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उमेश कुमार राय

People are seen inside a temporary quarantine centre, during an extended nationwide lockdown to slow the spread of the coronavirus disease (COVID-19), in Kolkata, India, April 15, 2020. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच क्वारंटीन सेंटर क्यों बंद कर रही है बिहार सरकार?

बीते सप्ताह बिहार सरकार ने 15 जून के बाद से सभी प्रखंड स्तरीय क्वारंटीन सेंटर्स को बंद करने का आदेश दिया है. दूसरे राज्यों से आ रहे कामगारों में कोविड संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लिए गए सरकार के इस फ़ैसले पर सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि इन सेंटर्स की फंड संबंधी गड़बड़ियों के चलते यह निर्णय लिया गया है.

Motihari east Champaran

बिहार: मुस्लिम युवक का आरोप, जय श्री राम का नारा न लगाने पर बेरहमी से पीटा गया

पूर्वी चंपारण ज़िले के मेहसी थाना क्षेत्र के एक युवक मोहम्मद इजराइल का आरोप है कि दो जून को पड़ोस के एक गांव में अपने दोस्त से मिलने जाने के दौरान एक समूह ने उन्हें रोककर जय श्री राम का नारा लगाने को कहा. ऐसा न करने पर गाली-गलौज करते हुए बुरी तरह मारपीट की गई. उनका कहना है कि हमलावर बजरंग दल से संबद्ध हैं.

पक्के बने घर के सामने मुकेश और मां. (सभी फोटो: Special Arrangement)

बिहार: मजिस्ट्रेट के अनूठे फ़ैसले ने बदल दी एक ग़रीब परिवार की ज़िंदगी

नालंदा ज़िले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक 16 वर्षीय किशोर को बीते मार्च महीने में एक महिला का पर्स चुराने के आरोप में पकड़ा गया था. उनके घर की तंग आर्थिक स्थिति और पृष्ठभूमि को देखते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट मानवेन्द्र मिश्र ने उन्हें सज़ा न देते एक मानवीय फ़ैसला सुनाया है.

ज्योति कुमारी. (फोटो: Special Arrangement)

पिता को साइकिल पर लेकर गुड़गांव से दरभंगा पहुंची ज्योति का ट्रायल लेगा साइकिलिंग फेडरेशन

15 साल की ज्योति कुमारी लॉकडाउन के बीच दस दिनों में क़रीब 1,200 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर गुड़गांव से बिहार के दरभंगा में अपने गांव पहुंची थीं. साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष का कहना है कि यह मामूली बात नहीं है. अगर ज्योति चाहें तो साइकिलिंग का ट्रायल देकर ट्रेनिंग ले सकती हैं.

ज्योति कुमारी. (फोटो: Special Arrangement)

चोटिल पिता को साइकिल पर बिठाकर गुड़गांव से दरभंगा पहुंची लड़की की कहानी

गुड़गांव में ऑटो रिक्शा चलाने वाले बिहार के मोहन पासवान एक एक्सीडेंट के बाद कई महीनों से घर पर थे. लॉकडाउन में कमाई और राशन दोनों का ही ठिकाना नहीं रहा. ऐसे में उनकी 15 साल की बेटी उन्हें अपनी साइकिल पर बैठाकर दस दिन में हज़ार किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर गुड़गांव से बिहार के दरभंगा पहुंची हैं.

मृतक रोहित जायसवाल. (फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार: मृत किशोर के पिता बोले, ‘मैं हिंदू-मुसलमान नहीं करना चाहता, मुझे सिर्फ़ इंसाफ़ चाहिए’

विशेष रिपोर्ट: बिहार के गोपालगंज ज़िले के एक गांव में बीते मार्च महीने में एक किशोर का शव पास की नदी से बरामद हुआ था. परिवार ने हत्या किए जाने का आरोप लगाया है. हालांकि कुछ समाचार वेबसाइट्स द्वारा मस्जिद में किशोर की बलि दिए जाने की भ्रामक ख़बरें प्रकाशित करने के बाद इस मामले ने सांप्रदायिक रंग ले लिया. पुलिस ने इस संबंध में ‘ऑपइंडिया’ और ‘ख़बर तक’ नाम की वेबसाइट के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है.

पश्चिम बंगाल के नैहट्टी जूट मिल में लगा ताला. (सभी फोटो: उमेश कुमार राय)

लॉकडाउन: भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके बंगाल जूट मिल मज़दूरों की आपबीती

विशेष रिपोर्ट: विभिन्न कारणों से जूट मिलों में आए दिन तालाबंदी से ये मज़दूर वैसे ही परेशान थे, फिर भी किसी तरह जी रहे थे, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से अचानक हुए लॉकडाउन के कारण मिलों की मशीनें जब खामोश हो गई हैं तो मजदूरों के सामने दाना-पानी का संकट पहाड़ की तरह खड़ा हो गया है.

