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जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में चारों पदों पर लेफ्ट यूनिटी के उम्मीदवारों की जीत

वामपंथी छात्र संगठनों एआईएसए, एसएफआई, एआईएसएफ और डीएसएफ के संयुक्त मोर्चे की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार आईशी घोष जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष चुनी गई हैं. उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मनीष जांगिड़ को हराया है. एसएफआई को 13 साल बाद अध्यक्ष पद मिला है.

मोहम्मद दानिश, सतीश चंद्र यादव, साकेत मून और आईशी घोष. (बाएं से दाएं. (फोटो: ट्विटर)

मोहम्मद दानिश, सतीश चंद्र यादव, साकेत मून और आईशी घोष. (बाएं से दाएं. (फोटो: ट्विटर)

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के हाल में संपन्न चुनावों में चारों पदों पर वामपंथी छात्र संगठनों एआईएसए, एसएफआई, एआईएसएफ और डीएसएफ के संयुक्त मोर्चे के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. चुनाव समिति ने मंगलवार को नतीजों की घोषणा की.

समूह के अध्यक्ष पद की उम्मीदवार आईशी घोष ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मनीष जांगिड़ को हराया. आईशी को 2313 और जांगिड़ को 1128 वोट मिले. एसएफआई को 13 साल बाद अध्यक्ष पद मिला है.

साकेत मून को जेएनयूएसयू का उपाध्यक्ष चुना गया है. उन्होंने 3365 वोट हासिल करके एबीवीपी की श्रुति अग्निहोत्री को पराजित किया जिन्हें 1335 वोट मिले.

महासचिव पद पर सतीश चंद्र यादव चुने गये हैं. उन्होंने सबरीश पीए को हराया है. यादव को 2518 तो सबरीश को 1355 वोट मिले हैं.

संयुक्त सचिव पद पर मोहम्मद दानिश की जीत हुई है जिन्होंने 3295 वोटों के साथ सुमंत कुमार साहू को शिकस्त दे दी.

गौरतलब है कि जेएनयू में 6 सितंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था. इस बार चुनाव में 67.9 फीसदी मतदान हुआ. मतदान में कुल 8,488 पंजीकृत मतदाताओं में से 5,762 छात्र-छात्रों ने मतदान किया. चुनाव में विभिन्न पदों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में थे.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने छह सितंबर को हुए जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी थी. अदालत के निर्देशानुसार आज परिणाम घोषित किये गये. इससे पहले आठ सितंबर को इन चुनावों के परिणाम घोषित किये जाने थे.

दरअसल, जेएनयू के दो छात्रों अंशुमान दुबे और अनुज कुमार द्विवेदी का आरोप था कि जेएनयू में काउंसिलर पद के चुनाव के लिए इनके नामांकन को प्रशासन ने गलत तरीके से खारिज कर दिया.

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) चुनाव समिति ने अकारण उनका नामांकन खारिज कर दिया था. याचिकाओं में विश्वविद्यालय प्रशासन को लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव कराने को कहा गया.

इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने नामांकन को अवैध रूप से खारिज किए जाने के आरोप वाली याचिका को ठुकराते हुए विश्वविद्यालय की चुनाव समिति को परिणाम की घोषणा करने की अनुमति दी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)