Lahore

कराची के रिहायशी इलाके में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं. (फोटो: रॉयटर्स)

पाकिस्तान का यात्री विमान लैंडिंग से पहले दुर्घटनाग्रस्त, 97 लोगों की मौत

पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के विमान ने शुक्रवार दोपहर लाहौर से कराची के लिए उड़ान भरी थी. राष्ट्रीय विमानन कंपनी के एयरबस ए320 में 91 यात्री और चालक दल के आठ सदस्य सवार थे.

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द वायर बुलेटिन: राजीव गांधी को ‘भ्रष्टाचारी नंबर वन’ कहने वाले बयान पर भी चुनाव आयोग ने मोदी को क्लीनचिट दी

चुनाव आयोग को भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ सबसे अधिक आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतें मिलने समेत दिनभर की महत्वपूर्ण ख़बरों का अपडेट.

शादमान चौक का नाम भगत सिंह चौक करने की मांग करने उनके प्रशंसक (फोटो साभार: ट्विटर/नायला इनायत)

पाकिस्तान ने शादमान चौक का नाम बदलकर भगत सिंह चौक किया

शादमान चौक पर 23 मार्च 1931 को अंग्रेजी हुकूमत ने क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर चढ़ाया था. उस दौरान यह चौक एक जेल का हिस्सा था.

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‘साहिर की शख़्सियत और उनकी शायरी एक-दूसरे में हूबहू उतर गए थे’

पुण्यतिथि विशेष: यह भी एक क़िस्म की विडंबना ही है कि जिस साहिर के कलाम गुनगुनाकर अनगिनत इश्क़ परवान चढ़े, उसकी अपनी ज़िंदगी में कोई इश्क़ मुकम्मल न हुआ.

स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह

‘हम चाहते हैं भगत सिंह की न्यायिक हत्या के लिए ब्रितानी हुकूमत भारत और पाकिस्तान से माफी मांगे’

भगत सिंह को निर्दोष साबित करने के लिए पाकिस्तान के लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दाख़िल करने वाले भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष और वकील इम्तियाज़ राशिद क़ुरैशी से बातचीत.

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मै नास्तिक क्यों हूं?

मेरे एक दोस्त ने मुझे प्रार्थना करने को कहा. जब मैंने उसे नास्तिक होने की बात बताई तो उसने कहा, ‘अपने अंतिम दिनों में तुम विश्वास करने लगोगे.’ मैंने कहा, ‘नहीं, प्यारे दोस्त, ऐसा नहीं होगा. मैं इसे अपने लिए अपमानजनक तथा भ्रष्ट होने की बात समझता हूं. स्वार्थी कारणों से मैं प्रार्थना नहीं करूंगा.’

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विभाजन से जुड़ी फिल्मों से पाकिस्तान डरता क्यों है?

पाकिस्तान से विशेष: अगर बेग़म जान या पाकिस्तान के बाहर विभाजन पर बनी कोई फिल्म सरकार को इतना डरा देती है कि उसे बैन करने से पहले देखना तक ज़रूरी नहीं समझा जाता, तो यह दिखाता है कि ये मुल्क किस कदर असुरक्षा और डर में जी रहा है.

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पाकिस्तान: गए थे पाप धोने, जान से हाथ धो बैठे

‘गद्दीनशीं अब्दुल वाहिद दरगाह आने वालों को ‘पाक़’ करने के लिए उनकी मर्ज़ी से उन्हें पीटता था. शनिवार को उसने 20 ज़ायरीनों की जान ले ली’

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कृष्णा सोबती: स्त्री मन की गांठ खोलने वाली कथाकार

‘मित्रो मरजानी’ के बाद सोबती पर पाठक फ़िदा हो उठे थे. ये इसलिए नहीं हुआ कि वे साहित्य और देह के वर्जित प्रदेश की यात्रा पर निकल पड़ी थीं. ऐसा हुआ क्योंकि उनकी महिलाएं समाज में तो थीं, लेकिन उनका ज़िक्र करने से लोग डरते थे.