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मनोज सिंह

सुनील कुमार दत्ता.

उत्तर प्रदेश: आज़मगढ़ में फोटो पत्रकार का कार्यालय प्रशासन ने अतिक्रमण के नाम पर ढहाया

आज़मगढ़ शहर के वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट सुनील कुमार दत्ता का कहना है कि नगर पालिका परिषद ने वर्ष 2000 में उन्हें यह ज़मीन किराये पर आवंटित की थी, जहां उन्होंने कार्यालय बनाया था. उनका आरोप है कि कार्यालय ख़ाली करने के तय समय से पहले ही इसे प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया.

दीपक कुमार कन्नौजिया. (फोटो स्पेशल अरेंजमेंट)

यूपी: ‘मैंने जो कहा उसके लिए सरकार मुझे जेल भेज दे, लेकिन स्कूल से दुश्मनी न निकाले’

23 मार्च को गोरखपुर के बांसगांव के भीमराव आंबेडकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक दीपक कुमार कन्नौजिया ने एक वीडियो में कोरोना के मद्देनज़र स्कूल बंद करने के चलते होने वाली परेशानियों का हवाला देते हुए सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए थे. अब इसी वीडियो के चलते उनके स्कूल की मान्यता रद्द की जा रही है.

राकेश टिकैत. (फोटो: पीटीआई)

यूपी: पूर्वांचल पहुंचा किसान आंदोलन, राकेश टिकैत ने कहा- किसान किसी क्षेत्र और झंडे में नहीं बंटा

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के सिकंदरपुर में हुई किसान-मज़दूर महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि 2021 आंदोलन का वर्ष होगा. किसान पूरी ताक़त से लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार है.

नरेश टिकैत (फोटो: पीटीआई)

भाजपा का साथ देना बड़ी भूल थी, सरकार किसानों को बर्बाद करने पर तुली है: नरेश टिकैत

दिल्ली में कृषि क़ानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन की गूंज गुरुवार को पूर्वांचल में भी सुनाई दी, जहां बस्ती ज़िले में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने किसान पंचायत का आयोजन किया और जमकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

यूपी: 212 करोड़ रुपये का बकाया छोड़ बंद हो गईं पूर्वांचल की चार चीनी मिलें

शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 1966 कहता है कि चीनी मिलें किसान को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर भुगतान करेंगी, यदि वे ऐसा न करें तो उन्हें बकाया गन्ना मूल्य पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा. यूपी सरकार इस नियम का पालन न तो निजी चीनी मिलों से करवा पा रही है न उसकी अपनी चीनी मिलें इसे मान रही हैं.

गोरखपुर खाद कारखाने के पूर्व कर्मचारी और दुकानदारों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

गोरखपुर खाद कारखाना: पूर्व कर्मचारियों और दुकानदारों पर विस्थापन का ख़तरा

गोरखपुर खाद कारखाना बंद होने के बाद यहां की ज़मीनों को कुछ सरकारी संस्थाओं को दे दिया गया है. ऐसे ही 50 एकड़ ज़मीन सैनिक स्कूल को दी गई है, जिसमें पूर्व कर्मचारियों के लिए बनाई गई आवासीय कॉलोनी और फर्टिलाइज़र मार्केट स्थित हैं. विस्थापन के ख़तरे के मद्देनज़र यहां के कर्मचारी और दुकानदार हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं.

चौरी-चौरा में शताब्दी समारोह के उद्घाटन के अवसर पर शहीद स्थल पर फूल चढ़ाते मुख्यमंत्री आदित्यनाथ. (फोटो साभार: सीएमओ यूपी)

चौरी-चौरा शताब्दी समारोह मना रही यूपी सरकार शहीद स्मारक पर दर्ज ग़लत इतिहास की सुध कब लेगी

1922 में ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ हुई चौरी-चौरा की घटना के सौ साल पूरे होने पर यूपी सरकार ने साल भर तक चलने वाला शताब्दी महोत्सव आयोजित किया है. हालांकि लंबे समय से इतिहासकारों और लेखकों के ध्यान दिलाए जाने के बावजूद शहीद स्मारक पर दर्ज ग़लत जानकारियों को इस बार भी सुधारा नहीं गया है.

