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मनोज सिंह

कानपुर के बिकरू गांव में पुलिसकर्मियों पर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के हमले के बाद वहां जांच के लिए पहुंचे पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

पुलिस पर विकास दुबे के हमले की जड़ें अपराध की राजनीतिक जुगलबंदी से जुड़ी हैं

कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गए पुलिसकर्मियों की बर्बर हत्या को एक अपराधी के दुस्साहस और पुलिस की रणनीति में कमी तक सीमित करना अपराध-राजनीति के गठजोड़ की अनदेखी करना है. बिना राजनीतिक संरक्षण के किसी अपराधी में इतनी हिम्मत नहीं आ सकती कि वह पुलिस टीम को घेरकर मार डाले और आराम से फ़रार हो जाए.

बीट वन ग्राम. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

यूपी: कृषि संसाधन होते हुए भी क्यों पलायन को मजबूर हुईं वनटांगियों की कई पीढ़ियां

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-महराजगंज ज़िले को कभी बेशकीमती साखू-सागौन के जंगल लगाकर आबाद करने वाले वनटांगियों के पास पर्याप्त ज़मीन और कृषि संसाधन थे, लेकिन समय के साथ नई पीढ़ियां उचित आय और आजीविका के अभाव में शहर की राह पकड़ने को विवश हो गईं.

Ghaziabad: Migrant workers walk on railway tracks after they couldnt find any transport to return to their native places, during a 21-day nationwide lockdown to limit the spread of coronavirus, in Ghaziabad, Thursday, March 26, 2020. (PTI Photo/Arun Sharma)

‘ग़रीबी ऐसी है कि मेरे मरने के बाद परिवार के पास अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं होंगे’

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले के एक गांव के रहने वाले 50 वर्षीय भानु प्रकाश गुप्ता शाहजहांपुर के एक ढाबे में काम किया करते थे, पर लॉकडाउन में ढाबा बंद होने से काम छूटा और वे परिवार सहित गांव लौट गए. ग़रीबी और बेरोज़गारी से परेशान भानुप्रकाश ने 29 मई को ट्रेन के सामने आकर अपनी जान दे दी.

Jabalpur: Railway official provides drinking water from a distance to migrants travelling by a train to their native places, during the ongoing nationwide COVID-19 lockdown, at a railway station in Jabalpur, Wednesday, May 27, 2020. (PTI Photo) (PTI27-05-2020 000149B)(PTI27-05-2020 000198B)

‘मुंबई से गांव आने के लिए निकले, लेकिन उनका सफ़र रास्ते में ही ख़त्म हो गया’

बीते 26 मई को झांसी से गोरखपुर जा रही एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार आज़मगढ़ के 45 वर्षीय प्रवासी श्रमिक रामभवन मुंबई से अपने परिवार सहित घर लौट रहे थे, जब रास्ते में अचानक उनकी तबियत ख़राब होने लगी. परिजनों का कहना है कि समय पर उचित मेडिकल सहायता न मिलने के कारण उन्होंने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर दम तोड़ दिया.

अचलगढ़ में रह रहा फ्रेंच परिवार. (फोटो: करुणानिधि मिश्र)

दुनिया की सैर पर निकला था फ्रेंच परिवार, लॉकडाउन के चलते यूपी के एक गांव में दो महीने से फंसा है

दुनिया घूमने निकला फ्रांस का एक परिवार मार्च में भारत के रास्ते नेपाल जा रहा था, जब दोनों ही देशों में कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन के कारण वे भारत की सीमा में ही रह गया. बीते दो महीने से वे लोग महराजगंज ज़िले के अचलगढ़ गांव में रह रहे हैं.

Chandigarh: Migrants from various districts of Uttar Pradesh ride bicycles to reach their native places, during the ongoing COVID-19 lockdown, in the outskirts of Chandigarh, Saturday, May 16, 2020. (PTI Photo)(PTI16-05-2020 000062B)

‘फोन पर बोले साइकिल से निकले हैं, कुछ दिन में घर आ जाएंगे, पांच घंटे बाद उनकी मौत की ख़बर आई’

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले के बहुआस के रहने वाले राजू गुजरात के अंकलेश्वर में काम करते थे. चार मई को वे साइकिल से अपने गांव जाने के लिए निकले थे, इसी शाम उनका शव बड़ौदा के करजन में नेशनल हाईवे पर मिला.

Noida: A boy sits on the staircase of his house, during a nationwide lockdown to curb the spread of coronavirus, at a slum in Noida Sec-8, Wednesday, April 8, 2020. 200 people residing in the slum were taken to a quarantine facility on Tuesday night after they were traced to being in contact with positive COVID-19 patients. (PTI Photo/Vijay Verma)(PTI08-04-2020_000091B)

‘अब श्रमिक स्पेशल ट्रेन का और इंतज़ार नहीं होता, सफ़र की तारीख नहीं मिली तो पैदल ही चल देंगे’

दूसरे राज्यों में फंसे कामगारों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेन के रजिस्ट्रेशन की जद्दोजहद के बाद यात्रा की तारीख तय न होने से मज़दूर हताश हैं. कर्नाटक, कश्मीर और गुजरात के कई कामगार इस स्थिति से निराश होकर साइकिल या पैदल निकल चुके हैं या ऐसा करने के बारे में सोच रहे हैं.

