SARS

New Delhi: Kerala CM Pinarayi Vijayan during a press conference in New Delhi on Saturday,June 23,2018.( PTI Photo/ Atul Yadav)(PTI6_23_2018_000063B)

केरल: राज्य चुनाव आयोग ने कोविड-19 की मुफ़्त वैक्सीन देने की घोषणा पर मुख्यमंत्री से जवाब मांगा

केरल में सोमवार को ख़त्म हुए निकाय चुनावों के बीच मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा पिछले सप्ताह राज्य में बिना किसी शुल्क के कोविड-19 टीका उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी. कांग्रेस नीत विपक्षी यूडीएफ और भाजपा ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की थी.

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन. (फोटो: पीटीआई)

केरल में सभी को मुफ़्त मिलेगी कोरोना की वैक्सीन: पिनराई विजयन

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार को कहा कि यह ज्ञात नहीं है कि राज्य में कोरोना की वैक्सीन की कितनी डोज़ उपलब्ध होंगी, लेकिन सरकार द्वारा इसे बिना शुल्क के वितरित किया जाएगा.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

उत्तराखंड: लॉकडाउन के बाद दोबारा स्कूल खुलने पर 80 शिक्षक कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए

ये 80 शिक्षक उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले के 20 सरकारी स्कूलों के हैं. मामले सामने आने पर प्रशासन ने इन स्कूलों को पांच दिन के लिए बंद कर दिया है. लॉकडाउन के बाद उत्तराखंड में बीते दो नवंबर से कक्षा 10 और 12 के स्कूलों को फ़िर से खोला गया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

भारत में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन के दूसरे चरण का मानव परीक्षण शुरू

महाराष्ट्र के पुणे स्थित भारती विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कोरोना वैक्सीन का इंसानों पर दूसरे चरण का परीक्षण शुरू हुआ है. कोविड-19 और एंटीबॉडी परीक्षण की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद दो लोगों को वैक्सीन की खुराक दी गई है, उन पर निगरानी रखी जा रही है.

(फोटोः पीटीआई)

चीन के बहिष्कार के देशव्यापी अभियान के बीच भारत ने चीनी कंपनी से खरीदे कोरोना जांच किट्स

विशेष: कोविड-19 संबंधी कामों को देखने के लिए आईसीएमआर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सर्वोच्च संस्था है. भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव और चीन की कंपनियों के बहिष्कार की मांग के बीच इसकी ओर से 33 लाख कोविड जांच किट्स के लिए टेंडर निकाला गया था, जिसमें 13.10 लाख की खरीद चीनी कंपनी से हुई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली सरकार ने अप्रैल से जून तक किसी बच्चे को मिड-डे मील योजना का लाभ नहीं दिया: आरटीआई

आरटीआई दस्तावेज़ों से पता चला है कि दिल्ली सरकार ने मार्च महीने में मिड-डे मील के तहत पके हुए भोजन के बदले में छात्रों के खाते में कुछ राशि डाली है, लेकिन ये भोजन पकाने के लिए निर्धारित राशि से भी कम है. इसके अलावा ये धनराशि भी सभी पात्र लाभार्थियों को नहीं दी गई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

जेलों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए आइसोलेशन वार्ड बने, रैपिड टेस्टिंग हो: समिति

कोरोना वायरस के मद्देनज़र जेलों में क़ैदियों की संख्या कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये समिति बनाई गई थी. समिति ने क़ैदियों को ज़मानत या पैरोल देने के मानदंडों में भी ढील दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: वीडियो ग्रैब/पीआईबी)

कोरोना के ख़िलाफ़ भारत की लड़ाई प्रभावी, हमारे यहां मृतकों की संख्या कम: नरेंद्र मोदी

21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक भारतीय की मृत्यु भी बेचैन करने वाली है लेकिन यह भी सच है कि हम उन देशों में से एक है जहां कम से कम मौतें हुई हैं. हालांकि दुनिया भर में कोविड-19 से हुई सर्वाधिक मौतों की सूची में भारत नौवें स्थान पर है.

