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उमेश कुमार राय

(फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार के विश्वविद्यालयों में छात्र-छात्राओं के भविष्य से क्यों किया जा रहा है खिलवाड़?

ज्ञान की जब भी चर्चा होती है तो वो बिहार के ऐतिहासिक नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय का ज़िक्र किए बिना पूरी नहीं होती, लेकिन उसी बिहार में आज शिक्षा व्यवस्था का हाल ये है कि आधा दर्जन विश्वविद्यालयों में विभिन्न सत्रों की परीक्षाएं कई सालों से लटकी हुई हैं.

कहलगांव रेलवे स्टेशन. (फोटो: उमेश कुमार राय/द वायर)

क्या एनटीपीसी कहलगांव बिहार का ‘स्टरलाइट’ बनता जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्ट: नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन के कहलगांव स्थित थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख से आसपास के गांवों में रहने वाले लोग पिछले कई सालों से दमा, टीबी और फेफड़ों के संक्रमण जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं.

Patna: Prime Minister Narendra Modi being welcomed by Bihar Chief Minister Nitish Kumar and Bihar Governor Satyapal Malik upon his arrival at Jay Prakash Narayan International Airport in Patna on Tuesday. PTI Photo/PIB(PTI4_10_2018_000043B)

जोकीहाट उपचुनाव: क्या नीतीश कुमार को भाजपा से गठजोड़ की कीमत चुकानी पड़ी?

चुनाव परिणाम से साफ़ है कि बिहार के अल्पसंख्यक भाजपा के तेवर और उसके नेताओं के नफ़रत से भरे बयानों से बेहद नाराज़ हैं और उससे भी ज़्यादा नाराज़गी नीतीश कुमार की चुप्पी को लेकर है.

मोकामा टाल स्थित चिंतामणिचक के किसान भवेश कुमार का कहना है कि व्यापारी दाल खरीद भी लेते हैं तो तुरंत पैसा नहीं देते हैं. (फोटो: उमेश कुमार राय/द वायर)

दाल का कटोरा कहे जाने वाले मोकामा टाल के किसान नरेंद्र मोदी से नाराज़ क्यों है

बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट: लाखों दलहन किसान अपनी फसल को लागत से कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं.

कोसी की एक धारा को मोड़ कर दूसरी धारा से मिलाने के लिए पानी में कंक्रीट के पिलर डाले गए हैं. (फोटो: उमेश कुमार राय/द वायर)

कोसी के तटबंधों के बीच रहने वाली आबादी के लिए पलायन ही​ ज़िंदा रहने की इकलौती तरकीब है

बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट: ‘बिहार का शोक’ कही जाने वाली कोसी नदी के तटबंधों के भीतर रहने वाले लोगों से किया वादा सरकार ने आज तक नहीं निभाया, लिहाज़ा यहां रहने वाले लोग बेहद अमानवीय परिस्थितियों में जीवन जीने को अभिशप्त हैं.

Aurangabad: A scene of arson after violent clashes between two groups during a Ramnavmi procession in Aurangabad district on Monday. PTI Photo   (PTI3_26_2018_000132B)

बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट: क्या रामनवमी के बाद हुई हिंसा के लिए बाहरी ज़िम्मेदार थे?

रामनवमी के बाद बिहार के विभिन्न ज़िलों में फैली सांप्रदायिक हिंसा के एक महीने बाद इन इलाकों में हिंदू-मुस्लिमों के बीच किसी तरह का मनमुटाव या दुर्भावना नहीं दिखती.

गया से भाजपा सांसद हरि मांझी. (फोटो साभार: फेसबुक)

क्या गया एसएसपी का ट्रांसफर शराब मामले में गिरफ़्तार भाजपा सांसद के बेटे की वजह से हुआ?

बिहार की गया लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हरि मांझी के बेटे राहुल मांझी और उनके दोस्तों को शराब पीने की वजह से बीते 23 अप्रैल को गिरफ़्तार किया गया था.

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मोतिहारी चीनी मिल: आत्मदाह का एक साल बीता, उम्मीदों में पथराई आंखें

ग्राउंड रिपोर्ट: पिछले साल 10 अप्रैल को बिहार के पूर्वी चंपारन जिला मुख्यालय मोतिहारी में बंद पड़ी चीनी मिल के दो मजदूरों ने सैलरी और किसानों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर आत्मदाह कर लिया था.

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पश्चिम बंगाल में क्यों बढ़ रही हैं राजनीतिक हिंसा की वारदातें

बंगाल में राजनीतिक झड़पों में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य तौर पर तीन वजहें मानी जा रही हैं- बेरोज़गारी, विधि-शासन पर सत्ताधारी दल का वर्चस्व और भाजपा का उभार.

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बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट: नीतीश कुमार की शराबबंदी का नशा गरीबों को भारी पड़ रहा है

शराबबंदी क़ानून के तहत अब तक कुल 1 लाख 21 हज़ार 586 लोगों की ग़िरफ्तारी हुई है, जिनमें से अधिकांश बेहद ग़रीब तबके से आते हैं.

Amritsar: Farmers plant paddy seedlings in a field in a village near Amritsar on Friday. PTI Photo   (PTI6_16_2017_000065B)

बिहार के बटाईदार किसानों की सुध क्यों नहीं ले रही सरकार

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में किसान आत्महत्या की घटनाएं कम होने का मतलब यह कतई नहीं कि यहां के किसान खेती कर मालामाल हो रहे हैं. कृषि संकट के मामले में बिहार की तस्वीर भी दूसरे राज्यों की तरह भयावह है.

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नैनो प्लांट के लिए ली गई ज़मीन वापस मिलने के बाद भी सिंगुर के किसान क्यों दुखी हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट: ज़मीनी सच्चाई यह है कि जिन किसानों ने खेत वापसी के लिए आंदोलन किया आज वे भी मायूस हैं और जिन्होंने नैनो कार फैक्टरी के लिए अपनी इच्छा से ज़मीन दी थी वे भी. उनके लिए सिंगुर ऐसा ज़ख़्म है जो शायद ही कभी भर पाए.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at the ceremony to lay Foundation Stone of Projects under Namami Gange & National Highway projects, in Mokama, Bihar on October 14, 2017.

बिहार में मोदी की सभा के लिए चढ़ी थी 35 एकड़ फसल की बलि, किसानों को मुआवज़े में चवन्नी भी नहीं मिली

बिहार के पटना ज़िले में आने वाले मोकामा टाल में पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के लिए प्रशासन ने किसानों से ज़मीन ली थी, लेकिन साढ़े तीन महीने से अधिक वक़्त बीतने के बाद भी उन्हें बतौर मुआवज़ा कुछ नहीं मिला.