महात्मा गांधी

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मोदी की आलोचना गुनाह है; मोदी के मंत्रियों का राहुल बजाज पर हमला

बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज ने एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से कहा कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तो हम किसी की भी आलोचना कर सकते थे. अब हम अगर आपकी खुले तौर पर आलोचना करें तो यह यकीन नहीं है कि आप इसे पसंद करेंगे. इस बारे में चर्चा कर रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

Rahul-Bajaj-Reuters

राहुल बजाज ने अमित शाह से कहा- देश में डर का माहौल, लोग आलोचना करने से डरते हैं

बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज ने इकोनॉमिक टाइम्स के एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से कहा कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तो हम किसी की भी आलोचना कर सकते थे. अब हम अगर आपकी खुले तौर पर आलोचना करें तो इतना विश्वास नहीं है कि आप इसे पसंद करेंगे.

**EDS: RPT WITH DETAIL**Mumbai: BJP MP Pragya Singh Thakur arrives at sessions court for the hearing of Malegaon blast case in Mumbai, Friday, June 7, 2019. Six people were killed and over 100 injured when an explosive device strapped to a motorcycle went off near a mosque in Malegaon on September 29, 2008. According to police, the motorbike was registered in Thakur's name and that led to her arrest in 2008. (PTI Photo/Shashank Parade)(PTI6_7_2019_000032B)

गांधी का सम्मान करती हूं, मेरी किसी टिप्पणी से ठेस लगी हो तो माफ़ी चाहती हूं: प्रज्ञा ठाकुर

लोकसभा में नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ कहने पर हुए विवाद के बाद भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि उनके बयान को ग़लत तरह से पेश किया गया. इस बयान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ठाकुर के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज करवाया है.

Pragya Thakur Reuters

गोडसे को ‘देशभक्त’ बताने वाला बयान देने के बाद प्रज्ञा ठाकुर संसदीय समिति से बाहर

लोकसभा में प्रज्ञा ठाकुर द्वारा नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने को भाजपा ने निंदनीय बताते हुए उन्हें रक्षा मंत्रालय की परामर्श समिति से बाहर किए जाने की बात कही. साथ ही बताया कि उन्हें इस सत्र में पार्टी की संसदीय दल की बैठकों में हिस्सा लेने की अनुमति भी नहीं होगी.

**EDS: RPT WITH DETAIL**Mumbai: BJP MP Pragya Singh Thakur arrives at sessions court for the hearing of Malegaon blast case in Mumbai, Friday, June 7, 2019. Six people were killed and over 100 injured when an explosive device strapped to a motorcycle went off near a mosque in Malegaon on September 29, 2008. According to police, the motorbike was registered in Thakur's name and that led to her arrest in 2008. (PTI Photo/Shashank Parade)(PTI6_7_2019_000032B)

लोकसभा में प्रज्ञा ठाकुर ने नाथूराम गोडसे को फिर बताया देशभक्त

एसपीजी संशोधन विधेयक पर हो रही बहस में द्रमुक सांसद ए. राजा नाथूराम गोडसे के एक बयान का संदर्भ दे रहे थे, जब भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने उन्हें टोकते हुए कहा कि आप एक देशभक्त का उदाहरण नहीं दे सकते.

(फोटो साभार: Nehru Memorial Library)

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (फोटो: पीटीआई)

हमारे हित में है आईसीईपी, बाहर रहे तो नहीं आएगी कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी: अरविंद पनगढ़िया

अगस्त 2017 में नीति आयोग से इस्तीफा देने वाले अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि आप आरसीईपी बाहर नहीं रह सकते हैं क्योंकि इसका मतलब होगा कि हम जो भी उन 15 देशों के बाजारों में निर्यात करेंगे उन पर भारी शुल्क लगेगा. वहीं, वे बिना किसी रोक-टोक के अपना सामान निर्यात करेंगे. इससे हमारे निर्यातकों को बहुत नुकसान होगा.

RCEP Protest PTI

महात्मा गांधी की ओट लेकर आरसीईपी से बाहर रहने का फ़ैसला बहानेबाज़ी जैसा है

दुनिया की एक बड़ी आर्थिक शक्ति होने को लेकर भारत का दावा और शोर-शराबा ज़मीनी हक़ीक़त से मेल नहीं खाता.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (फोटो: रॉयटर्स)

क्या सरदार पटेल का सपना वही था, जो भाजपा बता रही है?

‘गांधी के रामराज्य के बारे में तुम क्या जानते हो? गांधी के राम के बारे में ही तुम क्या जानते हो? वैसे तुलसी के राम के बारे में ही तुम क्या जानते हो? सावरकर हो या गोलवलकर, उनके हिंदू राष्ट्र का हमारे रामराज्य से क्या लेना-देना?’

