जम्मू कश्मीर: हाईकोर्ट ने यूएपीए के तहत आरोपी बनाए गए पत्रकार को अंतरिम राहत देने से इनकार किया

यूएपीए के तहत आरोपी बनाए गए कश्मीरी पत्रकार और लेखक गौहर गिलानी की गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण एवं प्राथमिकी रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर 20 मई से पहले जवाब दाखिल करने का आदेश दिया.

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कश्मीरी पत्रकार गौहर गिलानी (फोटो साभारः ट्विटर)

यूएपीए के तहत आरोपी बनाए गए कश्मीरी पत्रकार और लेखक गौहर गिलानी की गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण एवं प्राथमिकी रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर 20 मई से पहले जवाब दाखिल करने का आदेश दिया.

कश्मीरी पत्रकार गौहर गिलानी (फोटो साभारः ट्विटर)
कश्मीरी पत्रकार गौहर गिलानी (फोटो साभारः ट्विटर)

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने पत्रकार और लेखक गौहर गिलानी के विरूद्ध अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी को खारिज करने की उनकी मांग संबंधी याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए शुक्रवार को सरकार का रुख जानना चाहा.

जस्टिस अली मोहम्मद ने सरकार को नोटिस जारी कर उससे अपना रुख बताने को कहा एवं अगली सुनवाई की तारीख 20 मई से पहले पत्रकार की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

गिलानी ने वकील सालिह पीरजादा के माध्यम से याचिका दायर की है.

पीरजादा ने अपने मुवक्किल के विरूद्ध मामला दर्ज करने एवं साइबर थाने के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया है तथा गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण एवं प्राथमिकी रद्द करने की मांग की है.

कश्मीर जोन के साइबर थाने ने मंगलवार को गिलानी के विरूद्ध मामला दर्ज किया था और उन पर सोशल मीडिया पोस्टों के जरिए अवैध गतिविधि शामिल होने का आरोप लगाया है.

पीरजादा ने कहा, ‘साइबर पुलिस स्टेशन, कश्मीर जोन के पास गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत आने वाले अपराधों से संबंधित मामले को दर्ज करने और जांच करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि संबंधित पुलिस स्टेशन को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और अन्य संबद्ध अपराधों के प्रावधानों के तहत आने वाले अपराधों के संबंध में मामले के पंजीकरण और जांच के उद्देश्य से पुलिस स्टेशन घोषित किया गया है.’

पीरज़ादा की दलीलों का जवाब देते हुए, ‘वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता बीए डार ने अदालत को सूचित किया कि गिलानी के खिलाफ मामला साइबर पुलिस स्टेशन से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है.’

पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि थाने को भरोसेमंद सूत्र से यह जानकरी मिली कि गौहर गिलानी नामक एक व्यक्ति अपने पोस्टों के माध्यम से अवैध गतिविधि में शामिल है और सोशल मीडिया मंच पर उसके पोस्ट भारत की राष्ट्रीय अखंडता, संप्रभुता एवं सुरक्षा के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं.

प्रवक्ता के अनुसार अवैध गतिविधियों में कश्मीर घाटी में आतंकवाद का महिमामंडन करना, देश के प्रति असंतोष पैदा करने, लोगों के दिमाग में डर पैदा करना है .

स्वतंत्र पत्रकार गिलानी अतीत में जर्मन प्रसारक डॉयचे वेले के लिए काम कर चुके हैं. प्रवक्ता के अनुसार गिलानी के खिलाफ डराने धमकाने की कई शिकायतें भी मिली हैं.

बीते गुरुवार को भारतीय प्रेस परिषद ने गिलानी के खिलाफ दर्ज एफआईआर की निंदा की थी और इस तरह से एफआईआर दर्ज किए जाने को अभिव्यक्ति का गला घोंटना बताया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)