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फ़ारूक़ अब्दुल्ला के पास क़ानून व्यवस्था की समस्या खड़ी करने की ज़बरदस्त क्षमता: पीएसए ऑर्डर

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला के ख़िलाफ़ जन सुरक्षा क़ानून के तहत दर्ज मामले में उन पर आतंकवादियों और अलगाववादियों का महिमामंडन करने वाले बयान देने का आरोप लगाया गया है.

New Delhi: Jammu and Kashmir National Conference President Farooq Abdullah addresses an all party condolence meeting organised for former prime minister Atal Bihari Vajpayee, in New Delhi on Monday, Aug 20, 2018. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI8_20_2018_000249B)

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला. (फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन पर लगाए गए आरोपों में कहा गया है कि कश्मीर घाटी में लोक अव्यवस्था (क़ानून व्यवस्था की स्थिति खराब करने) का माहौल बनाने और अपने बयानों से लोगों को सरकार के खिलाफ लामबंद करने की उनके पास जबरदस्त क्षमता है.

अब्दुल्ला पर आतंकवादियों और अलगाववादियों का महिमामंडन करने वाले बयान देने के भी आरोप रहे हैं.

श्रीनगर से लोकसभा सदस्य 81 वर्षीय अब्दुल्ला पांच अगस्त से नजरबंद थे, जब केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था. उन्हें पीएसए के तहत बीते 16 सितंबर को हिरासत में लिया गया था और उन्हें गुपकर रोड स्थित उनके आवास में रखा गया है, जिसे जेल घोषित कर दिया गया है.

अब्दुल्ला के खिलाफ जारी पीएसए ऑर्डर की प्रति समाचार एजेंसी पीटीआई को प्राप्त हुई है, जिसमें 2016 से लेकर सात घटनाओं का जिक्र किया गया है, जब उन्होंने अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और आतंकी संगठनों के पक्ष में बयान दिए.

अब्दुल्ला पीएसए के तहत नामजद किए जाने वाले पहले नेता हैं जो मुख्यमंत्री के पद पर रहे हैं. पीएसए सिर्फ जम्मू कश्मीर में ही लागू है. देश में अन्य स्थानों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लागू है, जो इस कानून के ही समकक्ष है.

अधिकारियों ने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष एवं तीन बार मुख्यमंत्री रहे अब्दुल्ला को पीएसए के लोक व्यवस्था प्रावधान के तहत नामजद किया गया है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को बगैर मुकदमे के तीन से छह महीने तक जेल में रखा जा सकता है.

पीएसए ऑर्डर में जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए हटाने को लेकर अब्दुल्ला पर सरकार के खिलाफ लोगों को लामबंद करने का आरोप भी लगाया गया है.

आदेश में यह कहा गया है कि वह देश की एकता और अखंडता को खतरे में डालने और आतंकवादियों का महिमामंडन करने की बजाय संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए पर चर्चा कर सकते थे.

ऑर्डर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर पृथकतावादी विचाराधारा को बढ़ावा देने के अलावा लोगों के जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करने के आरोप हैं.

इसमें कहा गया है, ‘जिले (श्रीनगर) के अंदर और घाटी के अन्य हिस्सों में लोक अव्यवस्था का माहौल बनाने की अब्दुल्ला के पास जबदरस्त क्षमता है.’

उन पर आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति के रूप में उन्हें देश के खिलाफ आम लोगों की भावनाओं को भड़काते देखा गया है.

पीएसए ऑर्डर में कहा गया है कि अब्दुल्ला के आवास ‘जी-40 गुपकर रोड’ को एक उप-कारागार घोषित किया गया है. राज्य प्रशासन ने उन पर लोक व्यवस्था में खलल डालने के मकसद से कानून से टकराव मोल लेने वाले बयान देने का आरोप लगाया है.

पीएसए में दो धाराएं हैं- ‘लोक व्यवस्था’ और ‘राज्य की सुरक्षा को खतरा’. पहली धारा बगैर मुकदमे के तीन से छह महीने की हिरासत का प्रावधान करती है जबकि दूसरी धारा दो साल तक की हिरासत की इजाजत देती है.

अलगाववादियों और घाटी में अब्दुल्ला के राजनीतिक विरोधियों ने उन्हें राज्य के भारत में शामिल रहने का एक प्रबल समर्थक करार दिया है.