ट्रेन के लिए राह देख रहे प्रवासी मजदूर (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: ‘जिस तकलीफ़ से घर लौटा हूं, अब से काम के लिए दूसरे राज्य जाने की हिम्मत नहीं होगी’

श्रमिक स्पेशल ट्रेन के किराये को लेकर सरकार के विभिन्न दावों के बीच गुजरात से बिहार लौटे कामगारों का कहना है कि उन्होंने टिकट ख़ुद खरीदा था. उन्होंने यह भी बताया कि डेढ़ हज़ार किलोमीटर और 31 घंटे से ज़्यादा के इस सफ़र में उन्हें चौबीस घंटों के बाद खाना दिया गया.

बिहार के नालंदा जिले के बिहार शरीफ में दुकानों पर लगाए गए भगवा झंडे, जिसे बाद में प्रशासन ने उतरवा दिया. (फोटो: वीडियो ग्रैब)

बिहार में पहचान के लिए दुकानों पर भगवा झंडा बांटने के आरोप में बजरंग दल सदस्यों पर केस

बिहार में नालंदा ज़िले के बिहार शरीफ़ का मामला. पुलिस ने बताया कि आईपीसी ​की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किए जाने के बाद आरोपियों की गिरफ़्तारी के लिए कार्रवाई की जा रही है.

हमले में घायल कृष्णा मुसहर.

बिहार: भोजपुर में महादलितों के घरों पर हमला, छह लोगों को गोली मारी

घटना भोजपुर ज़िले के तरारी थाना क्षेत्र के सारा गांव की है. पुलिस के मुताबिक गांव के प्रभावशाली जातियों के कुछ लोग महिलाओं से छेड़छाड़ के इरादे से मुसहर टोली में घुसे थे. विरोध होने पर उन्होंने फायरिंग की, जिसमें एक साल की बच्ची समेत छह लोग घायल हो गए हैं.

मृत बच्चे की मां सोनमती. (फोटो: Special arrangement)

लॉकडाउन: भूख से हुई बच्चे की मौत, मां ने कहा- कर्फ्यू के बाद नहीं बना खाना

घटना बिहार के भोजपुर ज़िले के आरा की है. मुसहर समुदाय से आने वाले आठ वर्षीय राकेश की मौत 26 मार्च को हो गई थी. उनकी मां का कहना है कि लॉकडाउन के चलते उनके पति का मजदूरी का काम बंद था, जिसके चलते 24 मार्च के बाद उनके घर खाना नहीं बना था.

Patna: Medics take samples from a patient in the isolation ward of novel coronavirus (COVID-19) at Patna Medical College and Hospital (PMCH) in Patna, Saturday, March 14, 2020. (PTI Photo)(PTI14-03-2020_000040B)

बिहार: तेज़ी से बढ़ रहे कोरोना के मामलों के बीच नीतीश सरकार की लचर तैयारी

बिहार में दिनोंदिन बढ़ रहे कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच संक्रमित मरीज़ों के इलाज में लगे डॉक्टरों का कहना है कि पर्याप्त आइसोलेशन बेड व सुरक्षा उपाय तो दूर, उन्हें सबसे बुनियादी चीज़ें मास्क और सैनिटाइज़र तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं.

Prashant Kishor, political strategist of India's main opposition Congress party, is pictured at a hotel in New Delhi, India May 15, 2016. To match Insight INDIA-CONGRESS/ REUTERS/Anindito Mukherjee

विवादों के घेरे में क्यों है प्रशांत किशोर का ‘बात बिहार की’ अभियान?

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ‘बात बिहार की’ नाम से एक अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान को लेकर प्रशांत किशोर पर आइडिया चोरी करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई है.

Patna: Election strategist and JDU leader Prashant Kishor addresses a press conference at his party office, in Patna, Monday, Feb. 11, 2019. (PTI Photo)(PTI2_11_2019_000098B)

नीतीश कुमार से अलग हुए प्रशांत किशोर बिहार विधानसभा चुनाव में क्या गुल खिलाएंगे?

जदयू से बाहर निकाले जाने के बाद प्रशांत किशोर ने ‘बात बिहार की’ कैंपेन शुरू किया है. उनका कहना है कि इसके ज़रिये वे सकारात्मक राजनीति करने के इच्छुक युवाओं को जोड़ना चाहते हैं. कैंपेन के तहत उनके द्वारा दिए जा रहे आंकड़े बिहार की एनडीए सरकार के राज्य में पिछले 15 सालों में हुए विकास के दावों पर सवाल उठाते हैं.

शहीद जवान संजय कुमार सिन्हा की पत्नी बेबी देवी. (फोटो: उमेश कुमार राय)

सरकार से क्यों नाराज़ हैं पुलवामा हमले के शहीदों के परिवार

विशेष रिपोर्ट: 14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले में बिहार के रहने वाले दो सीआरपीएफ जवान भी शहीद हुए थे. हमले के एक साल बाद इनके परिजनों का कहना है कि शहादत के बाद सरकार की तरफ से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सारे कागज़ी निकले.