Chandrashekhar Azad

Lucknow: Bahujan Samaj Party supremo Mayawati addresses a press conference, in Lucknow, Sunday, Sept 16, 2018. (PTI Photo/Nand Kumar)

वाराणसी से चंद्रशेखर आज़ाद को लड़ाकर भाजपा दलित वोट को बांटना चाहती है: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि भीम आर्मी भाजपा की साजिश के तहत बनाया गया था और अपनी दलित विरोधी मानसिकता के साथ, यह अब तुच्छ राजनीति में लिप्त है.

मेरठ के अस्पताल में भर्ती चंद्रशेखर से बुधवार को प्रियंका गांधी ने मुलाकात की. (फोटो साभार: एएनआई)

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचीं प्रियंका गांधी

इस मुलाकात के बारे में मीडिया के सवाल पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि आप इस मामले का राजनीतिकरण करना चाहते हैं तो कीजिए, मैं सिर्फ उनका हाल जानने आई थी.

Lucknow: BSP supremo Mayawati addresses a press conference at her residence in Lucknow on Saturday. PTI Photo by Nand Kumar  (PTI3_24_2018_000088B)

भीम आर्मी जैसे संगठन चंदा जुटाने के लिए बसपा के नाम इस्तेमाल कर रहे हैं: मायावती

बसपा प्रमुख मायावती ने आरोप लगाया कि भीम आर्मी जैसे संगठन लोगों को जातियों के नाम पर एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. इससे केवल हिंसा होगी और समाज का ध्रुवीकरण होगा.

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क्या उत्तर प्रदेश में रासुका का इस्तेमाल बतौर सियासी हथियार मुस्लिमों के ख़िलाफ़ किया जा रहा है?

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के शुरुआती 10 महीने में तकरीबन 160 लोग रासुका के तहत गिरफ़्तार किए गए. इनमें शामिल पीड़ित मुस्लिम परिवारों का कहना है कि सांप्रदायिक कारणों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

भगवती चरण वोहरा. (जन्म: 04 जुलाई 1904 - अवसान: 28 मई 1930, फोटो साभार: शहीद कोश)

भगवतीचरण वोहरा: जिनके त्याग के आगे भगत सिंह को अपना बलिदान तुच्छ नज़र आता था

शहादत दिवस पर विशेष: क्रांतिकारी भगवतीचरण वोहरा के निधन पर भगत सिंह के शब्द थे, ‘हमारे तुच्छ बलिदान उस श्रृंखला की कड़ी मात्र होंगे, जिसका सौंदर्य कॉमरेड भगवतीचरण वोहरा के आत्मत्याग से निखर उठा है.’

(फोटो: Gandhimemorial.in)

जिन क्रांतिकारियों के सहारे संघ गांधी पर निशाना साधता है, वे आरएसएस कैंप से नहीं आये थे

आरएसएस अगर आज़ादी की लड़ाई के बारे में बात करे तो वो क्या बताएगा? अगर वो सावरकर के बारे में बताएगा तो अंग्रेजों को लिखे गए सावरकर के माफ़ीनामे सामने आ जाते हैं.