Jabalpur: Migrants travel atop a loaded truck to their native places, during the ongoing COVID-19 nationwide lockdown, in Jabalpur, Wednesday, May 13, 2020. (PTI Photo)(PTI13-05-2020 000073B)

‘जब चले थे तो पता न था कि घर के इतने पास आकर दो साथियों का सफ़र ऐसे ख़त्म हो जाएगा’

देशव्यापी लॉकडाउन के बीच हैदराबाद से आ रहे उत्तर प्रदेश के महराजगंज के मज़दूरों का एक समूह 10 मई को कानपुर से एक बालू लदे ट्रक में सवार होकर घर की ओर निकला था, लेकिन गोरखपुर के सहजनवां थाना क्षेत्र के पास यह ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया, जिसमें दो श्रमिकों की जान चली गई.

Kolkata: Migrants ride on bicycles to their native places, during the ongoing COVID-19 nationwide lockdown, in Kolkata, Wednesday, May 6, 2020. (PTI Photo/Swapan Mahapatra)(PTI06-05-2020_000227B)

‘मैं जात-बिरादरी, हिंदू-मुसलमान नहीं जानता, दुश्मन भी मुसीबत में फंसे तो मदद करनी चाहिए’

महाराष्ट्र के भिवंडी में काम कर रहे पावरलूम मज़दूरों का एक समूह 25 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के महराजगंज आने के लिए साइकिल से निकला था. इस समूह के एक सदस्य तबारक अंसारी ने करीब 400 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद मध्य प्रदेश के सीमाई क्षेत्र के सेंदुआ में दम तोड़ दिया.

Thane: Migrants with their belongings ride on bicycles as they move towards their native places on the Mumbai-Nashik highway during the nationwide lockdown, in wake of the coronavirus pandemic, in Thane, Friday, May 1, 2020. (PTI Photo/Mitesh Bhuvad)(PTI01-05-2020_000219B) *** Local Caption ***

लॉकडाउन: राजस्थान से बिहार पहुंचे चार मज़दूर, कहीं पैदल तो कहीं साइकिल से पूरा किया सफ़र

बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले ये मज़दूर उदयपुर की जयसमंद झील में मछली पकड़ने का काम करते थे. लॉकडाउन का दूसरा चरण शुरू होने तक किसी तरह की मदद न मिलने पर इन्होंने घर का रुख़ किया. रास्ते में कहीं ट्रकवालों, तो कहीं ग्रामीणों की मदद से ये सभी 13 दिन बाद रविवार को अपने गांव पहुंचे हैं.

(फोटो: पीटीआई)

‘हैदराबाद से गोरखपुर के लिए 73 हजार रुपये में एम्बुलेंस ली थी, पर भाई पहुंचने से पहले ही चल बसे’

गोरखपुर ज़िले के भटहट क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले राजेंद्र और धर्मेंद्र निषाद हैदराबाद में काम करते थे, जहां लॉकडाउन के दौरान राजेंद्र की तबियत बिगड़ी और डॉक्टरों ने जवाब दे दिया. गांव की ज़मीन गिरवी रख और क़र्ज़ लेकर किसी तरह उन्हें घर लाया जा रहा था, जब उन्होंने गांव के रास्ते में दम तोड़ दिया.

Maharajganj Migrant Workers (1)

लॉकडाउन: हैदराबाद से साइकिल चलाकर मज़दूर दिवस पर महराजगंज पहुंचे सात कामगार

पूर्वी उत्तर प्रदेश के महराजगंज के सात मज़दूर काम करने हैदराबाद गए थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया. ऐसे में उन्होंने थोड़ी-बहुत जमापूंजी से साइकिल खरीदी और घर की ओर निकल पड़े.

Karnataka Workers Lockdown (1)

प्रधानमंत्री जी! आप ही बताएं कि हम लोग कोरोना से लड़ें कि भूख से…

उत्तर प्रदेश और बिहार के 34 मज़दूर कर्नाटक के शिमोगा ज़िले में फंसे हैं. बालू खनन का काम करने वहां गए मज़दूरों का कहना है कि जो थोड़े-बहुत पैसे थे, वो अब तक के लॉकडाउन के दौरान ख़त्म हो चुके हैं. अब अगर यहां से नहीं निकाला गया तो भुखमरी जान ले लेगी.

बढ़नी बार्डर पर नेपाली नागरिक.

भारत में फंसे 300 से अधिक नेपाली नागरिक 25 दिन बाद अपने देश पहुंचे

भारत में लॉकडाउन होने के बाद बीते पच्चीस दिनों से महराजगंज ज़िले के सोनौली, नौतनवां और बढ़नी में रह रहे नेपाली नागरिकों बीते शुक्रवार और शनिवार को दो चक्रों में नेपाल भेजा गया. वहीं नेपाल से भी 188 भारतीय वापस देश में आए हैं.

A migrant worker in the textile town of Bhiwandi, near Mumbai. Reuters

लॉकडाउन के दौरान महानगरों में मज़दूरों की मौत: जो घर पहुंचने की आस लिए दुनिया से ही चले गए

बीते दस दिनों में पूर्वी उत्तर प्रदेश के रहने वाले दो मज़दूरों ने बीमारी के चलते मुंबई और दिल्ली में दम तोड़ दिया, पर लॉकडाउन और ख़राब आर्थिक स्थिति के चलते परिजन उनका शव लाने नहीं जा सके. आजीविका के लिए परिवार से हज़ारों मील दूर रह रहे इन लोगों को अंतिम समय में भी अपनों का साथ नसीब नहीं हुआ.