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सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ़्तारी से सुरक्षा मिलने पर भी आनंद तेलतुम्बड़े गिरफ़्तार

भीमा-कोरेगांव हिंसा में कथित भूमिका और माओवादियों से कथित संबंधों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते 14 जनवरी को दलित शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बड़े की गिरफ़्तारी से अंतरिम सुरक्षा की अवधि चार सप्ताह और बढ़ा दी थी.

आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: फेसबुक)

आनंद तेलतुम्बड़े. (फोटो साभार: फेसबुक)

मुंबई: पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव हिंसा और माओवादियों से कथित संबंधों के आरोप में सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम सुरक्षा के बावजूद शनिवार को लेखक और शिक्षाविद आनंद तेलतुम्बड़े को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर तेलतुम्बड़े को पुलिस ने शनिवार तड़के मुम्बई हवाई-अड्डे से गिरफ्तार किया है. शुक्रवार को ही पुणे की एक विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी.

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने बीती 14 जनवरी को  इस मामले में आनंद तेलतुम्बड़े के ख़िलाफ़ दर्ज पुणे पुलिस की प्राथमिकी (एफआईआर) रद्द करने से इनकार कर दिया था. हालांकि तब अदालत ने गिरफ़्तारी से अंतरिम सुरक्षा की अवधि चार सप्ताह और बढ़ा दी थी.

तेलतुम्बड़े के वकील रोहन नाहर ने द वायर  को बताया कि इस बारे में पुणे सिविल कोर्ट में पुलिस के खिलाफ अवमानना की अर्जी लगाई जाएगी. उन्होंने कहा, ‘तेलतुम्बड़े को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है. हम इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.’

नाहर ने यह भी बताया कि अगर पुणे की अदालत से राहत नहीं मिलती है तो वकीलों की एक टीम बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की भी तैयारी कर रही है. भारिप बहुजन महासंघ के नेता और आनंद तेलतुम्बड़े के साले प्रकाश आंबेडकर ने भी तेलतुम्बड़े की गिरफ़्तारी को गैर-कानूनी बताया है.

उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का आदेश बिल्कुल साफ था. उन्होंने तेलतुम्बड़े को चार सप्ताह तक गिरफ़्तारी से सुरक्षा दी थी. इस अवधि में वे निचली अदालत और हाईकोर्ट जाते. पुणे पुलिस ने जो किया है, वो पूरी तरह गैर-कानूनी है और शीर्ष अदालत के आदेश का उल्लंघन है.’

पुणे पुलिस के संयुक्त आयुक्त शिवाजी बोडखे ने बताया कि तेलतुम्बड़े को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा.

गौरतलब है कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किशोर वडाने ने शुक्रवार को पाया कि जांच अधिकारी ने अपराध में आरोपी (तेलतुम्बड़े) की संलिप्तता दिखाने के लिए पर्याप्त सामग्री एकत्रित की है.

पुलिस के अनुसार माओवादियों ने पुणे में 31 दिसम्बर 2017 को एल्गार-परिषद सम्मेलन का समर्थन किया था और यहां दिए गए भड़काऊ भाषण के बाद अगले दिन कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़क गई थी.

मालूम हो कि एक जनवरी 2018 को वर्ष 1818 में हुई कोरेगांव-भीमा की लड़ाई को 200 साल पूरे हुए थे. इस दिन पुणे ज़िले के भीमा-कोरेगांव में दलित समुदाय के लोग पेशवा की सेना पर ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की जीत का जश्न मनाते हैं. इस दिन दलित संगठनों ने एक जुलूस निकाला था. इसी दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.

पुलिस ने आरोप लगाया कि 31 दिसंबर 2017 को हुए एलगार परिषद सम्मेलन में भड़काऊ भाषणों और बयानों के कारण भीमा-कोरेगांव गांव में एक जनवरी को हिंसा भड़की.

बीते साल 28 अगस्त को महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर पांच कार्यकर्ताओं- कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस को गिरफ़्तार किया था. महाराष्ट्र पुलिस का आरोप है कि इस सम्मेलन के कुछ समर्थकों के माओवादी से संबंध हैं.

इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस ने जून 2018 में एलगार परिषद के कार्यक्रम से माओवादियों के कथित संबंधों की जांच करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को गिरफ्तार किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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