, रेल का विद्युतीकरण हो रहा है. यह मोदी इतने कम समय में पैसे लाया कहां से.’

उन्होंने कहा, ‘इनकी (कांग्रेस) पीड़ा का कारण भी यही है कि चार पीढ़ी से जो जमा किया है, किसी के बिस्तर के नीचे नोट पड़े थे. किसी के बोरे में भर भर कर पड़े थे, किसी की अलमारियों में नोट भरे थे. मोदी नोटबंदी करके सब के पैसों को बैंक में ले आया. ये पैसे आपके हैं और इसलिए शौचालय बन रहे हैं, घर बन रहे हैं, गांव की सड़क बन रही है, किसान को पानी पहुंच रहा है.’

उन्होंने जनसभा में लोगों से सवाल किया कि क्या यहां बैठा एक भी व्यक्ति नोटबंदी को लेकर आज रो रहा है. लोगों ने उत्तर दिया… नहीं..!

मोदी ने कहा कि उस समय तकलीफ हुई तो मैंने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि थोड़ी तकलीफ होगी. आज अकेली कांग्रेस रो रही है. यह परिवार रो रहा है क्योंकि उनका चार पीढ़ी का जमा चला गया, इसलिए रो रहे हैं. इनका इतना लुट गया कि दो-तीन साल बाद भी अभी संभल नहीं पा रहे हैं.

मोदी ने जनसभा में पूछा कि बताइए हिंदुस्तान के सामान्य जन का पैसा इनके पास से वापस निकालना चाहिए कि नहीं. यह काम जारी रहना चाहिए या नहीं.

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई मैं छोड़ने वाला नहीं. जाति बिरादरी, संप्रदाय के नाम पर चुनाव बहुत हो चुके. मेरे तेरे का खेल बहुत हो चुका अब देश को विकास के लिये वोट चाहिए, विकास के लिए दल चाहिए.

मोदी ने कहा, ‘इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण गरीबों के नाम पर किया. लेकिन क्या गरीब बैंक के अंदर जा पाया. देश की आधी जनसंख्या बैंक के दरवाज़े पर नहीं पहुंच पाई थी. आपने (कांग्रेस) वादा किया था और आपने वादाखिलाफी की.’

उन्होंने कहा, ‘हमने चार साल के अंदर हिंदुस्तान के हर परिवार का खाता बैंक में खुलवा दिया और आज गरीब बैंक के अंदर जा सकता है. इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था, इस बात को आज 40 साल हो गए, क्या गरीबी हटी. उन्होंने वादाख़िलाफ़ी की या नहीं. जो ऐसे झूठे वादे करते हैं उन पर भरोसा करोगे क्या.’

उन्होंने कहा कि आप हमारे वादों पर वोट मत दीजिए, हमने जो किया उस पर भरोसा कीजिए और एक परिवार की चार पीढ़ी और उनके 55 साल के खिलाफ मेरे चार साल, मध्य प्रदेश में शिवराज के 15 साल में ही सिद्ध कर देंगे कि हम ज़्यादा अच्छा करते हैं, सबके लिए करते हैं.

मोदी ने कहा कि हमने वादा किया है कि 2022 में जब देश आज़ादी की 75वीं सालगिरह मनाएगा तो हम देश के एक भी परिवार को बिना घर के नहीं रहने देंगे. हमारे इस वादे पर किसी को शक इसलिए नहीं है क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मध्य प्रदेश में चार साल के कम समय में 12 लाख पक्के घरों की चाभी लोगों को दे चुके हैं.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस के चार पीढ़ी के शासन के बाद हम में कितना दम है, हमारी बातों में कितना दम है, लोग देख रहे हैं. हिसाब लगाकर देता रहता हूं. इनसे पूछिए कि इससे पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, उनके घोषणा-पत्र के 62 प्रतिशत वादे किताब में ही बंद पड़े रहे. इन पर कोई काम नहीं हुआ.’

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