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उमेश कुमार राय

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मोतिहारी चीनी मिल: आत्मदाह का एक साल बीता, उम्मीदों में पथराई आंखें

ग्राउंड रिपोर्ट: पिछले साल 10 अप्रैल को बिहार के पूर्वी चंपारन जिला मुख्यालय मोतिहारी में बंद पड़ी चीनी मिल के दो मजदूरों ने सैलरी और किसानों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर आत्मदाह कर लिया था.

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पश्चिम बंगाल में क्यों बढ़ रही हैं राजनीतिक हिंसा की वारदातें

बंगाल में राजनीतिक झड़पों में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य तौर पर तीन वजहें मानी जा रही हैं- बेरोज़गारी, विधि-शासन पर सत्ताधारी दल का वर्चस्व और भाजपा का उभार.

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बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट: नीतीश कुमार की शराबबंदी का नशा गरीबों को भारी पड़ रहा है

शराबबंदी क़ानून के तहत अब तक कुल 1 लाख 21 हज़ार 586 लोगों की ग़िरफ्तारी हुई है, जिनमें से अधिकांश बेहद ग़रीब तबके से आते हैं.

Amritsar: Farmers plant paddy seedlings in a field in a village near Amritsar on Friday. PTI Photo   (PTI6_16_2017_000065B)

बिहार के बटाईदार किसानों की सुध क्यों नहीं ले रही सरकार

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में किसान आत्महत्या की घटनाएं कम होने का मतलब यह कतई नहीं कि यहां के किसान खेती कर मालामाल हो रहे हैं. कृषि संकट के मामले में बिहार की तस्वीर भी दूसरे राज्यों की तरह भयावह है.

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नैनो प्लांट के लिए ली गई ज़मीन वापस मिलने के बाद भी सिंगुर के किसान क्यों दुखी हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट: ज़मीनी सच्चाई यह है कि जिन किसानों ने खेत वापसी के लिए आंदोलन किया आज वे भी मायूस हैं और जिन्होंने नैनो कार फैक्टरी के लिए अपनी इच्छा से ज़मीन दी थी वे भी. उनके लिए सिंगुर ऐसा ज़ख़्म है जो शायद ही कभी भर पाए.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at the ceremony to lay Foundation Stone of Projects under Namami Gange & National Highway projects, in Mokama, Bihar on October 14, 2017.

बिहार में मोदी की सभा के लिए चढ़ी थी 35 एकड़ फसल की बलि, किसानों को मुआवज़े में चवन्नी भी नहीं मिली

बिहार के पटना ज़िले में आने वाले मोकामा टाल में पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के लिए प्रशासन ने किसानों से ज़मीन ली थी, लेकिन साढ़े तीन महीने से अधिक वक़्त बीतने के बाद भी उन्हें बतौर मुआवज़ा कुछ नहीं मिला.