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सरकार ने संसद को नहीं बताया रघुराम राजन द्वारा भेजे गए घोटालेबाज़ों के नाम, कहा- केस दर्ज हुआ है

बीते अगस्त महीने में वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया था कि वित्त वर्ष 2015-16 से लेकर 2017-18 के बीच फ्रॉड की वजह से बैंकों को 69,755 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है. सीबीआई 292 बैंक फ्रॉड के मामलों की जांच कर रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन और वित्त मंत्री अरुण जेटली. (फोटो: पीटीआई/विकिमीडिया कॉमन्स)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन और वित्त मंत्री अरुण जेटली. (फोटो: पीटीआई/विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन द्वारा बड़े घोटालेबाजों की जो सूची भेजी गई थी उस पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)/प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जांच कर रही है.

बीते 14 नवंबर को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में वित्त मंत्री से पूछा था कि रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर द्वारा किस तारीख को बड़े घोटालेबाजों की सूची भेजी गई थी और उसमें किन लोगों या संस्थाओं के नाम शामिल हैं. इसी सवाल के जवाब में सरकार ने ये जानकारी दी है.

हालांकि सरकार ने ये नहीं बताया है कि राजन द्वारा भेजी गई सूची में किन लोगों के नाम शामिल हैं. वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने बताया कि रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने फरवरी, 2015 में बड़े फ्रॉड करने वालों की सूची भेजी थी.

शुक्ला ने कहा, ‘पूर्व गवर्नर द्वारा भेजे गए सभी मामलों में सीबीआई/ईडी द्वारा केस दर्ज किया गया है.’ लेकिन शिव प्रताप शुक्ला ने ये नहीं बताया कि कितने मामलों में सीबीआई या ईडी ने केस दर्ज किया है. अब सवाल ये उठ रहा है कि अगर सीबीआई/ईडी ने केस दर्ज कर लिया है तो सरकार उस सूची में शामिल नामों के बारे में क्यों नहीं बता रही है.

Raghuram Rajan Fraud List

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला द्वारा लोकसभा में दिया गया जवाब. (स्रोत: लोकसभा)

संसद के मानसून सत्र के दौरान तीन अगस्त 2018 को शुक्ला ने लोकसभा में बताया था कि सीबीआई 292 बैंक धोखाधड़ी/फ्रॉड के मामलों की जांच कर रही है. लेकिन इससे अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि इसमें से कितने मामले रघुराम राजन द्वारा भेजे गए घोटालेबाजों की सूची पर आधारित है.

वित्त मंत्रालय ने ये भी बताया था कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने 17 बड़े राशि वाले अकाउंट्स का आंकलन किया है जो कि सात विभिन्न क्षेत्रों से हैं. इसमें जेम एंज ज्वेलरी, मैन्युफैक्चरिंग/इंडस्ट्री, एग्रो, मीडिया, एविएशन, सर्विस/प्रोजेक्ट्स हैं.

सरकार ने कहा कि सार्वजनिक बैंको को ये निर्देश दिया गया है कि इन क्षेत्रों को पैसे जारी करते वक्त काफी सावधानी बरती जाए.

बीते सात अगस्त 2018 को तृणमूल कांग्रेस पार्टी से सांसद मानस रंजन के एक सवाल के जवाब में शिव प्रताप शुक्ला ने राज्यसभा में बताया था कि वित्त वर्ष 2015-16 से लेकर 2017-18 के बीच फ्रॉड की वजह से बैंकों को 69,755 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है.

आरबीआई द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक बैंकों को वित्त वर्ष 2015-16 में 16,409 करोड़, 2016-17 में 16,652 करोड़ और 2017-18 में 36,694 करोड़ का नुकसान हुआ है.

वित्त राज्य मंत्री ने ये भी कहा कि सरकार ने सभी सार्वजनिक बैंको को निर्देश दिया है कि वे एक जुलाई 2014 के आरबीआई के मास्टर सर्कुलर के आधार पर फ्रॉड करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें.

शुक्ला ने कहा, ‘भारत सरकार ने 13 मई 2015 को एक बार फिर सभी बैंकों को सुझाव दिया था कि बड़े फ्रॉड के मामलों की समय से पहचान कर उसे रिपोर्ट किया जाए और उसकी जांच हो.’

मालूम हो कि द वायर ने सबसे पहले रिपोर्ट कर ये जानकारी दी थी कि रघुराम राजन ने 4 फरवरी 2015 को बड़े घोटालेबाजों की सूची प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और वित्त मंत्रालय को भेजी थी. हालांकि उस समय सरकार ने ये जानकारी देने से मना कर दिया था कि राजन की सूची पर क्या कार्रवाई की गई है.

आरबीआई ने द वायर द्वारा दायर किए गए सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में बताया था कि रघुराम राजन द्वारा भेजी गई सूची पर इस समय कई सरकारी और बाह्य एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है. हालांकि आरबीआई ने इन जांच एजेंसियों के नाम नहीं बताए थे.

ये पहला मौका है जब सरकार ने ये जानकारी दी है कि सीबीआई और ईडी ने इन मामलों में केस दर्ज किया है.

बता दें कि संसद की प्राक्कलन समिति (एस्टीमेट कमेटी) के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की गुज़ारिश पर रघुराम राजन ने 6 सितंबर 2018 को समिति के सामने 17 पन्नों का एक संसदीय नोट दिया था. इसमें राजन ने कहा था कि उन्होंने पीएमओ को एनपीए के बड़े घोटालेबाज़ों की एक सूची भेजी थी. हालांकि राजन ने अपने नोट में ये स्पष्ट नहीं किया था कि उन्होंने किसके कार्यकाल में ये सूची भेजी थी.

रघुराम राजन ने पीएमओ को इस बात से भी अवगत कराया था कि किस तरह से ‘बेईमान प्रमोटरों’ द्वारा आयात ओवर-इनवॉयसिंग (वास्तविक से ज़्यादा बिल बनाने) का इस्तेमाल करके पूंजीगत उपकरणों के लागत मूल्य को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया.

रघुराम राजन द्वारा भेजी गई सूची की जानकारी छुपाने को लेकर केंद्र की मोदी सरकार आलोचनाओं के घेरे में है. केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने द वायर की रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लेते हुए पीएमओ, वित्त मंत्रालय और आरबीआई को कड़ी फटकार लगाई और कार्रवाई एवं नामों की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था.

हालांकि पीएमओ ने सीआईसी का निर्देश मानने से इंकार कर दिया था. इसके बाद सीआईसी ने एक बार फिर से पीएमओ और आरबीआई की आपत्तिओं को खारिज करते हुए रघुराम राजन की सूची पर की गई कार्रवाई और उसमें लिखे नामों को सार्वजनिक करने का आदेश दिया था.

द वायर ने सीआईसी के निर्देशों को आधार बनाते हुए 15 नवंबर 2018 को आरबीआई, पीएमओ और वित्त मंत्रालय में अपील दायर किया था. हालांकि सीआईसी के निर्देश के बावजूद आरबीआई ने अपील को खारिज कर दिया और पीएमओ एवं वित्त मंत्रालय ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है.