मध्य प्रदेश के मैहर ब्लॉक के भटगांव सरकारी हाई स्कूल में गणतंत्र दिवस के अवसर पर छात्रों को पुरानी किताबों से फाड़े गए पन्नों पर पूरी और हलवा परोसा गया. इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ज़िला प्रशासन ने स्कूल के वरिष्ठ अधिकारियों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने जाति-आधारित भेदभाव से निपटने के लिए जारी यूजीसी के नए दिशानिर्देशों पर रोक लगा दी है. अदालत ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से निपटने के लिए बनाए गए इन नियमों के दुरुपयोग होने की संभावना है. ये नए विनियएम अब 19 मार्च तक स्थगित रहेंगे.
यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम अधिसूचित किए जाने के बाद कथित ऊंची जातियां और दक्षिणपंथी संगठन व्यापक विरोध कर रहे हैं. यह विरोध सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर से भी सामने आया है, जहां कई नेता इन नियमों के ख़िलाफ़ खुलकर बोल रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाली कई रसोइया रोज़ाना हजारों बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं, लेकिन उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, जो दिहाड़ी मज़दूरों की मज़दूरी से भी कम है. अधिकांश रसोइयों के पास न तो स्वास्थ्य बीमा है और न ही पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं, जिससे उनकी नौकरी की असुरक्षा और भी बढ़ जाती है.
13 जनवरी को यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं. ये नियम जाति-आधारित भेदभाव से जुड़ी शिकायतों को दर्ज करने और उन पर कार्रवाई करने की स्पष्ट व्यवस्था और प्रक्रिया तय करते हैं. इसके तहत जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर ओबीसी को भी इसमें शामिल किया गया है. हालांकि, कई 'उच्च जाति' वर्ग इसका कड़ा विरोध कर रही हैं.
एनएमसी द्वारा वैष्णोदेवी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति वापस लिए जाने के बाद संस्थान में दाख़िला ले चुके 50 एमबीबीएस छात्र बिना कॉलेज के रह गए हैं. वहीं, राज्य बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए नई काउंसलिंग कराने से इनकार करते हुए सरकार से कहा है कि वह अपने स्तर पर इन छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों पर दाख़िला दिलाए.
मुंबई की एक अदालत टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के उन छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज मामला सुन रही है. छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने दिवंगत प्रोफेसर जीएन साईबाबा की पहली पुण्यतिथि पर एकत्रित होकर कार्यक्रम आयोजित किया था. कोर्ट ने उनकी अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई को इस महीने के अंत तक के लिए स्थगित करते हुए पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को बढ़ा दिया है.
गुजरात के बनासकांठा जिले में संभावित दूषित खाने या पानी से एक स्कूल के 43 विद्यार्थी बीमार पड़ गए. ये छात्र जगाणा गांव स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल के छात्रवास में रह रहे थे, जहां मिड-डे मील खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पॉलिटेक्निक में एक शिक्षक पर एक लिपिक के साथ मारपीट करने और जातिसूचक गाली देने का आरोप लगा है. वायरल वीडियो और कर्मचारी की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
यूजीसी द्वारा संसदीय समिति और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला है कि देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में पिछले पांच वर्षों में 118.4% की वृद्धि हुई है. इस संबंध में दर्ज की गई घटनाओं की संख्या 2019-20 में 173 से बढ़कर 2023-24 में 378 हो गई.
मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के छात्रावास में असम के 22 वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट छात्र के साथ कथित तौर पर नस्लीय भेदभाव के चलते मारपीट की गई. यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पिछले महीने ही नस्लीय घृणा के कारण उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या कर दी गई थी.
कटरा में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस का पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद भाजपा और उसके सहयोगी दलों अब केंद्र शासित प्रदेश में आगामी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) को कश्मीर घाटी से जम्मू स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं.
कोई व्यक्ति जब एक लोकतांत्रिक परिवेश में बोलता है, वह यह शर्त कैसे लगा सकता कि उसे सुना ही जाए. आप बोलिए, मगर सुनने का अधिकार श्रोताओं के पास सुरक्षित रहता है: यह अधिकार संवैधानिक है. न सुनना भी इक तरह की अभिव्यक्ति ही है. मनोज रूपड़ा भी कुलपति के विषय से भटके हुए भाषण को न सुनकर अपनी अभिव्यक्ति के अधिकार का ही उपयोग कर रहे थे.
छत्तीसगढ़ के एक सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका को कक्षा चार के अंग्रेजी प्रश्न पत्र में कथित तौर पर एक सवाल में 'राम' नाम के उल्लेख को लेकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. साथ ही, संविदा पर कार्यरत एक अन्य सहायक शिक्षिका, जो पेपर मॉडरेटर थीं, उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्यवाही चल रही है.
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था नेशनल एजुकेशन सोसायटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स, जो एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की देखरेख करती है, ने स्कूलों को अपने आयोजनों में सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने की सलाह दी है. शिक्षाविदों ने इस क़दम को स्कूलों के राजनीतिकरण क़रार देते हुए आलोचना की है.