REUTERS/Dado Ruvic/Illustration

क्या वजह है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाना मुश्किल साबित हो रहा है

अमूमन वायरस का डीएनए ऐसा होता है कि अनेक वायरस बनाते समय उनके ब्लू-प्रिंट में कोई ग़लती नहीं होती, इसीलिए वे ज़्यादा स्थिर रहते हैं और ब्लू प्रिंट में आसानी से बदलाव नहीं आते. पर कोरोना वायरस का ब्लू-प्रिंट डीएनए नहीं आरएनए है. बावजूद इसके ये अपने ब्लू-प्रिंट में कुछ हद तक ग़लतियां रोकने में सक्षम है, इसी कारण से हम नहीं जानते कि अगर कोई एक वैक्सीन विकसित की जाए, तो वह सब तरह के कोविड-19 वायरस पर असर करेगी या नहीं?

(फोटो: रॉयटर्स)

डब्ल्यूएचओ ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का क्लिनिकल ट्रायल दोबारा शुरू किया

मई के आख़िरी सप्ताह में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना मरीजों पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के परीक्षण पर रोक लगाई थी. अब मेडिकल जर्नल द लांसेट द्वारा उसके कोविड-19 के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के लाभों पर सवाल उठाने वाले अध्ययन पर चिंता जताए जाने के बाद यह क़दम उठाया गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

लॉकडाउन: त्रिपुरा सरकार ने चार लाख से ज़्यादा बच्चों को मिड-डे मील का खाद्यान्न तक नहीं दिया

कोरोना वायरस महामारी के कारण स्कूल बंद होने की अवधि में त्रिपुरा की भाजपा सरकार ने मिड-डे मील के एवज में छात्रों के खाते में कुछ राशि ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, जो कि सिर्फ़ खाना पकाने के लिए निर्धारित राशि से भी कम है.

New Delhi: Vendors at Okhla vegetable market during the nationwide lockdown, in wake of the coronavirus pandemic, in New Delhi, Wednesday, April 22, 2020. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI22-04-2020 000251B)

कोरोना वायरस: सुरक्षाकर्मी और सब्जी बेचने वालों को कराना होगा टेस्ट

आईसीएमआर ने फ्रंटलाइन वर्कर्स की सूची जारी है जिन्हें फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर कोविड-19 का टेस्ट कराने की तत्काल जरूरत होगी. फ्रंटलाइन वर्कर्स के रूप में चेक पॉइंट्स पर तैनात पुलिसकर्मी, बिल्डिंग सिक्योरिटी गार्ड, एयरपोर्ट स्टाफ, बस ड्राइवर और स्टाफ, सब्जी और दवा विक्रेताओं को चिह्नित किया गया है.

School children eat their free mid-day meal, distributed by a government-run primary school, at Brahimpur village in Chapra district of the eastern Indian state of Bihar July 19, 2013. Police suspect that India's worst outbreak of mass food poisoning in years was caused by cooking oil that had been kept in a container previously used to store pesticide, the magistrate overseeing the investigation said on Friday. REUTERS/Adnan Abidi

कोरोना: उत्तराखंड में हर पांच में से एक बच्चे को मिड-डे मील के तहत खाद्यान्न नहीं मिला

द वायर द्वारा प्राप्त किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि उत्तराखंड राज्य ने अप्रैल और मई महीने में लगभग 1.38 लाख बच्चों को मिड-डे मील मुहैया नहीं कराया है. राज्य ने इस दौरान 66 कार्य दिवसों में से 48 कार्य दिवसों पर ही बच्चों को राशन दिया.

(फोटो: रॉयटर्स)

डब्ल्यूएचओ ने कोरोना मरीजों पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के परीक्षण पर रोक लगाई

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने कहा कि मेडिकल जर्नल द लैंसेट में पिछले सप्ताह प्रकाशित एक अध्ययन में दिखाया गया था कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन लेने वाले लोगों में इसे न लेने वाले लोगों की तुलना में हृदय की समस्याओं और मौत का अधिक खतरा है.

(फोटो: रॉयटर्स)

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से कोरोना मरीजों में हृदय संबंधी परेशानियों और मौत का खतरा: अध्ययन

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कोविड-19 मरीजों पर मलेरिया रोधी क्लोरोक्वीन या हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाओं का इस्तेमाल क्लिनिकल ट्रायल्स के अलावा नहीं किया जाना चाहिए. इससे हृदय संबंधी परेशानियों के साथ मौत का खतरा भी बढ़ जाता है.