2002 Gujarat riots

**FILE** New Delhi: In this file photo dated October 01, 2011, shows suspended IPS officer Sanjiv Bhatt being produced in the court, in Ahmadabad. According to the officials, Bhatt was arrested on Wednesday, Sept 05, 2018, by the Gujarat CID in connection with a 22-year-old case of alleged planting of drugs to arrest a man. (PTI Photo) (PTI9_5_2018_000267B)

गुजरात: 16 साल में हिरासत में मौत के 180 मामले सामने आए लेकिन किसी पुलिसकर्मी को सज़ा नहीं हुई

हिरासत में हिंसा और मौत के मामलों में गुजरात सरकार का अपनी पुलिस के साथ खड़े रहने का एक अनकहा-सा रिवाज़ रहा है, लेकिन संजीव भट्ट के मामले में ऐसा नहीं दिखता.

गुजरात के दाहोद जिले में मतदान करने के बाद बिल्किस बानो  (फोटो साभार: भूपेंद्र राणा/इंडियन एक्सप्रेस)

बिलक़ीस का क़िस्सा हर हिंदुस्तानी को सुनना और उसके मायने समझना ज़रूरी है

बिलक़ीस बानो को किसने सत्रह सालों तक उसके मताधिकार से वंचित रखा? कौन था गुजरात का मुखिया और किसके हाथ हिंदुस्तान की हुकूमत थी? क्यों सालों-साल बिल्किस अपने कुनबे के साथ भटकती रही पूरे भारत, जगह बदलती हुई, पोशीदा ज़िंदगी बिताती हुई? क्यों वह वहां महफूज़ न थी, जिसे वह अपना वतन कहती है?

बाबू बजरंगी, (फोटो: पीटीआई)

नरोदा पाटिया नरसंहार के दोषी बाबू बजरंगी को मिली ज़मानत

साल 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में बाबू बजरंगी दोषी क़रार दिए जाने के बाद 21 साल की सजा काट रहे हैं. दंगे भड़कने के बाद अहमदाबाद के नरोदा पाटिया क्षेत्र में 28 फरवरी 2002 को भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी थी.

New Delhi: A view of the Supreme Court, in New Delhi, on Thursday. (PTI Photo / Vijay Verma)(PTI5_17_2018_000040B)

नरोदा पाटिया दंगा: 10 साल की सज़ा पाने वाले चार दोषियों को ज़मानत

साल 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के एक दिन बाद राज्य में भड़के दंगों में अहमदाबाद के नरोदा पाटिया क्षेत्र में भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी. मारे गए ज़्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदाय के थे.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी. (फोटो साभार: ट्विटर)

2002 के दंगों के बाद बिगड़ी छवि को सुधारने में मददगार रहा वाइब्रेंट गुजरात: विजय रूपाणी

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि हर वाइब्रेंट समिट में विदेशी निवेशकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. हर निवेश यह साबित करता है कि गुजरात ने अपनी छवि बरकरार रखी है.

नरेंद्र मोदी और जकिया जाफ़री. (फोटो: पीटीआई)

गुजरात दंगा: मोदी को क्लीनचिट देने के ख़िलाफ़ ज़किया जाफ़री की याचिका पर सुनवाई टली

विशेष जांच दल ने साल 2012 को मामला बंद करने की रिपोर्ट दाख़िल की थी जिसमें नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों सहित 63 अन्य लोगों को क्लीनचिट देते हुए कहा गया था कि इनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने योग्य साक्ष्य नहीं हैं.

सज्जन कुमार (फोटो: पीटीआई)

चौरासी के दंगों पर दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला महान भारत के नागरिकों की निर्ममता के ख़िलाफ़ आया है

2002 की बात को कमज़ोर करने के लिए 1984 की बात का ज़िक्र होता है, अब 1984 की बात चली है तो अदालत ने 2013 तक के मुज़फ़्फ़रनगर के दंगों तक का ज़िक्र कर दिया है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

1984 को लेकर राहुल गांधी को सच स्वीकार करने का साहस दिखाना चाहिए

‘अगर आप एक नेता हैं और आपकी नज़रों के सामने बड़ी संख्या में लोगों का क़त्ल किया जाता है, तब आप लोगों की ज़िंदगी बचा पाने में नाकाम रहने की जवाबदेही से मुकर नहीं सकते.’

नरेंद्र मोदी और जकिया जाफ़री. (फोटो: पीटीआई)

गुजरात दंगा मामले में मोदी को क्लीनचिट के ख़िलाफ़ ज़किया की अर्ज़ी पर जनवरी में सुनवाई

दंगों में मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़किया जाफ़री ने एसआईटी के फैसले के ख़िलाफ़ उनकी अर्ज़ी को ख़ारिज किए जाने के गुजरात उच्च न्यायालय के पांच अक्टूबर, 2017 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

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गुजरात दंगे में सेना को राज्य सरकार से समय पर नहीं मिली थीं ज़रूरी सुविधाएं: पूर्व सेना अधिकारी

सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह ने बताया कि गुजरात दंगों के समय स्थिति संभालने पहुंचे सेना के दल को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध के बावजूद प्रशासन द्वारा समय पर ज़रूरी सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई गई थीं. अगर सेना को सही समय पर गाड़ियां मिल गई होतीं, तो नुकसान बेहद कम होता.

फोटो: पीटीआई

न चौरासी के दंगों में कांग्रेस का हाथ था, न 2002 में भाजपा का!

