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नोएडा प्राधिकरण के ख़िलाफ़ किसानों का प्रदर्शन 28 दिनों से जारी, हज़ार से अधिक लोगों पर केस दर्ज

ज़मीनों का बढ़ी हुई दर से मुआवज़ा देने, आबादी की समस्याओं का निस्तारण संबंधी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नोएडा के 81 गांवों के किसान प्राधिकरण के ख़िलाफ़ पिछले 28 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं. सोमवार को प्रदर्शन के बाद 1,000 से अधिक लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. किसानों का कहना है कि इस सुनियोजित शहर (नोएडा) के विकास के लिए अपनी ज़मीन देने वाले किसानों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

हरियाणा: किसानों ने ख़ून से पत्र लिखकर राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु

हरियाणा के भिवानी ज़िले का मामला. किसानों का कहना है कि ज़िले के विभिन्न गांवों में बिना मुआवज़ा दिए तथा उनकी मर्ज़ी के बग़ैर जबरदस्ती उनके खेतों में टावर लगा दिए गए हैं, जिसके ख़िलाफ़ क़रीब डेढ़ दर्जन गांवों के किसान निमड़ीवाली गांव में पिछले 100 दिन से धरना दे रहे हैं.

दिल्ली: कोविड लॉकडाउन के दौरान ज़रूरी उपकरणों के अभाव में 25 सफाईकर्मियों की मौत

दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सफाईकर्मियों की लंबित तनख़्वाह जारी करने, उन्हें चिकित्सा सुविधा के साथ-साथ निजी सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों के इलाज और देखभाल के साथ-साथ चिकित्सा बीमा की कोई सुविधा प्रतिवादियों- केंद्र, दिल्ली सरकार और सफाई कर्मचारी आयोगों द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई है.

मणिपुरः कार्यकर्ता को हिरासत में रखने के मामले में कोर्ट ने मुआवज़े पर राज्य से जवाब मांगा

मणिपुर के कार्यकर्ता एरेन्द्रो लीचोम्बाम पर कोविड-19 संक्रमण के उपचार के तौर पर गौमूत्र एवं गोबर के इस्तेमाल को लेकर भाजपा नेताओं की आलोचना करने पर एनएसए के तहत मामला दर्ज कर गिरफ़्तार किया गया था. ज़मानत मिलने के बाद भी उन्हें रिहा नहीं किया गया था. बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी तत्काल रिहाई को आदेश जारी किया था.

कोविड से मारे गए लोगों के परिजनों को आर्थिक मदद के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत आर्थिक मदद की एक निश्चित राशि तय करने का निर्देश केंद्र को नहीं दे सकती लेकिन सरकार कोविड-19 से मारे गए लोगों के परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक मदद की राशि का न्यूनतम मानदंड हर पहलू को ध्यान में रखते हुए निर्धारित कर सकती है. इससे पहले वायरस से जान गंवा चुके लोगों के परिवार को चार-चार लाख रुपये का मुआवज़ा देने की मांग पर केंद्र ने असमर्थता जताई थी.

कोविड संकट: क्या सरकार की आलोचना से देश की छवि बिगड़ती है

कोविड प्रबंधन की आलोचना को मोदी सरकार छवि ख़राब करना बता रही है. हालांकि देश की छवि तब भी बिगड़ती है, जब प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में प्रतिद्वंद्वी महिला मुख्यमंत्री को ‘दीदी ओ दीदी’ कहकर चिढ़ाने पर उतर आते हैं. वह तब भी बिगड़ती है, जब उनके समर्थक हत्यारी भीड़ में बदल जाते हैं या बलात्कारियों के पक्ष में तिरंगे लहराकर जुलूस निकालते हैं.