(फोटो साभार: संबंधित वेबसाइट)

यूपी: जल निगम के दस हज़ार कर्मियों, 15 हज़ार सेवानिवृत्तों को पांच महीने से नहीं मिला वेतन-पेंशन

उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा बीते पांच महीनों से इंजीनियर्स समेत दस हज़ार कर्मचारियों को वेतन और क़रीब पंद्रह हजार रिटायर कर्मियों को पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है. इससे परेशान जल निगम संघर्ष समिति ने 12 फरवरी से पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है.

एक समारोह में सपना और विशाल. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

यूपी: दबंगों के डर से दो महीने से छिपकर रह रहे हैं आंबेडकर के विचारों पर गीत गाने वाले दंपति

ग़ाज़ीपुर ज़िले के विशाल ग़ाज़ीपुरी और उनकी पत्नी सपना दलित व बहुजन विचारकों की शिक्षाओं को गीत के माध्यम से पेश करते हैं. बीते अक्टूबर में इन गीतों से नाराज़ क्षेत्र के कुछ दबंगों ने उनके स्टूडियो में आगज़नी की और जान से मारने की धमकी दी. पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बावजूद विशाल परिवार समेत छिपकर रहने को मजबूर हैं.

Lal Bihari Mritak Satish Kaushik Kaagaz

‘18 वर्ष तक संघर्ष कर मैं ज़िंदा हुआ था, एक बार फिर से मृतक बना दिया गया’

18 सालों तक सरकारी कागज़ों में ‘मृत’ दिखाए गए आज़मगढ़ के लाल बिहारी मृतक के जीवन पर बनी फिल्म ‘कागज़’ की रिलीज़ से पहले लाल बिहारी ने निर्देशक सतीश कौशिक पर धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप लगाते हुए फिल्म का प्रदर्शन रोकने की मांग की है.

लोजपा प्रमुख चिराग पासवान. (फोटो: पीटीआई)

बिहार: लोजपा को सीटें भले ही नहीं मिली हों, लेकिन उससे जदयू को नुकसान पूरा हुआ है

विधानसभा चुनाव में लोजपा को सिर्फ़ एक सीट पर जीत मिली है लेकिन उसने अपने ‘घोषित लक्ष्य’ के अनुसार जदयू को ख़ासा नुकसान पहुंचाया. नौ सीटों पर लोजपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे हैं और इन सीटों पर उन्होंने जदयू को चुनावी मुक़ाबले से बाहर भी किया.

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत पर नई दिल्ली में मीडिया से बात करते भाजपा कार्यकर्ता. (फोटो: पीटीआई)

बिहार विधानसभा चुनाव: 11 सीटों पर हार-जीत का अंतर एक हज़ार से भी कम रहा

बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 40 सीटों पर बेहद कड़ा मुक़ाबला रहा और इन पर हार जीत का अंतर 3,500 मतों से भी कम रहा. कम मतों से जीत में जदयू-भाजपा-वीआईपी-हम को ज्यादा फायदा हुआ और उन्होंने 21 सीटों पर सफलता प्राप्त की.

कोसी नदी डागमारा चुरियासी गांव के पास कटान कर रही है. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

बिहार: ‘सरकार ने कुछ नहीं किया तो हमने ख़ुद कोसी नदी से बचाव के लिए सुरक्षा बांध बना लिया’

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के सुपौल ज़िले कुछ गांवों के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से कोसी नदी की मार झेल रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बांध के लिए एमपी-एमएलए आदि से गुज़ारिश की गई, लेकिन किसी ने उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

बिहार: ‘सरकार रूपया का मदद देहलस लेकिन ओसे बेटी थोड़े न लौट के आई’

मुज़फ़्फ़रपुर और आसपास के क्षेत्रों में अमूमन अगस्त-सितंबर में चमकी बुखार का भीषण प्रकोप देखने को मिलता है, पर इस बार मामले भी कम आए और मौतें भी कम हुईं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बावजूद इसके बिहार को चमकी बुखार से निपटने के लिए अभी और तैयारी करनी होगी.

मोतीपुर जमींदारी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने मोतीपुर चीनी मिल को 1932 में स्थापित किया था. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में बंद पड़ी चीनी मिल क्या कभी शुरू हो पाएगी?

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित मोतीपुर चीनी मिल 1932 स्थापित की गई थी. 1980 में राज्य सरकार ने इसका संचालन अपने हाथ में लिया और वर्ष 1997 में यह बंद हो गई. आज हालात ये हैं कि बिहार में 28 में से सिर्फ 11 चीनी मिलें ही चल रही हैं. ये सभी चीनी मिलें सिर्फ़ छह ज़िलों में स्थित हैं.