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सावरकर को भारत रत्न देना आज़ादी के नायकों का अपमान है

क्या ऐसा शख़्स, जिसने अंग्रेज़ सरकार के पास माफ़ीनामे भेजे, जिन्ना से पहले धर्म के आधार पर राष्ट्र बांटने की बात कही, भारत छोड़ो आंदोलन के समय ब्रिटिश सेना में हिंदू युवाओं की भर्ती का अभियान चलाया, भारतीयों के दमन में अंग्रेज़ों का साथ दिया और देश की आज़ादी के अगुआ महात्मा गांधी की हत्या की साज़िश का सूत्रसंचालन किया, वह किसी भी मायने में भारत रत्न का हक़दार होना चाहिए?

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी. (फोटो: पीटीआई)

सावरकर ने आज़ादी की लड़ाई में भूमिका निभाई, देश के लिए जेल गए: अभिषेक मनु सिंघवी

इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने सावरकर की याद में डाक टिकट जारी किया था.

जवाहरलाल नेहरू. (फोटो साभार: IISG/Flickr (CC BY-SA 2.0)

कश्मीर और 370 से लेकर विभाजन तक नेहरू के प्रति भाजपा की नफ़रत झूठ की बुनियाद पर टिकी है

गृहमंत्री अमित शाह ने अगस्त में दिए एक भाषण में कहा था कि अगर नेहरू न होते, तो पाक अधिकृत कश्मीर भारत के कब्ज़े में होता. सच तो यह है कि अगर आज कश्मीर भारत का हिस्सा है तो यह केवल नेहरू के चलते ही है.

Mahatma Gandhi Photo Wikimedis commons

गुजरात: स्कूल की परीक्षा में पूछा गया, गांधीजी ने आत्महत्या करने के लिए क्या किया?

इस सवाल को लेकर विवाद होने के बाद अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है. हालांकि स्कूल प्रशासन ने महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ का हवाला देते हुए कहा है कि सवाल में कोई गलती नहीं है.

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गांधी के देश में अमित शाह की सांप्रदायिकता

वीडियो: हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता की एक रैली में कहा कि हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन को देश छोड़कर नहीं जाना होगा. उनके इस बयान पर चर्चा कर रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi paying homage at the Samadhi of Mahatma Gandhi on his 150th birth anniversary, at Rajghat, in Delhi on October 02, 2019.

गांधी की 150वीं जयंती पर राजद्रोह क़ानून को ख़त्म करना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी

ब्रिटिश राज में बने राजद्रोह क़ानून को सरकारों द्वारा अक्सर आज़ाद अभिव्यक्ति रखने वालों या सत्ता के विरुद्ध बोलने वालों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया गया है.

फोटो साभार: thierry ehrmann/Flickr CC BY 2.0

बापू के नाम: आज आप जैसा कोई नहीं, जो भरोसा दिला सके कि सब ठीक हो जाएगा

जयंती विशेष: जिस दौर में गांधी को ‘चतुर बनिया’ की उपाधि से नवाज़ा जाए, उस दौर में ये लाज़िम हो जाता है कि उनकी कही बातों को फिर समझने की कोशिश की जाए और उससे जो हासिल हो, वो सबके साथ बांटा जाए.

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अभी गांधी की बात करना क्यों ज़रूरी है?

आज हमारे सामने ऐसे नेता हैं जो केवल तीन काम करते हैं: वे भाषण देते हैं, उसके बाद भाषण देते हैं और फिर भाषण देते हैं. सार्वजनिक राजनीति से करनी और कथनी में केवल कथनी बची है. गांधी उस कथनी को करनी में तब्दील करने के लिए ज़रूरी हैं.

गुजरात के दांडी में महात्मा गांधी की प्रतिमा. (फोटो साभार: ट्विटर/नरेंद्र मोदी)

मैं मोहनदास करमचंद गांधी अब राष्ट्रपिता नहीं कहलाना चाहता…

आज राष्ट्र को वास्तविक पिता की ज़रूरत है, मेरे जैसे सिर्फ नाम के पिता से काम नहीं चलने वाला है. आज बड़े-बड़े फ़ैसले हो रहे हैं. छप्पन इंच की छाती दिखानी पड़ रही है. ऐसा पिता जो पब्लिक को कभी थप्पड़ दिखाए तो कभी लॉलीपॉप, पर अपने तय किए रास्ते पर ही राष्ट्र को ठेलता जाए. मैं ऐसे राष्ट्रपिता की ज़रूरत कैसे पूरी कर सकता हूं?