राहुल गांधी की कांग्रेस को सिख दंगों से अलग करने की कोशिश वैसी ही है, जैसी मोदी ने विकास के नारे में गुजरात के दाग़ छुपाकर की थी.

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‘वाजपेयी की विरासत बहुसंख्यकवादी राज्य की स्थापना करना है जो उनके अनुयायी बखूबी समझते हैं’

वीडियो: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद से अमित सिंह की बातचीत.

(फोटो: रॉयटर्स)

हमें वाजपेयी के बिना ‘मुखौटे’ वाले असली चेहरे को नहीं भूलना चाहिए

1984 के राजीव गांधी और 1993 के नरसिम्हा राव की तरह वाजपेयी इतिहास में एक ऐसे प्रधानमंत्री के तौर पर भी याद किए जाएंगे, जिन्होंने पाठ तो सहिष्णुता का पढ़ाया, मगर बेगुनाह नागरिकों के क़त्लेआम की तरफ़ से आंखें मूंद लीं.

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इस ‘श्रद्धांजलि’ से वह तिलांजलि नहीं छिपेगी, जो संघ ने अटल को जीते जी दे दी थी

स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के बाद अटल​ बिहारी वाजपेयी जब दीन-दुनिया से बेख़बर रहने लगे, तो क्या संघ परिवार के उन नेताओं में से ज़्यादातर ने, जो आज उनके लिए मोटे-मोटे आंसू बहा रहे हैं, कभी उनका हालचाल जानने की ज़हमत भी उठायी?

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वाजपेयी को किसी एक फ्रेम में माला पहनाकर भुलाया नहीं जा सकता है

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय समाज के उस मर्म को बखूबी समझते रहे कि अति की सोच भारत जैसे लोकतांत्रिक-सेक्युलर देश में संभव नहीं है. इसलिए पीएम की कुर्सी पर बैठे भी तो उन विवादास्पद मुद्दों को दरकिनार कर जिस पर देश में सहमति नहीं है.

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…जब वाजपेयी ने दी थी मोदी को राजधर्म निभाने की नसीहत

वीडियो: गुजरात दंगों के बाद पहली बार राज्य के दौरे पर गए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जब एक पत्रकार ने पूछा कि मुख्यमंत्री के लिए क्या संदेश है तब उन्होंने कहा, ‘राजधर्म का पालन करें.’

Gujarat-High-Court wiki

नरोदा पाटिया मामला: तीन दोषियों को 10 साल का सश्रम कारावास

2002 में गुजरात में भड़के दंगों में अहमदाबाद के नरोदा पाटिया क्षेत्र में भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी थी. इस घटना में मारे गए ज़्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदाय के थे.

(फोटो साभार: schools.olympiadsuccess.com)

एनसीआईआरटी की किताब में पढ़ाया जाएगा हिंदुत्व और 2014 के चुनावों में भाजपा की जीत का पाठ

एनसीईआरटी ने 12वीं कक्षा की नई किताब में भाजपा को मुस्लिम महिलाओं के हितों का पक्षधर बताया गया है.

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एनसीईआरटी ने अपनी किताब में गुजरात मुस्लिम विरोधी दंगों से ‘मुस्लिम विरोधी’ शब्द हटाया

12वीं कक्षा की पॉलिटिकल साइंस की किताब के पिछले संस्करण में ‘फरवरी-मार्च 2002 में गुजरात में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी’, लिखा था. अब इसमें से मुस्लिम शब्द हटाकर ‘गुजरात में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई’ कर दिया गया है.

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गुजरात दंगों के 16 साल: उम्मीदों के निशां बाकी हैं

2002 के गुजरात दंगों में अपनी ज़िंदगी बिखरते देख चुके प्रोफेसर जेएस बंदूकवाला मानते हैं कि भले ही देश भगवाकरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद अच्छे भविष्य की उम्मीद फीकी नहीं हुई है.

Zakia Zafri Narendra Modi PTI

गुजरात दंगा: मोदी की भूमिका की नए सिरे से जांच की अपील करने की ज़ाकिया को मिली अनुमति

गुजरात दंगों में षड्यंत्र के आरोप में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष जांच दल द्वारा ‘क्लीनचिट’ देने के फैसले को ज़ाकिया ने गुजरात हाईकोर्ट में दी थी चुनौती.

(फोटो: रॉयटर्स)

गुजरात दंगा: धार्मिक स्थलों की मरम्मत पर हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया ख़ारिज

गुजरात हाईकोर्ट ने दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों के पुनर्निमाण एवं मरम्मत के लिए राज्य सरकार को पैसों के भुगतान करने के लिए कहा था.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi being received by the Governor of Uttar Pradesh, Shri Ram Naik, the Union Home Minister, Shri Rajnath Singh and the Uttar Pradesh Chief Minister designate Yogi Adityanath, on his arrival, at Lucknow, Uttar Pradesh on March 19, 2017.

दीवार पर पहले ही लिखी जा चुकी थी यह इबारत

मोदी के हर क़दम ने हमें अचंभित किया है. यहां तक कि जब वे ज़हर उगलते रहे, तब भी हमारी प्रतिक्रिया ऐसी ही रही. योगी की ताजपोशी उनकी नयी पेशकश है. जो किया जा चुका है उसमें ख़ूबी तलाशना ही अब हमारा कर्तव्य रह गया है.

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गुजरात दंगा: 15 साल बाद भी अमानवीय ज़िंदगी जीने को मज़बूर पीड़ित

2002 के गुजरात दंगों में विस्थापित हुए लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. दंगों के 15 साल बाद भी उनके पास न ज़मीन है न आधारभूत सुविधाएं.