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गाय की मौत को एक पुलिस अधिकारी की मौत से ज़्यादा तवज्जो दी गई: नसीरुद्दीन शाह

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि मौजूदा हालात में मैं अपने बच्चों के लिए चिंतित हूं क्योंकि कल को अगर भीड़ उन्हें घेरकर पूछती है, ‘तुम हिंदू हो या मुसलमान?’ तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं होगा.

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अभिनेता नसीरुद्दीन शाह. (फोटो साभार: Karwan-e-Mohabbat India)

नई दिल्ली: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोहत्या के शक में भीड़ द्वारा की गई हिंसा का हवाला देते हुए कहा कि कई जगहों पर एक गाय की मौत को एक पुलिस अधिकारी की हत्या से ज्यादा तवज्जो दी गई. अभिनेता ने अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई.

उनका कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को किसी खास धर्म की शिक्षा नहीं दी है. नसीरुद्दीन शाह ‘कारवां-ए-मोहब्बत इंडिया’ द्वारा किए गए वीडियो साक्षात्कार में यह टिप्पणी कर रहे थे. इस संगठन ने सोमवार को यूट्यूब चैनल पर यह वीडियो पोस्ट किया है.

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि ‘जहर फैलाया जा चुका है’ और अब इसे रोक पाना मुश्किल होगा. उन्होंने कहा, ‘इस जिन्न को वापस बोतल में बंद करना मुश्किल होगा. जो कानून को अपने हाथों में ले रहे हैं, उन्हें खुली छूट दे दे गई है. कई क्षेत्रों में हम यह देख रहे हैं कि एक गाय की मौत को एक पुलिस अधिकारी की मौत से ज्यादा तवज्जो दी गई.’

अभिनेता की पत्नी रत्ना पाठक हैं. शाह ने कहा कि उन्होंने तय किया था कि वे अपने बच्चों इमाद और विवान को धार्मिक शिक्षा नहीं देंगे क्योंकि उनका मानना है कि ‘खराब या अच्छा होने का किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है.’

नसीरुद्दीन शाह का अपने बच्चों के लिए भयभीत होना 2015 में आमिर खान द्वारा असहिष्णुता पर दिए गए बयान की याद दिलाता है. खान की इस टिप्पणी के बाद विवाद पैदा हो गया था.

नसीरुद्दीन शाह ने कहा, ‘मुझे बचपन में धार्मिक शिक्षा मिली थी. रत्ना (अभिनेता की पत्नी) एक प्रगतिशील घर की थी और उन्हें ऐसा कुछ नहीं मिला. और हमने तय किया कि हम अपने बच्चों को धार्मिक शिक्षा नहीं देंगे क्योंकि मेरा मानना है कि किसी के अच्छे होने या बुरे होने का धर्म से कोई लेना देना नहीं है.’

शाह ने कहा, ‘हमने अपने बच्चों को अच्छे और बुरे में भेद बताया, जिसमें हमारा विश्वास है. मैंने उन्हें कुरान शरीफ की कुछ आयतें पढ़ना भी सिखाया क्योंकि मेरा मानना है कि इससे उच्चारण स्पष्ट होता है. यह वैसे ही जैसे रामायण या महाभारत को पढ़ने से किसी का उच्चारण सुधरता है.’

अभिनेता ने कहा कि स्थिति जल्द सुधरने वाली नहीं है. उन्होंने कहा कि वह डरे हुए नहीं हैं बल्कि गुस्से में हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं अपने बच्चों के लिए चिंतित हूं क्योंकि कल को अगर भीड़ उन्हें घेरकर पूछती है, ‘तुम हिंदू हो या मुसलमान?’ तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं होगा. यह मुझे चिंतित करता है और मुझे नहीं लगता कि इन हालात में जल्द कोई सुधार होगा.’

शाह ने कहा, ‘ये सभी चीजें मुझे डराती नहीं हैं बल्कि गुस्सा दिलाती हैं और मैं मानता हूं कि सही सोचने वाले हर व्यक्ति को गुस्सा होना चाहिए न कि डरना चाहिए. यह हमारा घर है और किसकी हिम्मत है जो हमें हमारे घर से निकाले.’

बता दें कि बीते तीन दिसंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कथित गोहत्या के शक में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा भारी हिंसा की गई जिसमें इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह तथा सुमित नामक एक अन्य युवक की मृत्यु हो गई थी.

पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह दादरी में हुए अख़लाक़ हत्या मामले में 28 सितंबर 2015 से नौ नवंबर 2015 तक जांच अधिकारी थे.

इस मामले में 27 नामज़द लोगों तथा 50-60 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है.बुलंदशहर हिंसा मामले और इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या मामले में मुख्य आरोपी बजरंग दल के नेता योगेश राज को बनाया गया है. फिलहाल वह फरार चल रहा है. मामले का एक अन्य वांछित शिखर अग्रवाल भी फ़रार है.

इस संबंध में एक फौजी जीतू मलिक उर्फ जीतू फौजी को गिरफ़्तार किया है. इसके अलावा 11 से 12 अन्य लोगों को भी गिरफ़्तार किया जा चुका है.

राज्य की योगी सरकार की इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि वहां कि पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या की जांच के बजाय कथित गोहत्या के जांच में लगी हुई है. मृतक के परिजनों ने भी सरकार के इस रवैये को लेकर दुख जताया है और कहा कि हत्या से जुड़े सारे सबूत मिटाए जा रहे हैं और सरकार अपराधियों को बचाने में लगी हुई है.

राज्य में कानून व्यवस्था फेल हो जाने को लेकर देश के पूर्व 83 नौकरशाहों ने पत्र लिखकर योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगा है.

83 नौकरशाहों की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में शासन प्रणाली के मौलिक सिद्धांतों, संवैधानिक नीति और मानवीय सामाजिक व्यवहार तहस-नहस हो चुके हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक पुजारी की तरह धर्मांधता और बहुसंख्यकों के प्रभुत्व के एजेंडे पर काम कर रहे हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)