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उमेश कुमार राय

अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रचार करते संजय साहनी. (सभी फोटो: उमेश कुमार राय)

बिहार: सियासी चेहरों के बीच चुनावी मैदान में उतरा एक मनरेगा मज़दूर

ग्राउंड रिपोर्ट: मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के रत्नौली गांव के रहने वाले 33 वर्षीय संजय साहनी कुढ़नी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार हैं. सातवीं तक पढ़े संजय लंबे समय तक प्रवासी कामगार के बतौर दिल्ली में रहे हैं और अब मनरेगा के तहत मज़दूरी करते हुए आसपास के गांवों में मनरेगा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए जाने जाते हैं.

सुनीता देवी के पैर टखने के पास बेतरतीब तरीके से मुड़ गए हैं.

बिहार: फ्लोराइड से बर्बाद होती पीढ़ियां चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है

ग्राउंड रिपोर्ट: गया शहर से 8 किलोमीटर दूर चूड़ी पंचायत के चुड़ामननगर में कमोबेश हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति पानी से मिले फ्लोराइड के चलते शरीर में आई अक्षमता से प्रभावित है. बड़े-बड़े चुनावी वादों के बीच इस क्षेत्र के लोगों को साफ़ पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ गुप्तेश्वर पांडेय. (फोटो साभार: फेसबुक/@IPSGupteshwar)

क्या बिहार चुनाव से ऐन पहले डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का दोबारा वीआरएस लेना महज़ संयोग है

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने साल 2009 में पहली बार वीआरएस लिया था और तब चर्चा थी कि वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, हालांकि ऐसा नहीं हुआ. अब विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले उनके दोबारा वीआरएस लेने के निर्णय को उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जोड़कर देखा जा रहा है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

बिहार: 15 साल सरकार में रह चुकी भाजपा के लिए सुशांत सिंह राजपूत की मौत चुनावी मुद्दा क्यों है?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच सीबीआई, ईडी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो कर रहे हैं और तीनों ही केंद्र सरकार के अधीन हैं. केंद्र और बिहार में एनडीए की ही सरकार है. ऐसे में सवाल है कि ‘जस्टिस फॉर सुशांत सिंह राजपूत’ हैशटैग चलाकर बिहार में भाजपा जस्टिस किससे मांग रही है?

(फोटो: पीटीआई)

कोविड-19: क्या नीतीश सरकार की लापरवाही का नतीजा बिहार की जनता भुगत रही है

मार्च में जब देश में कोविड संक्रमण की शुरुआत हुई, तब बिहार में बहुत कम मामले सामने आए थे, लेकिन अब आलम यह है कि राज्य में संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र दोबारा लॉकडाउन लगाना पड़ा है और मुख्यमंत्री के परिजनों से लेकर कई ज़िलों के प्रशासनिक अधिकारी तक कोरोना की चपेट में आ चुके हैं.

Araria

बिहार: कोर्ट की अवमानना के आरोप में गैंगरेप पीड़िता व दो सामाजिक कार्यकर्ता गिरफ़्तार

मामला अररिया का है जहां गैंगरेप की एक पीड़िता दो सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराने गई थीं. इन सब पर कोर्ट के काम में व्यवधान डालने का आरोप है. कार्यकर्ताओं के सहयोगियों का कहना है कि पीड़िता बस उनकी मौजूदगी में बयान देना चाहती है, जिससे मजिस्ट्रेट नाराज़ हो गए.

People are seen inside a temporary quarantine centre, during an extended nationwide lockdown to slow the spread of the coronavirus disease (COVID-19), in Kolkata, India, April 15, 2020. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच क्वारंटीन सेंटर क्यों बंद कर रही है बिहार सरकार?

बीते सप्ताह बिहार सरकार ने 15 जून के बाद से सभी प्रखंड स्तरीय क्वारंटीन सेंटर्स को बंद करने का आदेश दिया है. दूसरे राज्यों से आ रहे कामगारों में कोविड संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लिए गए सरकार के इस फ़ैसले पर सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि इन सेंटर्स की फंड संबंधी गड़बड़ियों के चलते यह निर्णय लिया गया है.

Motihari east Champaran

बिहार: मुस्लिम युवक का आरोप, जय श्री राम का नारा न लगाने पर बेरहमी से पीटा गया

पूर्वी चंपारण ज़िले के मेहसी थाना क्षेत्र के एक युवक मोहम्मद इजराइल का आरोप है कि दो जून को पड़ोस के एक गांव में अपने दोस्त से मिलने जाने के दौरान एक समूह ने उन्हें रोककर जय श्री राम का नारा लगाने को कहा. ऐसा न करने पर गाली-गलौज करते हुए बुरी तरह मारपीट की गई. उनका कहना है कि हमलावर बजरंग दल से संबद्ध हैं.