भगत सिंह (फोटो: द वायर)

भगत सिंह को गांधी या नेहरू का विकल्प बताना भगत सिंह के साथ अन्याय करना है

ऐसा लगता है कि भगत सिंह के प्रति श्रद्धा वास्तव में गांधी-नेहरू से घृणा का दूसरा नाम है. जिनके वैचारिक पूर्वज ख़ुद को बचाते हुए अपने अनुयाइयों को भगत सिंह से दूर रहने की सलाह देते हुए दिन गुज़ारते रहे, उन्होंने अपनी कायर हिंसा को उचित ठहराने के लिए आज भगत सिंह को एक ढाल बना लिया है.

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‘गांधी और जिन्ना ने एक दूसरे को समझा होता तो देश का इतिहास कुछ और होता’

वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका शीला रेड्डी से उनकी किताब ‘मिस्टर एंड मिसेज़ जिन्नाः द मैरिज दैट शूक इंडिया’ को लेकर रीतू तोमर से बातचीत.

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जब गांधी ने ज़रूरत पड़ने पर ‘हिंसक साधनों’ का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी

आज़ादी के 72 साल: स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी की भूमिका के बारे में काफी कुछ लिखा गया है, मगर उत्तर-पूर्व को आज़ाद भारत के साथ जोड़ने में उन्होंने जिस तरह से नेतृत्व किया, इस बारे में काफी कम लिखा गया है.

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नकली इतिहास भारत पर प्रेतात्मा बन कर छाया हुआ है

आज़ादी के 72 साल: स्मृति के रूप में जीवित विभाजन एक मौखिक संसार है, जो चुप्पियों में दबा हुआ है, नाउम्मीदी की भाषा में फंसा हुआ है. 72 सालों के बाद भी जिसके ज़ख़्म भरने का नाम नहीं लेते.

(फोटो: पीटीआई)

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 72 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

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जब प्रेमचंद ने महात्मा गांधी का भाषण सुनकर सरकारी नौकरी छोड़ दी थी…

वह असहयोग आंदोलन का ज़माना था, प्रेमचंद गंभीर रूप से बीमार थे. बेहद तंगी थी, बावजूद इसके गांधी जी के भाषण के प्रभाव में उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

न सॉफ्ट हिंदुत्व और न ही सॉफ्ट सेकुलरिज़्म कांग्रेस को उबार सकते हैं

आज कांग्रेस के सामने चुनौती पार्टी का कायाकल्प ऐसे दल के तौर पर करने की है, जो अपने पुराने वैभव और साम्राज्य के बिखर जाने की टीस से बाहर निकलकर यह कबूल करे कि अब उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है और बचाव की मुद्रा से बाहर निकलकर आक्रामक अंदाज़ में खेलना शुरू करे.

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शिव प्रसाद गुप्त: गांधी ने जिन्हें राष्ट्ररत्न कहा था, लोगों ने उन्हें भुला दिया

वाराणसी के समाजसेवी शिवप्रसाद गुप्त को आज उनके शहर के बाहर कोई जयंती या पुण्यतिथि पर भी याद नहीं करता, लेकिन कभी देश की आज़ादी की लड़ाई के साथ समाज के उत्थान में उनके योगदान के चलते महात्मा गांधी उन्हें राष्ट्ररत्न कहा करते थे.

विनायक दामोदर सावरकर. (फोटो साभार: ट्विटर/@VasundharaBJP)

राजस्थान सरकार ने बोर्ड की किताबों में सावरकर के नाम के आगे से ‘वीर’ हटाया

राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने इससे पहले भी सावरकर की जीवनी में बदलाव किया था और उन्हें वीर की जगह अंग्रेजों से माफी मांगने वाला बताया गया था.

गुजरात के दांडी में महात्मा गांधी की प्रतिमा. (फोटो साभार: ट्विटर/नरेंद्र मोदी)

बदहवास भारत में भाषा का भसान

जो गांधी के विचारों के समर्थक और शांति के पैरोकार हैं, ख़ुद एक दिमाग़ी बुखार में गिरफ़्तार हैं. हिंसा हमारा स्वभाव हो गई है. हम हमला करने का पहला मौका छोड़ना नहीं चाहते. पढ़ने-सुनने के लिए जो समय और धीरज चाहिए, हमने वह जानबूझकर गंवा दिया है.

ग्वालियर में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का जन्मदिन मनाते हिंदू महासभा के लोग. (फोटो साभार: एमपीतक/यूट्यूब)

हिंदू महासभा ने गोडसे का जन्मदिन मनाया, राष्ट्रपति से की राजघाट तोड़ने की मांग

अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर और उत्तर प्रदेश के मेरठ और अलीगढ़ में नाथूराम गोडसे का जन्मदिन मनाया. इनका कहना है कि गोडसे ने गांधी की हत्या धर्म की रक्षा के लिए की थी.

