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मनोज सिंह

Ravi Kishan PTI

नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद भाजपा ने गोरखपुर से रवि किशन को टिकट क्यों दिया?

विशेष रिपोर्ट: गोरखपुर में भाजपा आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही है. प्रत्याशी चयन में एक महीना लगना और इस दौरान दर्जन भर नेताओं का नाम आना व ख़ारिज होना इसका उदाहरण है. आखिर में ऐसे प्रत्याशी को ‘आयात’ करना पड़ा, जिसे लेकर पार्टी और समर्थकों में उत्साह नहीं दिख रहा है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

क्या योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर सीट से ‘योग्य उम्मीदवार’ नहीं ढूंढ पा रही है भाजपा?

विशेष रिपोर्ट: पिछले उपचुनाव में गोरखपुर से मिली हार के चलते पूरे देश में भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सीट अब पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए सबसे अधिक चिंता की सीट बन गई है.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद. (फोटो साभार: पीटीआई/फेसबुक)

निषाद पार्टी का सपा से गठबंधन क्यों टूटा

सबसे बड़ा सवाल यह है कि निषाद पार्टी से सपा का गठबंधन टूटने से पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? भाजपा से निषाद पार्टी का गठजोड़ न तो निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को पसंद आ रहा है और न भाजपाइयों को.

Gandhinagar: Congress General Secretary Priyanka Gandhi Vadra addresses a public meeting ahead of Lok Sabha elections, in Gandhinagar, Tuesday, March 12, 2019. (PTI Photo) (PTI3_12_2019_000096B)

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए क्या संभावनाएं हैं?

पूर्वी उत्तर प्रदेश में अस्मिता की राजनीति सबसे अधिक तीखी है. पटेल, कुर्मी, राजभर, चौहान, निषाद, कुर्मी-कुशवाहा आदि जातियों की अपनी पार्टियां बन चुकी हैं और उनकी अपनी जातियों पर पकड़ बेहद मज़बूत है. कांग्रेस को इन सबके बीच अपने लिए कम से कम 20 फीसदी से अधिक वोटों को जुगाड़ करना होगा तभी वह यूपी में सम्मानजनक स्थान पा सकती है.

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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इंसेफलाइटिस से मौतों में ‘चमत्कारिक’ कमी का सच क्या है?

उत्तर प्रदेश सरकार यदि इंसेफलाइटिस से मौतों में कमी आने का दावा कर रही है तो उसे पिछले पांच वर्षों का अगस्त महीने तक गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या और मौतों की रिपोर्ट जारी करनी चाहिए.

डॉ. संजय निषाद. (फोटो साभार: फेसबुक/निषाद पार्टी)

कौन हैं संजय निषाद, जिनकी निषाद पार्टी ने योगी को उनके गढ़ में मात दी

गोरखपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: गोरक्षपीठ को निषादों का बताने वाले संजय उन चंद लोगों में हैं, जो गोरखपुर में रहते हुए हिंदू युवा वाहिनी को दंगा करने वाला, मुसलमानों, दलितों, अति पिछड़ों और निषादों पर अत्याचार करने वाला ‘संगठित गिरोह’ बताते रहे हैं.

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गोरखपुर और फूलपुर में भाजपा की हार पर हैरत नहीं होनी चाहिए

गोरखपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: मार्च 2017 के बाद यूपी की राजनीति में नए बदलाव की जो धीमी आवाज़ें उठ रही थीं, उसे सुना नहीं गया. ये आवाज़ें इस चुनाव में बहुत मुखर थीं लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया. अब जब उसने अपना असर दिखा दिया, तो सभी हैरान हैं.

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क्यों गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है?

गोरखपुर से ग्राउंड रिपोर्ट: लगातार जीत से अति-आत्मविश्वास की शिकार भाजपा के लिए यह उपचुनाव आसान नहीं रह गया है. दोनों उपचुनाव शुरू से ही पार्टी के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं क्योंकि यहां के प्रतिकूल परिणाम उसे बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं.

फोटो साभार: एएनआई

गोरखपुर ऑक्सीजन कांड: पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट, डॉ. कफ़ील और पूर्व प्राचार्य पर गबन का आरोप

चार्जशीट में इन दोनों व्यक्तियों पर सरकारी धन के व्यक्तिगत हित में उपयोग का आरोप लगाया गया है.

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज़ों के परिजन. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में अक्टूबर के 15 दिनों में 231 बच्चों की मौत

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का दौर जारी है. अगस्त महीने में बच्चों की मौतों को स्वभाविक बताने वाले यूपी सरकार के मंत्री अब इस बारे में चुप्पी साध गए हैं.

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क्या छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी को जिताने के लिए योगी सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है?

गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा है.

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गोरखपुर: बच्चों की मौत पर आई रिपोर्ट में आॅक्सीजन संकट का ज़िक्र तक नहीं

जब मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन की कमी की ख़बरें छप रही थीं, उसी दौरान मुख्यमंत्री, कमिश्नर, डीएम, चिकित्सा सचिव, स्वास्थ्य सचिव सबका दौरा हुआ. क्या बड़े लोगों को बचाया जा रहा है?

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गोरखपुर में बच्चों को आॅक्सीजन की कमी ने नहीं, सरकारों ने मार डाला

जिस गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पर इंसेफलाइटिस पीड़ित बच्चों के इलाज की ज़िम्मेदारी है उसकी स्थिति देखकर कहा जा सकता है कि बच्चों की मौत से सरकारों को कोई फर्क नहीं पड़ता.

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गोरखपुर में इंसेफलाइटिस मरीज़ों के पुनर्वास के लिए बना विभाग बंद होने के कगार पर

इंसेफलाइटिस से विकलांग मरीजों के इलाज व पुनर्वास लिए बने विभाग के 11 कर्मियों को 27 महीने से ​नहीं मिला वेतन, तीन चिकित्सकों और स्टेनोग्राफर ने नौकरी छोड़ी.

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गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस रोगियों के इलाज में लगे चिकित्साकर्मियों को वेतन के लाले

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चार महीने से 378 कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला.

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शिलान्यास से शिलान्यास तक: मेरा नाटक ख़त्म हुआ

गोरखपुर में एक अदद प्रेक्षागृह के लिए पिछले 24 वर्षों से अनूठे किस्म का रंग आंदोलन चलाया जा रहा था. 1258 नाटकों के बाद रंगाश्रम का यह रंग आंदोलन ख़त्म हो गया.

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सूरीनाम में सरनामी भोजपुरी का सुरीला गिरमिटिया

विशेष: उत्तर प्रदेश के बस्ती से सूरीनाम गए एक परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजमोहन ने अपने पुरखे गिरमिटिया मज़दूरों जीवन-गाथा को संगीत में ढाला है.

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जब चुनावी लोकतंत्र में ज़ब्त हो गई फ़िराक़ गोरखपुरी की ज़मानत

चुनाव में हार के बाद जब पीएम जवाहर लाल नेहरू से उनकी भेंट हुई तो नेहरू ने पूछा, सहाय साहब कैसे हैं? फ़िराक़ गोरखपुरी का जवाब था, ‘सहाय’ कहां, अब तो बस ‘हाय’ रह गया है.

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हिंदुत्व का गढ़ बनने से पहले मुस्लिम जोगियों का भी केंद्र था गोरखनाथ पीठ

सांप्रदायिकता और जातिवाद के ख़िलाफ़ शुरू होने वाले गोरखनाथ पीठ से कभी बड़ी संख्या में मुसलमान और अछूत मानी जाने वाली जातियां जुड़ी थीं.