पक्के बने घर के सामने मुकेश और मां. (सभी फोटो: Special Arrangement)

बिहार: मजिस्ट्रेट के अनूठे फ़ैसले ने बदल दी एक ग़रीब परिवार की ज़िंदगी

नालंदा ज़िले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक 16 वर्षीय किशोर को बीते मार्च महीने में एक महिला का पर्स चुराने के आरोप में पकड़ा गया था. उनके घर की तंग आर्थिक स्थिति और पृष्ठभूमि को देखते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट मानवेन्द्र मिश्र ने उन्हें सज़ा न देते एक मानवीय फ़ैसला सुनाया है.

ज्योति कुमारी. (फोटो: Special Arrangement)

पिता को साइकिल पर लेकर गुड़गांव से दरभंगा पहुंची ज्योति का ट्रायल लेगा साइकिलिंग फेडरेशन

15 साल की ज्योति कुमारी लॉकडाउन के बीच दस दिनों में क़रीब 1,200 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर गुड़गांव से बिहार के दरभंगा में अपने गांव पहुंची थीं. साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष का कहना है कि यह मामूली बात नहीं है. अगर ज्योति चाहें तो साइकिलिंग का ट्रायल देकर ट्रेनिंग ले सकती हैं.

ज्योति कुमारी. (फोटो: Special Arrangement)

चोटिल पिता को साइकिल पर बिठाकर गुड़गांव से दरभंगा पहुंची लड़की की कहानी

गुड़गांव में ऑटो रिक्शा चलाने वाले बिहार के मोहन पासवान एक एक्सीडेंट के बाद कई महीनों से घर पर थे. लॉकडाउन में कमाई और राशन दोनों का ही ठिकाना नहीं रहा. ऐसे में उनकी 15 साल की बेटी उन्हें अपनी साइकिल पर बैठाकर दस दिन में हज़ार किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर गुड़गांव से बिहार के दरभंगा पहुंची हैं.

मृतक रोहित जायसवाल. (फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार: मृत किशोर के पिता बोले, ‘मैं हिंदू-मुसलमान नहीं करना चाहता, मुझे सिर्फ़ इंसाफ़ चाहिए’

विशेष रिपोर्ट: बिहार के गोपालगंज ज़िले के एक गांव में बीते मार्च महीने में एक किशोर का शव पास की नदी से बरामद हुआ था. परिवार ने हत्या किए जाने का आरोप लगाया है. हालांकि कुछ समाचार वेबसाइट्स द्वारा मस्जिद में किशोर की बलि दिए जाने की भ्रामक ख़बरें प्रकाशित करने के बाद इस मामले ने सांप्रदायिक रंग ले लिया. पुलिस ने इस संबंध में ‘ऑपइंडिया’ और ‘ख़बर तक’ नाम की वेबसाइट के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है.

पश्चिम बंगाल के नैहट्टी जूट मिल में लगा ताला. (सभी फोटो: उमेश कुमार राय)

लॉकडाउन: भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके बंगाल जूट मिल मज़दूरों की आपबीती

विशेष रिपोर्ट: विभिन्न कारणों से जूट मिलों में आए दिन तालाबंदी से ये मज़दूर वैसे ही परेशान थे, फिर भी किसी तरह जी रहे थे, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से अचानक हुए लॉकडाउन के कारण मिलों की मशीनें जब खामोश हो गई हैं तो मजदूरों के सामने दाना-पानी का संकट पहाड़ की तरह खड़ा हो गया है.

ट्रेन के लिए राह देख रहे प्रवासी मजदूर (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: ‘जिस तकलीफ़ से घर लौटा हूं, अब से काम के लिए दूसरे राज्य जाने की हिम्मत नहीं होगी’

श्रमिक स्पेशल ट्रेन के किराये को लेकर सरकार के विभिन्न दावों के बीच गुजरात से बिहार लौटे कामगारों का कहना है कि उन्होंने टिकट ख़ुद खरीदा था. उन्होंने यह भी बताया कि डेढ़ हज़ार किलोमीटर और 31 घंटे से ज़्यादा के इस सफ़र में उन्हें चौबीस घंटों के बाद खाना दिया गया.

बिहार के नालंदा जिले के बिहार शरीफ में दुकानों पर लगाए गए भगवा झंडे, जिसे बाद में प्रशासन ने उतरवा दिया. (फोटो: वीडियो ग्रैब)

बिहार में पहचान के लिए दुकानों पर भगवा झंडा बांटने के आरोप में बजरंग दल सदस्यों पर केस

बिहार में नालंदा ज़िले के बिहार शरीफ़ का मामला. पुलिस ने बताया कि आईपीसी ​की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किए जाने के बाद आरोपियों की गिरफ़्तारी के लिए कार्रवाई की जा रही है.