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प्रज्ञा ठाकुर को पार्टी से बाहर निकालकर भाजपा को निभाना चाहिए राजधर्म: कैलाश सत्यार्थी

शांति के क्षेत्र में नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की थी लेकिन प्रज्ञा ठाकुर जैसे लोग गांधी की आत्मा की हत्या कर रहे हैं.

(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)

‘यह गांधी कौन था?’ ‘वही, जिसे गोडसे ने मारा था’

जब गोडसे की जय-जयकार होगी, तब यह तो बताना ही पड़ेगा कि उसने कौन-सा महान कर्म किया था. बताया जाएगा कि उस वीर ने गांधी को मार डाला था. गांधी गोडसे के बहाने याद किए जाएंगे. अभी तक गोडसे को गांधी के बहाने याद किया जाता था. एक महान पुरुष के हाथों मरने का कितना फायदा मिलेगा गांधी को.

राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा. (फोटो साभार: ट्विटर)

राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने कहा- किताबों से हटाया जाएगा नोटबंदी का पाठ

राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह दोतासरा ने कहा कि नोटबंदी सबसे असफल प्रयोग था. नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री ने जिन तीन उद्देश्यों- आतंकवाद, भ्रष्टाचार को खत्म करने और कालाधन को वापस लाने, का उल्लेख किया था, उन्हें हासिल नहीं किया जा सका.

विनायक दामोदर सावरकर. (फोटो साभार: ट्विटर/@VasundharaBJP)

राजस्थानः पाठ्यक्रम में बदलाव, सावरकर को वीर की जगह अंग्रेज़ों से माफ़ी मांगने वाला बताया

राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने शिक्षा विभाग को प्रयोगशाला बना दिया था, आरएसएस के राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किए गए थे. राजनीतिक हितों के लिए सावरकर की बढ़िया छवि गढ़ी गई थी.

Surat: Sadhvi Pragya Singh Thakur during a roadshow at an event in Surat on Tuesday. PTI Photo(PTI4_24_2018_000059B)

साध्वी प्रज्ञा को प्रत्याशी बना भाजपा देखना चाहती है कि हिंदुओं को कितना नीचे घसीटा जा सकता है

लोग कह रहे हैं कि इस चुनाव में भाजपा का भरोसा छूट रहा है, उसने साध्वी को लाकर ब्रह्मास्त्र चलाया है. यह परीक्षा वास्तव में भाजपा की नहीं है, यह हिंदुओं का इम्तिहान है. क्या वे धर्म के इस अर्थ को स्वीकार करने को तैयार हैं?

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आंबेडकर को जितना अस्वीकार वर्तमान राजनीति ने किया है, उतना किसी और ने नहीं किया

जब कोई फल पक जाता है, तब उसे तोड़ने के लिए सभी लपक पड़ते हैं. उसी तरह आज राजनीति में आंबेडकर चहेते हो गए हैं, लेकिन आंबेडकर दिखने में चाहे जितने आकर्षक हों, अपनाने में उतने ही कठिन हैं. वर्तमान राजनीतिक दल इस बात को जानते हैं इसीलिए वे 14 अप्रैल और 6 दिसंबर पर उनका नाम तो लेते हैं लेकिन उनकी वैचारिक तेजस्विता से डरते हैं.

New Delhi: Union Minister for Women & Child Development Maneka Gandhi addresses a press conference regarding her ministry's achievements and initiatives, in New Delhi on Wednesday, June 06, 2018. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI6_6_2018_000064B)

मेनका गांधी ने कहा, अगर मुस्लिम मुझे वोट नहीं देंगे तो मैं भी उनके लिए काम नहीं करूंगी

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि हम लोग महात्मा गांधी की छठी औलाद हैं कि हम देते ही जाएंगे और फिर चुनाव में मात खाएंगे. यह जीत मुसलमान के बिना भी होगी, उनके साथ भी होगी.’

South Dinajpur: West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee during an election rally at Safanagar in South Dinajpur district of West Bengal,on Sunday.PTI Photo(PTI4_10_2016_000223A)

राष्ट्रवाद पर उन लोगों से सबक लेने की ज़रूरत नहीं, जिन्होंने गांधी की हत्या की: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि लोगों को सच से वंचित रखा जा रहा है क्योंकि राष्ट्रीय मीडिया का एक तबका नरेंद्र मोदी को सपोर्ट कर रहा है. यह शर्म की बात है कि मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं.

महात्मा गांधी के पुतले को गोली मारती हुई हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडे (फोटो: ट्विटर)

महात्मा गांधी के पुतले को गोली मारने वाली हिंदू महासभा की नेता पूजा पांडेय गिरफ़्तार

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडेय गांधी जी के पुतले को गोली मारते हुए नज़र आ रही थी. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने इस पुतले को जला दिया था.