सरकार कोविड से जान गंवाने वालों के परिवारों की मदद को तैयार नहीं, यह क्रूरता है: राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक श्वेत पत्र भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि कोविड की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए अभी से पूरी तैयारी की जाए. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर कर कहा था कि कोविड-19 से जान गंवा चुके हर व्यक्ति के परिवार को चार लाख का मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि आपदा प्रबंधन क़ानून में केवल भूकंप, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में ही मुआवज़े का प्रावधान है.

झूठे मामलों में फंसाए गए लोगों को मुआवज़े के दिशानिर्देश को लेकर अदालत का केंद्र को नोटिस

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह के झूठे आपराधिक मामलों में शिकायतकर्ता के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. अदालत में दायर याचिकाओं में कहा है कि फ़र्ज़ी दुर्भावनापूर्ण मुकदमों और उत्पीड़न के शिकार निर्दोष लोगों को मुआवज़ा देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है. बिना किसी ग़लती के जेल में बंद करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

किसी को फ़र्ज़ी केस में फंसाकर उसकी ज़िंदगी ख़राब कर देना इतना आसान क्यों है

ग़लत तरीके से बिना गुनाह के एक लंबा समय जेल में गुज़ारने वाले लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा की जवाबदेही किस पर है? क्या यह वक़्त नहीं है कि देश में पुलिस प्रणाली और अपराध न्याय प्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए जाएं?

दिल्ली दंगा: मौजपुर के दुकानदारों द्वारा किए गए दावों से बहुत कम मिला मुआवज़ा

वीडियो: उत्तर पूर्वी दिल्ली के मौजपुर इलाके में पिछले साल हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान तमाम दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया था. दुकानदारों का दावा है कि उन्होंने जितनी क्षतिपूर्ति का दावा किया था, उससे काफ़ी कम मुआवज़ा उन्हें प्रदान किया गया.

कोरोना वायरस महामारी के दौरान बेघर हुई महिला को चार लाख रुपये दे परिवार: सुप्रीम कोर्ट

पति की साल 2017 में मौत हो जाने के बाद परिवार से अलग रह रही महिला ने शीर्ष न्यायालय का रुख़कर वित्तीय राहत और संरक्षण का निर्देश देने का अनुरोध किया है.

गुजरात दंगा: सरदारपुरा नरसंहार मामले में दोषी क़रार 14 लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत दी

गोधरा ट्रेन नरसंहार के अगले दिन 28 फरवरी 2002 की रात को सरदारपुरा गांव में अल्पसंख्यक समुदाय के 33 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था, जिसमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे.

The rake of the TEJAS Train, being inspected by the Union Minister for Railways, Shri Suresh Prabhakar Prabhu, at Safdarjung Railway Station, in New Delhi on May 19, 2017.

लेट हुई तेजस एक्सप्रेस, आईआरसीटीसी यात्रियों को देगा 1.62 लाख रुपये का मुआवज़ा

देश की पहली निजी ट्रेन दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस 19 अक्टूबर को तीन घंटे से भी अधिक देरी से चली थी, जिसके लिए आईआरसीटीसी द्वारा उस दिन सफर करने वाले 950 यात्रियों को मुआवज़ा दिया जाएगा.

वाराणसी: प्रधानमंत्री मोदी की रैली के लिए काटी गई थी फसल, अब तक नहीं मिला मुआवज़ा

ग्राउंड रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश में वाराणसी के कचनार गांव में जुलाई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक रैली के लिए तकरीबन 10 एकड़ की ज़मीन का इस्तेमाल किया गया था. इस ज़मीन की फसल बर्बाद होने की वजह से प्रशासन ने स्थानीय किसानों को मुआवज़ा देने की बात कहीं थी.

गुजरात सरकार ने गोधरा रेल नरसंहार के 17 साल बाद किया मुआवज़े का ऐलान

गोधरा रेलवे स्टेशन पर 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच को आग लगा दी गई थी. इसमें 59 लोगों की जान गई थी, जिनमें से सात लोगों की अब तक शिनाख्त नहीं हो पाई. इस घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगा भड़क उठा था.